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शनिवार, 2 दिसंबर 2017

Expectations produce pain.

कुछ नहीं बदला , केवल मैं अपने से जो बोलता था
उसको बदला , और मेरी बाहर की साड़ी दुनिया बदल गयी

कल तक जो मुझे दुश्मन लगते थे , आज दोस्त हैं
केवल उनके बारे में मैंने अपनी राय बदली
बह तो बही हैं जो पहले थे

नफरत की सोच को , प्यार की सोच मे बदल दिया।
जिनके शब्दों से मुझे पीड़ा होती थी , उन शब्दों की परिभाषा अपने मन मे बदल दी

किसी ने पूछा क्या उसकी जली कटी सुन दिल दुखा ?
मैंने कहा नहीं : मेरी उससे आशा यें ही अधिक थी , गलती मेरी थी। 
अधिक आशाएँ रखना भी तो दुखों का कारण है। 

सुनने बाला स्तब्ध रह गया और मैं मुस्करा दिया।  मन खुश हो गया।  

रविवार, 26 नवंबर 2017

Power of Family



P


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Affirmation

“I will embrace the greatness that is within me.

I am overjoyed that the greatness within each of my family members is what makes us whole.

I will make more time for my loved ones and I will be open to whatever addition is coming my way. 

Life is good and I am going to continue to be positive and wise as I spread my branches.”

Repeat this 2 or 3 times daily.

                                                                  Source: Email from Aiden the Numerologist.

                                                                  शक्तिशाली सेल्फ टॉक

                                                                 1 ) मेरे अंदर छिपी महानता को मैं पहचानता हूँ और उसका अहबान करता हूँ। मैं अपने परिवार के सभी सदस्यों की शक्तियों को आग्रह करूँगा।  सभी शक्तिशाली हैं।

                                                                 2 ) मैं अपने प्यारों के लिए समय निकलूंगा और मेरे जीवन में जो भी बढ़ोतरी हो रही  उसका स्वागत करता हूँ।

                                                                 3 ) मैं यह जानकार खुश हूँ की मेरे परिवार के सभी सदसयों की खूबियाँ  मिल कर हमारे परिवार को एक सम्पूर्ण परिवार बनाती हैं।
                                                                 4 ) मैं अपने परिवार के लिए और समय निकलूंगा।
                                                                 5 ) जीवन बहुत अच्छा है और मैं सकारत्मक और बुद्धिशील रहकर अपने पंख फैलायूंगा

इसे दिन में 2 /3 बार दोहराने से इच्छित फल मिलना शुरू हो जाता यानि आपकी अपने मन  की शक्ति बढ़ने लगती है।  श्री गुरु ग्रन्थ साहिब में लिखा है "घर सुख मिलिया बाहर सुख पाया " . जैसे ही घर में सुख बढ़ेगा बैसे ही जीवन के दूसरे पहलु भी सुधरेंगे। करें और महसूस करें। 




गुरुवार, 16 नवंबर 2017

My pen

इतिहास ने जाना है
इतिहास ने माना है
कलम की ताकत
तलबार की ताकत से
हज़ारों गुना अधिक है

ताकत को पहचाना
और ताकत का प्रयोग
सेवा भाव से करना
कलम बाले को ताकत देता

यह अब उस पर है
बह कलम का प्रयोग
दूसरों की सेवा के लिए
करता है या अपनी कलम
का प्रयोग दूसरों की बर्बादी
और नफरत को बढ़ाबा देने के लिए
करता

जिसकी कलम से किसी को लाभ होता
है , भला होता उस कलम को हर कोई
सलाम करता है।

कमजोर भी उस कलम की छाया में
सुखी जीवन जीते हैं। 

जोरबान भी उस कलम के डर से अपने
बुरे कर्मों पर अंकुश लगते हैं।

भला = लाभ

कृष्ण भगवान् श्रीमद भागवत गीता में
कहते है
कर्म किये जा फल की इच्छा मत कर इंसान
ये है गीता का सरबप्रीोयो ज्ञान

बहुत अच्छा कर रहे करते रहो
मास्टर बन जाओगे।  दुनिया पूजेगी।
कलम का गलत इस्तेमाल मत करना

भगवन सब देखते हैं। 

जहाँ कुछ कर न सको बहां इष्ट देव को
प्राथना करना, बह सही  रास्ता दिखाएंगे।

गर्ब है तुम मेरे भाई हो

बुधवार, 15 नवंबर 2017

Over Analysis



जीवन को गहराई से पड़ने पर एक बात समझ में आई है कि बहुत सारे डर केवल मन के डर ही होते हैं।  जो जीवन में कभी घटित ही नहीं होते , परन्तु इंसान सारी सारी उम्र उन डरों के कारण मन ही मन घुटता रहता है। 

जैसे अखबारें पड़ कर , टीवी पर नकारत्मक ख़बरें देख कर मन को बिचलित करते रहना।  आज कल सोशल मीडिया का जमाना है।  इस पर चलने बाली वीडियो और कमेंट इंसान को परेशान करे रखते है।  कई लोग तो लाइक्स और सेल्फी के चाकर में अपना जीवन भी दाओ पर लगा देते हैं। 

यदि किसी का एक्सीडेंट हो जाये तो उसे मेडिकल सहायता देने की बजाये बहुत से उसकी वीडियो बना रहे होते है और उतने में उस व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है।  वीडियो बनाने बाले के मन उस इंसान के प्रति कोई सम्बेदना नहीं।  अपने वीडियो की ले में इतना असम्बेदंशील हो जाता है कि बाद मेँ पछताने के इलाबा कुछ नहीं रहता।

सोशल मीडिया का एक और पक्ष देखें।  सोशल मीडिया पर मिस्टर x के 300 से जयादा दोस्त थे।  शादी के अबसर पर इसने उन दोस्तों को बुलाया।  अपने पिता से लड़ झगड़ कर जो दोस्त जानते थे रिश्ते नाते थे उनका नंबर कटबा दिया।  परन्तु हुआ क्या ? केवल बधाई के कॉमेंट ही आये कोई भी बारात में नहीं आया।  और कुछ मुठी भर लोगों को साथ लेकर शादी मानाने गया।  बाद में बहुत दुखी रहा , सभी ने बड़ा मजाक उड़ाया।  अब न तो रिश्तेदार , न दोस्त उनके दुःख सुख में आते हैं।  यह है ओवर एनालिसिस और ओवर एक्सपेक्टेशंस  बिना किसी सोच समझ के। 

रात को जितने ज्यादा डरावने सीरियल टीवी पर देखोगे उतना डर लगेगा।  इसी तरह सुबह सुबह अख़बार में नकारत्म खबरें - एक्सीडेंट , मर्डर , किडनेपिंग पड़ोगे उतना दिन ख़राब रहेगा।  आहिस्ता आहिस्ता यह डर मन में बैठ जायेगा और हर सिचुएशन का आकलन डर से करोगे।  नुक्सान किसका आपका।  सोने से पहले शक्तिशाली विचार करें। 

जो जीवन में चाहते हैं उसे अपने इष्ट और दुनिया में जो आपके बजुर्ग नहीं हैं उनको प्रणाम करके अपने सपने पुरे करने के लिए सहायता के लिए प्रार्थना करें।  सुबह उठते ही अपने हाथ की हथेलियों को देखें।  इनको धनयबाद दें कि यह आप के सपने साकार करने में सबसे सहायक है। 

हथेलियां क्यों देखते हैं ?

शास्त्रों में लिखा है यदि जागने पर किसी नकारत्मक सोच बाले इंसान के दर्शन हो जाएँ तो दिन बुरा निकलता है।  हथेलियाँ तो अपनी है।  यह तो हमेशा ही सकारत्मक रहती है।  उसके बाद कोसा पानी पियें।  शरीर चुस्त फुरत रहेगा।  एक्सरसाइज करें किसी भी प्रकार की।  अपनी जीवन की जिम्मेबारी लें। 

PREPAREDNESS + Opportunity = LUCK  इसे दूसरी तरह भी लिखा जा सकता है
LUCK = Labour under correct knowledge


Moral = ओवर एनालिसिस इज मेन्टल पैरालिसिस।


रविवार, 12 नवंबर 2017

Parent Institute

ਸਾਡੀ ਪੈਰੇਂਟ ਇੰਸਟੀਟਿਊਟ   

 ਪਰਾਗ ਮਾਈਂਡ ਪਾਵਰ ਸਪੋਕਨ ਇੰਗਲਿਸ਼ ਇੰਸਟੀਟਿਊਟ    ਹੈ। 
ਐਡਰੈੱਸ : ਗਰੇਵਾਲ ਕੰਪਲੈਕਸ , ਗੁਰੂ ਨਾਨਕ ਕਾਲੋਨੀ , ਗਿੱਲ ਕੈਨਾਲ ਰੋਡ , ਨੇੜੇ ਬੰਦ ਧੁਰਿ ਫਾਟਕ , ਲੁਧਿਆਣਾ। 

ਫੋਨ : 098720 00716 ਜਾਂ 09463380909 .

ਕਿਵੇਂ ਪਹੁੰਚੀਏ :

1) ਜੀ ਐਨ ਈ ਵਲੋਂ : ਬੱਸ ਸਟੈਂਡ ਜਾਂ ਸਟੇਸ਼ਨ ਤੋਂ ਗਿੱਲ ਨਹਿਰ ਤੇ ਉੱਤਰੋ , ਦੁਗਰੀ ਪੁਲ ਬਾਲੀ ਤਰਫ ਨਹਿਰ ਦੇ ਕਿਨਾਰੇ 3 ਮਿੰਟ ਪੈਦਲ ਚਲੋ।  ਪੁਲ ਤੇ ਛੱਡੋ ਨ।  ਧੁਰਿ ਫਾਟਕ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾ ਗਰੇਵਾਲ ਕੰਪਲੈਕਸ ਵਿਚ ਇਹ ਇੰਸਟੀਟਿਊਟ ਹੈ।  ਕੋਰਸ 8 ਹਫਤਿਆਂ ਦੇ ਹਨ।  ਕੋਈ ਭੀ ਜਿਸ ਨੇ ਪੰਜਾਬ ਬੋਰਡ ਦੀ ਦਸਵੀਂ ਪਾਸ ਕੀਤੀ ਹੈ ਇਹ ਕੋਰਸ ਕਰ ਸਕਦਾ ਹੈ।   ਸਟੇਸ਼ਨ ਜਾਨ ਬੱਸ ਸਟੈਂਡ ਤੋਂ ਥ੍ਰੀ ਵ੍ਹੀਲਰ ਦਾ ਕਿਰਾਇਆ 10 ਰੁਪਏ ਲੱਗਦਾ ਹੈ। 

2) ਦੁਗਰੀ ਵਲੋਂ : ਬੱਸ ਸਟੈਂਡ ਤੋਂ ਥ੍ਰੀ ਵ੍ਹੀਲਰ ਲਬੋ 10 ਰੁਪਏ ਲੱਗਦੇ ਹੁਣ।  ਦੁਗਰੀ ਪੁਲ ਤੇ ਉੱਤਰੋ।  ਨਹਿਰ ਦੇ ਕੰਡੇ ਕੰਡੇ ਪੁਲ ਦੇ ਥੱਲੇ 2 ਮਿੰਟ ਚਲੋ ਜੀ ਐਨ ਈ ਕਾਲਿਜ ਬਲ ਨੂੰ। ਧੁਰਿ ਲਾਇਨ ਪਾਰ ਕਰਕੇ ਗਰੇਵਾਲ ਕੰਪਲੈਕਸ ਹੈ।  ਉਥੇ ਇੰਸਟੀਟਿਊਟ ਹੈ। 


ਹੋਰ ਜਾਣਕਾਰੀ ਲਈ ਪੜੋ :
Facebook Page : Prag Mind Power Spoken English Institute

8 ਹਫਤੇ ਦੇ ਸਰਟੀਫਿਕੇਟ  ਕੋਰਸ  ਹਨ  :

8 weeks Certificate Skill and Personality Development Courses.

1) Spoken English & Effective Communication (How to speak  and write simple ,correct and powerful English )

2) IELTS /TOEFL /TOIEC  ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ

3) Business English (English is the language of modern business. Email writing, report writing, business communication skills etc.)

4) English for Banking Examinations (Clerks and P.O)

5)English Grammar for Schools/Colleges  
Level   1:        9th, 10th, +1 and +2              ਸਮਾਂ 3 ਤੋਂ 4.10 ਪਮ 
Level   2:        Diploma/Degree B.A/M.A/MBA/MCA/Ph.D

100% ਗਰੰਟੀ ਜੇ ਤੁਸੀਂ ਮਨ ਲੈ ਕੇ ਕਲਾਸਾਂ ਲਯੋ ਤੇ ਪੜੋ। 

ਇਹ ਇੰਸਟੀਟਿਊਟ ਸਿਰਫ ਉਹਨਾਂ ਲਈ ਜੋ ਆਪਣੇ ਬਵਿਖ ਵਿਚ ਕੁਝ ਬਣਨਾ ਚਾਹੰਦੇ ਹਨ। 

 ਕੋਈ ਕਿਸੇ ਨੂੰ ਪੜਾ  ਨਹੀਂ ਸਕਦਾ।  ਪਰ ਹਰ ਕੋਈ ਜਿਨਾਂ ਚਾਹੇ ਪੜ ਸਕਦਾ ਹੈ।  ਪ੍ਰੋਫੈਸਰ ਸਾਹਿਬ ਨੇ 53 ਸਾਲ ਦੀ ਉਮਰ ਵਿਚ MBA ਕੀਤੀ ਹੁਣ 60 ਸਾਲ ਦੀ ਉਮਰ ਵਿਚ Google ਅਮਰੀਕਾ ਤੋਂ Digital Marketing ਦਾ ਕੋਰਸ ਕਰ ਰਹੇ ਹਨ। ਪ੍ਰੋਫੈਸਰ ਸਾਹਿਬ ਪਿਛਲੇ 9 ਸਾਲਾਂ ਤੋਂ ਗੂਗਲ ਲਈ ਲਿਖਦੇ ਹਨ

 ਉਹਨਾਂ ਦਾ ਕਹਿਣਾ ਜਦ ਤਕ ਜੀਵਨ ਤਦ ਤਕ ਗਿਆਨ  ਹਾਸਿਲ ਕੀਤਾ ਜਾ ਸਕਦਾ ਹੈ।  ਇਕ ਪੜਾਈ ਹੀ ਆਪਣੀ ਹੈ ਬਾਕੀ ਸਬ ਕੁਛ ਦੂਜੇ ਲੈ ਸਕਦੇ ਹਨ।  ਪੜਾਈ ਨਹੀਂ।  50 ਸਾਲ ਦੀ ਉਮਰ ਤੋਂ ਬਾਦ ਪੜਾਈ ਹੀ ਕਮ ਆਂਦੀ ਹੈ ਹੋਰ ਕੁਝ ਨਹੀਂ। 

ਪੜੇ ਲਿੱਖੇ ਇਨਸਾਨ ਦੀ ਸਾਰੀ ਦੁਨੀਆਂ ਵਿਚ ਵਾਹ ਵਾਹ ਹੁੰਦੀ ਹੈ।  

ਕਲਾਸ : 
ਸੋਮਬਾਰ ਤੋਂ ਸ਼ੁਕਰਬਾਰ ਹਫਤੇ ਵਿਚ ਪੰਜ ਦਿਨ।  1 ਘੰਟਾ ਪੜਾਈ 10 ਮਿਨਟ ਜੋ ਸਿਖਿਆ ਹੈ ਉਸ ਤੇ।   ਡਿਸਕਸ਼ਨ 

ਕੰਮ ਕਾਜ ਕਾਰਨ ਵਾਲਿਆਂ ਲਈ ਕਲਾਸ ਸਿਰਫ ਏਤਬਾਰ ਲੱਗਿਆ ਕਾਰਨ ਗਈਆਂ।  ਕੋਰਸ 2018 ਵਿਚ ਸ਼ੁਰੂ ਕੀਤੇ ਜਾਣਗੇ।  ਕਿਉਂਕਿ ਅੰਗਰੇਜ਼ੀ ਬੋਲਣਾ ਲਿਖਣਾ ਅੱਜ ਦੇ ਯੁਗ ਦੀ ਸਬਤੋਂ ਬੜੀ ਜਰੂਰਤ ਹੈ।  

ਇਕ ਨੋਟ : ਪ੍ਰੋਫੈਸਰ  ਸਾਹਿਬ ਨੇ ਪੰਜਾਬੀ ਦੇ  ਪੇਪਰ ਪਾਸ ਨਹੀਂ ਕੀਤੇ ਹੋਏ।  ਗੂਗਲ ਟੂਲ ਲਾ ਕੇ ਪੰਜਾਬੀ ਲਿਖਦੇ ਹਨ।  ਪੜੋ ਤੇ ਸਮਝੋ।  ਸਪੈਲਿੰਗ ਨ ਚੈਕ ਕਰੋ ਯਾ ਗਲਤੀਆਂ ਵਲ ਧਿਆਨ ਨ ਦਵੋਜੀ।  









जीवन दाता पत्र

जीवन दाता पत्र

1 यह विवरण एक मेंटोर ने एक सेमिनार में दिया।  परन्तु इस विवरण से सभी 100 से अधिक श्रोताओं को लाभ हुआ।  आप पड़  रहें हैं इस लिए आप को भी इससे बहुत लाभ होगा।  जीवन में कुछ छोटी छोटी घटनाएं अज्ञानता के कारण बड़ी बड़ी समस्याएं पैदा कर देती हैं।

2 सुविधा के लिए हम पात्रों के काल्पनिक नाम  रखते हैं।  :

-       शुभेन्दु (पिता)

-      सुमन (बहु)

-      सुलभ (सपुत्र )

-      अगम्य (शुवेन्दु की पत्नी )

3 शुभेन्दु की पत्नी अगम्य एक सुशिल और संस्कारी ग्रहणी थी।  दोनों ने जीवन भर अपने तीन बच्चों - दो बेटियों और बेटे सुलभ को पढ़ाया, लिखाया और अच्छे संस्कार दिए।  शुभेंदु  दिन भर खेतों में काम करता।  दिन ढलने के बाद थक कर घर आता और हाथ मुंह धो कर खाने का इंतज़ार करने लगता।  अगम्य बड़ी लगन और चाब से खाना बनाती।

4 जिस समय बह रसोई मे खाना बनाती तो हमेशा प्रभु के भजन का गुणगान करती।  जब भी उससे पूछा की ऐसा क्यों ?

 उसका एक ही उत्तर होता :             

प्रभु का सिमरन करने से खाने में सतगुण आ जाते हैं जिससे खाना खाने बाले इंसानों में भी सतोगुण परिवृति का आगाज़ होता है।

जब खाना पक जाता , सभी परिवार के सदस्य एक बिछोना बिछा कर उस पर बैठ जाते।  यह समय सभी के लिए ख़ुशी का समय होता।  पिता सबसे आगे, उसके बाद बच्चे।

कई बार बच्चे हाथ मुहं धो कर न बैठते तो अगम्य डांट कर उनेह हाथ धोने के लिए कहती।  इस समय दूसरे बच्चे जिस बच्चे को डांट  पड़ती को देख कर दांत निकलते और चिढ़ाते।

पिता मुस्कराता था।  मन ही मन प्रभु का धन्यवाद भी करता की उसका परिवार खुशहाल है।

5 समय बदलता है।  यह किसी के बश में नहीं है।  कोई भी इसे बदलने से रोक नहीं सकता।

जीवन के कुछ दिन, कुछ महीने बुरे हो सकते है पूर्ण जीवन कभी भी बुरा नहीं होता।

 बुरा तभी होता है जब इंसान अपने कर्म और सोच बुरी कर लेता है।  अच्छी किताबें देव प्रतिमाओं की तरह है।  जिनेह पड़ने से दिमाग खुलता है।  उत्कृष्ट भाव से लिखी किताबें पड़ने बाले को उत्कृष्ट बना देती हैं।  और नकारत्मक सोच से लिखी किताबें पड़ने बाले को निष्कृष्ट बना देती है।  चॉइस आपकी अपनी है।  आप क्या पड़ते हो , क्या देखते हो इसका जीवन पर बहुत प्रभाब पड़ता है।

6 हाँ तो समय बदलने लगा।  अगम्य की आकस्मिक मृत्यु हो गई।  बेटियों की शादी हो गयी। बेटीआं दिन त्यौहार पर आती और चली जाती।  जब तक बेटीआं और नाती (उनके बच्चे ) रहते शिवेंदु बहुत खुश रहता।  उसके बाद उस पर उदासी छा जाती।  सभी पिता की तरह शिवेंदु भी अपनी बेटिओं से बहुत प्यार करता था।  लेकिन उसे ज्ञान था बेटियन पराया धन है। 

 बेटे सुलभ की शादी सुमन से हो गई।  .शेवेन्दु अकेला पड़ गया।  हमेशा घर के बाहर पेड़ के नीचे अपनी चारपाई लगा कर चुपचाप लेटा रहता।  सुमन अपने ससुर की बहुत सेवा करती परन्तु फिर भी शेवेन्दु का स्वास्थ्य दिन ओ दिन गिरता ही जाता।  किसी को समझ न आता की क्या कारण है।  सपुत्र सुलभ बहुत ही चिंतित रहता।  अपने काम पर जा कर भी दिन भर अपने पिता के बारे में सोचता रहता।
What is life?

A journey from B to D. In between is C.

B=Birth, D=Death, C=Choice. Choice right, enjoy rail.

Choice wrong: Heal your heels inside the jail.

Choice lies with you whether you want to enjoy rail or rest in jail.

7 सुलभ की पत्नी अपने ससुर की इतनी चिंता क्यों करती थी।  यह भी एक घटना के कारण हुआ।  सुमन की नई नयी शादी हुई  थी।

परन्तु ससुराल में दो ननदें देख कर , बड़ा परिवार देख कर उसका व्यवहार अजीव हो गया।  उसने अपने पति से कहना शुरू कर दिया की बह तो अकेले घर में रहेगी।

सुलभ को यह सब सुन कर और जान कर बहुत ही दुःख हुआ।

उसका मन में अंतर्द्विन्द चलता रहता :          माता पिता को छोड़ता हूँ तो पाप लगता है क्यूंकि बही तो मेरे दृश्या   भगवन है।

 उन्हों ने जन्म दिया , उन्हों पढ़ाया लिखाया। अब बुढ़ापे में उनकी सेवा करना  मेरा धर्म है।
 यदि बह मेरा लालन पालन  न करते तो जो मैं आज हूँ क्या होता ?

 दूसरा विचार आता : पत्नी गर्भवती है उसे छोड़ता हूँ तो परिवार नष्ट होता है।  बिना परिवार जीवन क्या है ?

इसी अंतर्द्विन्द में उसने दुखी हो कर आत्म हत्या करने की सोची।

 परन्तु इससे  पहले उसे एक बजुर्ग ने सलाह दी की तू जा कर अपने माता पिता को अपनी समस्या बतादे।  बे तुम्हारी समस्या का हल कर देंगे।  हिम्मत करो।

8 सुलभ ने हिम्मत की और अपने माता पिता को अपनी समस्या बताई।  माता पिता ने कहा ये तो बहुत छोटी बात है।  जो बात सुलभ को बहुत ही बड़ी लग रही थी बह माता पिता को बहुत छोटी लगी।  सुलभ बहुत हैरान था। माँ बोली: हमने अपनी काट ली है तुम अपनी ख़ुशी से काटो।

 अपनी पत्नी को लेकर किसी किराये के मकान में रह लो।  सुलभः बहुत खुश था की उसकी समस्या का हल हो गया है।  पत्नी भी झट से मान गई।  सुलभ और सुमन के घर बेटे का जन्म हुआ।  सुमन ने अपनी माँ को बुलाया।  जरूरत होती है इन दिनों में।  उसकी सास अगम्य अपने पोते के बारे में सुन कर रह न सकी और हिम्मत करके आ गई बेटे के घर।  बहां पर दोनों समधने इकठी रही।

9 दो तीन दिन रहने के बाद सुलभ की सास यानि सुमन की माँ बोली : अच्छा बेटी तुम्हारी सास आ गई है अब मैं चलती हूँ घर भी देखना है।      सुमन बहुत गिड़गिड़ायी परन्तु उसकी माँ ने अपना सामान बांधा और चली गई।  अब सुमन की सास 40 दिन के बाद अपने घर जाने लगी तो सुमन ने उसके पायों पकड़ लिए और कहा : मां तुम ही मेरी मां हो , मेरी मां तो 3 दिन बाद चली गई।  रुको मैं भी अपना सामान बांधती हूँ और आपके साथ  अपने घर चलती हूँ।  माँ चुप।  बहु ने सामान बाँधा और अगम्य , सुलभ, सुमन और उनका नवजात शिशु तीनो अपने गाँब के घर लौट आये।

10 यही एक कारण था कि सुमन अपने ससुर का बहुत सामान करती थी।  उसकी हर जरूरत का ध्यान रखती थी।  क्यूंकि बह जान चुकी थी कि मेरा घर मेरा ससुराल है मायका नहीं।

11 अब शिवेंदु की बीमारी।  सुलभ को एक दिन एक ज्ञान बान सीनियर सिटीजन यानि बजुर्ग मिले।  उसने अपनी ब्यथा उसे सुनाई।  सुलभ ने कहा : मेरे पिता ही को पता नहीं क्या बीमारी लग गई है ? सुबह से शाम तक घर के प्राँगण में लेटे रहते है।  न किसी कुछ कहते हैं न कहीं आते जाते है।  बहुत डॉक्टरों को दिखाया है।  2 -3 लाख रूपए भी खर्च हुए है परन्तु लाभ कोई नहीं।  बुद्धिमान बजुर्ग ने कहा : एक उपाए है।  यह सुनते ही सुलभ की आँखों में चमक आ गई।  बोला : क्या है ? कृपया बताएं।

12 क्या आप अपने पिता को कोई पैसा देते है जो उनका ही हो कोई हिसाब न मांगे।  सुलभ ने कहा:  नहीं।
"तो आज जा कर 2000 रूपए अपने पिता को देना और उनके कान में कहना : पापा यह पैसे आपके हैं जो मर्जी करो इनका।  खायो पियो।  किसी को कोई हिसाब नहीं मांगेगा। "

सुलभ ने एक पत्र लिखा और अपने पिता से पड़ने को कहा जिस पर जो ज्ञानबान बजुर्ग ने कहा था लिखा था और इसके प्रभाब ने सुलभ को अचम्बा कर दिया। जो बह 2 -3 लाख रूपए लगा कर न कर पाया बह इस 2000 रूपए ने कर दिखाया।

पिता उठा और नहाया धोया और सफ़ेद रंग का साफ़ सुथरा कमीज पजामा पहना।

पगड़ी बाँधी।  पायों मे मौजे पहने।  दो घंटे के बाद अपने दोस्तों से मिल कर तारो ताज़ा अपने घर बापिस लोटा।  पोते से आज बड़ा हंस हंस कर दादा बातें कर रहा था।

 सुलभ और सुमन भी बहुत खुश थे की उनके पिता की बीमारी समाप्त हो गई है।

13  दूसरे दिन सुलभ ने सीनियर सिटीजन से यह सब बताया और पूछा कि यह सब कैसे हुआ।

 बजुर्ग ने बताया : बेटे जब बाप बजुर्ग हो जाता है तो उसे भी पैसे की जरूरत होती है परन्तु युवा बहु बेटे उसे यदि 100 रूपए दें तो उसका भी हिसाब मांगते हैं जिससे उसके आत्मसम्मान को ठेस पहुँचती है।  इसका इलाज दुनिया के किसी डॉक्टर के पास नहीं है।

  बहु और बेटे को अपने अपने माता पिता का शब्दों से सम्मान करना चाहिए और उनकी जरूरत के मुताबिक धन देना चाहिए।  अपशब्द या ऊँची टोन में बात नहीं करनी चाहिए।  मां बाप नहीं तो जन्म नहीं , जन्म नहीं तो दुनिया नहीं।  सुलभ ने उस बुद्धिमान इंसान का धन्यबाद किया।



बुधवार, 8 नवंबर 2017

Qualitative Living

एक गुण

जो हर जगह

हर समय

हर


प्रस्थिति में

काम देता है

USE Appreciation  instead of expectations
Welcome everyone with a smile .




मीठी बोलबानी 

मीठी बोलबानी बाला इंसान 
करेला यानि कड़बी बस्तु भी बेच सकता है 


परन्तु कड़बी ऊँची बोलबानी बाला इंसान 
शहद भी नहीं बेच सकता। 

कई लोग जैसे ही जीवन में तरक्की करते हैं उनकी बोलबानी मीठी से कड़बी हो जाती है। 

उनके लिए और सभी के लिए कबीर जी लिखते है :

बड़ा हुआ तो क्या हुआ , जैसे पेड़ खजूर 
पक्षी को छाया नहीं , फल लागे अति दूर। 



Garib Kaun

गरीब कौन ?

आज एक बहुत ही अजीब घटना घटी जिसने मुझे हंसाया भी और सोचने पर मज़बूर भी किया।

क्या है घटना ?

एक आदमी दूकान पर प्लास्टिक के लिफाफे लेने आया और उसने दूकानदार से लिफाफे मांगे।  दुकानदार ने कहा की लिफाफे हैं।  उसने उनका रेट पूछा।  दूकानदार ने कहा : 3 रूपए प्रति लिफाफा। 

बह बोला :                           100 रूपए के कितने दोगे ?

दुकानदार बोला :                  35 दे दूंगा

यानि 105 रूपए बनते हैं।  तुम 100 रूपए दे देना।

बह ब्यक्ति मान गया  और बोला : दे दो
दुकानदार ने जब 35 लिफ़ाफ़े कॉउंट करके दिए तो एक लिफाफा बाकि रह गया।  उसने कहा यह भी ले लो।

ब्यक्ति ने 36 लिफाफे ले लिए और बोला : कोई डिस्काउंट   

इससे पहले कि दूकानदार वोले , उस ग्राहक ने दो तीन बार अपने सर पर थप्पड़ मार दिया।

दुकानदार यह देख हैरान रह गया और कहा (वोला) : आप यह क्या कर रहे हैं?

ग्राहक ने बड़ी अजीबोगरीब मन में चल रही  व्यथा बताई :   साहिब , मैं एक अच्छे खासे घर का हूँ।  गाड़ी पर देखो ये लिफाफे लेने आया हूँ।  पहले एक दूकान पर पूछा उसने 6 रूपए लिफाफा बताया।  मैंने नहीं लिए।  दूसरे ने 4 रूपए लिफाफा बताया।  मैंने सोचा इससे कम मिलेगा तब लूंगा।  अब आप ने 3 रूपए लिफाफा बताया और तब भी मैंने आपसे मोल तोल  किया और आप ने मुझे 36 लिफाफे दे दिए।  फिर भी मेरा मन आपसे मोल तोल करने के लिए जुबान खोलने बाला था।  इस लिए मैंने अपने आप को थप्पड़ मारा।

मैं इस देश से ऑस्ट्रेलिआ चला गया।  डॉलर कमाता हूँ पर सोच गरीब ही है।  हमेशा कुछ भी खरीदता हूँ तो यही चाहता हूँ की और डिस्काउंट मिल जाये।  हालाँकि आपकी दूकान तक आने के लिए मैंने कार का प्रयोग किया जिस में पेट्रोल डालता है।  पेट्रोल हो सकता मैंने 100 रूपए का जला दिया हो परन्तु मन को शांति है कि मैंने लिफाफे  आधे मोल में खरीदें हैं।

अब मुझे यह समझ नहीं आ रहा कि मैं अक्ल मंद हूँ या मुर्ख।  यदि पेट्रोल के पैसे लगा लूँ तो लिफाफा तो 6 रूपए में ही पड़ा।  समय बैसे ही बर्बाद किया है।

ग्राहक और दूकान दार दोनों बहुत खुल कर हसे।  ग्राहक ने 100 रूपए दिए और चला गया।

मैं सोच रहा था गरीब कौन ? जिसके पास खाने पीने या रहने के लिए घर नहीं यानि पैसे की कमी है ?

या

जो कमाते भी काफी हैं परन्तु सोच से हमेशा लालची हैं।





सोमवार, 16 अक्टूबर 2017

MA Part 1 58% ਲੈ ਕੇ ਅਤੇ MA PART 2 64% ਲੈ ਕੇ ਪਾਸ ਕੀਤੀ।  ਜਦ ਪਾਸ ਹੋਇ ਤਾਂ ਖੁਸ਼ੀ ਨਾਲ ਮਠਿਆਈ ਦਾ ਡਿੱਬਾ ਲੈ ਕਿ ਮੈਡਮ ਨੂੰ ਘੁੱਟ ਕੇ ਜੱਫੀ ਪਾ ਕੇ ਧਨਬਾਦ ਕਰਕੇ ਗਈ। 

ਸੋ ਕਿਸੇ ਨੂੰ ਗਾਈਡ ਕਰਨ ਦਾ ਇਡਾ ਬਡਾ ਤੋਹਫ਼ਾ ਸ਼ਾਇਦ ਹੀ ਕਿਸੇ ਹੋਤ ਕੰਮ ਵਿਚ ਹੋਵੇ। 

8. ਹੁਣ ਮੁੱਦਾ : ਮੇਰੇ  ਕੋਲ ਹੁਣ ਇੰਸਟੀਟਿਊਟ ਦੋਵਾਰਾ ਚਲਾਨ ਲਈ ਸਭ ਕੁਝ ਹੈ।  ਆਫਿਸ ਹੈ।  ਇੰਟਰਨੇਟ ਦੀ ਅਤੇ ਗੁੱਗਲ ਦੀ ਸਪੋਰਟ ਹੈ।  ਪਹਿਲਾ ਇਹ ਸਭ ਨਹੀਂ ਸੀ।  ਮੈਡਮ ਨੇ ਵਾਸਤੁ ਭੀ ਸਹੀ ਕਰ ਦਿਤੀ ਹੈ।  ਮੇਰੇ ਕੋਲ ਇਕ F D ਹੈ ਜੋ ਤੁਅਸੀਂ ਰੱਖ ਲਵੋ ਅਤੇ ਮੈਨੂੰ ਪੈਸੇ ਦੇ ਦਵੋ।  ਜਦੋਂ ਮੇਰੇ ਕੋਲ ਪੈਸੇ ਹੋਣ ਗੇ , ਤੁਹਾਨੂੰ ਦੇ ਕੇ ਲੈ ਲਵਾਂ ਗਾ।  ਤੁਹਾਡੇ ਪਹਿਲੇ ਪੈਸੇ ਭੀ ਜਲਦ ਮਿਲ ਜਾਣ ਗੇ। 

Value of a word.


Image result for words from letters

Pic courtesy: www.learningsolutionsmag.com


A word can trigger a cell in your mind. That trigger can become s a source of change of the course of your life.

From letters words are formed.

Words have power. Be careful when you read words. Powerful make you powerful and vice-versa.

शब्दों का संसार बहुत ही सुन्दर संसार है।  एक शब्द आपके जीवन की दिशा बदल सकता है। 
शब्दों की शक्ति मन और बूढी दोनों को प्रभाबित करती है।  शब्द शक्ति देते हैं और इसके बिपरीत भी होता है। 

शब्दों को सोच समझ कर बोलना और पड़ना चाहिए।

ਸ਼ਬਦਾਂ ਦੀ ਦੁਨੀਆਂ ਬਹੁਤ ਬਡ਼ੀ ਹੈ।  ਇਕ ਸ਼ਬਦ ਜਿਉਣ ਦਾ ਢੰਗ ਹੀ ਬਾਦਲ ਦਿੰਦਾ ਹੈ। 
ਚੰਗੇ ਸ਼ਬਦ ਇਨਸਾਨ ਨੂੰ ਚੰਗਾ ਬਣਾਂਦੇ ਹੁਣ ਅਤੇ ਸ਼ਕਤੀ ਦੇਂਦੇ ਹੁਣ।  ਦੂਜੇ ਪਾਸੇ ਭੀ ਕਈ ਬਾਰ ਹੋ ਜਾਂਦਾ ਹੈ। 

ਇਸ ਲੇਇ ਜਿਹੜਾ ਭੈੜੇ ਸ਼ਬਦਾਂ ਦਾ ਸਹਾਰਾ ਲੈਂਦਾ ਹੈ ਉਸ ਤੋਂ ਬਚੋ।  

बुधवार, 4 अक्टूबर 2017

Learn Better English

ENGLISH speaking and writing is a personal power.  English is the language of the business world. Better English writing gives better results in Business and Job/Profession.

ਕਿਸੇ ਭੀ ਕੰਮ ਜਾਂ ਨੌਕਰੀ ਲਈ ਤਿਨ ਭਾਸ਼ਾਬਾਂ ਦਾ ਚੰਗਾ ਗਯਾਨ ਹੋਣਾ ਜਰੂਰੀ ਹੈ

1) ਮਾਂ ਬੋਲੀ ਯਾਨੀ ਮਾਤਰ ਭਾਸ਼ਾ = ਪੰਜਾਬੀ

2) ਰਾਸ਼ਟਰ ਭਾਸ਼ਾ ਯਾਨੀ ਦੇਸ਼ ਦੀ ਬੋਲੀ = ਹਿੰਦੀ

3) ਅੰਤਰਰਾਸ਼ਟਰੀ ਭਾਸ਼ਾ = ਅੰਗਰੇਜ਼ੀ

Asian Development Bank ਦੀ ਰਿਪੋਰਟ ਦੇ ਮੁਤਾਬਕ ਜੋ ਭੀ ਕੋਈ ਚੰਗੀ ਅੰਗਰੇਜ਼ੀ ਬੋਲ ਅਤੇ ਲਿਖ ਸਕਦਾ ਹੈ , ਉਹ ਦੂਜਿਆਂ ਕੋਲੋਂ 4-5 ਗੁਨਾ ਜਿਆਦਾ ਕਮਾਂਦਾ ਹੈ ਅਤੇ ਸਮਾਜ ਵਿਚ ਉਸਦਾ ਰੁਤਬਾ ਭੀ ਬੱਧ ਹੁੰਦਾ ਹੈ। ਅੰਗਰੇਜ਼ੀ ਬੋਲਣਾ ਅਤੇ ਲਿਖਣਾ ਇਕ ਕਲਾ ਹੀ ਨਹੀਂ ਬਲਕਿ ਅਜ ਦੇ ਯੁਗ ਦੀ ਸਭਤੋਂ ਬੜੀ Life Skill ਹੈ।





ਪੰਜਾਬ ਦੇ ਵਿਚ ਅੰਗਰੇਜ਼ੀ ਦੇ ਹਾਲਾਤ :


1. ਇਕ ਅਖਬਾਰ ਨੇ ਲਿਖਿਆ ਇੱਕਲੇ ਲੁਧਿਆਣਾ ਜਿਲੇ ਵਿਚ ਹੀ ਪੰਜਾਬੀ ਸਕੂਲਾਂ ਦੇ 8645 ਬੱਚੇ ਫੇਲ ਹੋਏ ਹਨ ।

2. ਦੂਜੇ ਤਰਫ ਅੰਗਰੇਜ਼ੀ ਸਕੂਲਾਂ ਦੀ ਪੜੋ।

ਇਕ ਬਾਪ ਬੜਾ ਖੁਸ਼ ਸੀ ਕਿ ਮੇਰਾ ਮੁੰਡਾ ਬੜੀ ਅੰਗਰੇਜ਼ੀ ਬੋਲ ਲੈਂਦਾ ਹੈ।

ਟ੍ਰੇਨਰ ਨੂੰ ਖੁਸ਼ ਹੋ ਕਿ ਕਿਹਾ : ਮੇਰਾ ਮੁੰਡਾ ਬੜੀ ਸੋਹਣੀ ਅੰਗਰੇਜ਼ੀ ਬੋਲਦਾ ਹੈ।

ਟ੍ਰੇਨਰ ਨੇ ਕਿਹਾ : ਕਿਸੇ ਦਿਨ ਲਿਆ ਕੇ ਮਿਲਾ ਦੇਣਾ।


3)ਖੁਸ਼ੀ ਨਾਲ ਇਕ ਦਿਨ ਉਸ ਨੂੰ ਲੈ ਆਯਾ ਤੇ ਟ੍ਰੇਨਰ ਨੇ ਪੁੱਛਿਆ :

Q: What are you doing?
Ans. I have given the exam of +2.

Trainer said:

My dear son, a student takes the exam and teacher gives the exam.

This is wrong sentence.

So, right sentence is : I have taken the exam of +2.

4) ਉਸ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਮੁੰਡਾ ਤਾਂ ਬੋਲਿਆ ਹੀ ਨਹੀਂ। ਬਾਪ ਨੇ ਇਕ ਦੋ ਗੱਲਾਂ ਕੀਤੀਆਂ ਤੇ ਉੱਠ ਕੇ ਬਾਹਰ ਚਲਾ ਗਯਾ।

ਕਹਿਣ ਲਗਾ ਤੂੰ ਮੇਰੇ ਪ੍ਰੋਫੈਸਰ ਕੋਲ ਬੇਇਜਤੀ ਕਰਵਾ ਦਿਤੀ ਹੈ।

ਮੁੰਡਾ ਚੁੱਪ ਚਾਪ ਸੁਣਦਾ ਰਿਹਾ।


5) ਇਸੇ ਤਰ੍ਹਾਂ ਬਹੁਤ ਸਾਰੇ ਬਹੁਤ ਸਾਰੀ ਅੰਗਰੇਜ਼ੀ ਬੋਲਦੇ ਹਨ ਪਰ ਬਹੁਤ ਸਾਰੀ ਗਲਤ। ਇਸ ਲਈ ਉਹ ਲਿਖਦੇ ਨਹੀਂ। ਲਿਖਣ ਨਾਲ ਗ਼ਲਤੀਆਂ ਪਕੜੀਆਂ ਜਾਂਦੀਆਂ ਹਨ। ਗ਼ਲਤੀਆਂ ਕਰੋ ਉਹਨਾਂ ਤੋਂ ਘਬਰਾਓ ਨ। ਬਾਰ ਕਰੋ। ਪਰ ਇਕ ਗਲਤੀ ਤੀਸਰੀ ਬਾਰ ਨਾ ਕਰੋ। ਹਰ ਬਾਰ ਨਵੀਂ ਗ਼ਲਤੀ ਕਰੋ ਤੇ ਸੁਧਾਰੋ। ਜੋ ਗ਼ਲਤੀਆਂ ਨਹੀਂ ਕਰਦੇ ਉਹ ਜੀਵਨ ਵਿਚ ਕੁਝ ਸਿੱਖ ਹੀ ਨਹੀਂ ਸਕਦੇ। ਕਈ ਗ਼ਲਤੀਆਂ ਕਾਰਨ ਤੋਂ ਡਰਦੇ ਹੀ ਬੜੇ ਹਨ। ਜੋ ਭੀ ਇਨਸਾਨ CYCLE , SCOOTER , CAR ਚਲਾ ਸਕਦਾ ਹੈ ਉਹ ਸਾਡੇ ਕੋਰਸ ਕਰ ਸਕਦਾ ਹੈ। ਉਹਨਾਂ ਨੂੰ ਚਲਾਨ ਲਈ ਭੀ ਸਿੱਖਣਾ ਪੈਂਦਾ ਹੈ ਗਿਰਨਾ ਪੈਂਦਾ ਤਾਂ ਹੀ ਮਾਹਰਿਯਾਤ ਆਈਉਂਦੀ ਹੈ। ਅੰਗਰੇਜ਼ੀ ਬੋਲਣ ਲਈ ਭੀ ਇਹੋ ਕਰਨਾ ਪੈਂਦਾ ਹੈ। ਬਾਰ ਬਾਰ ਕੋਸ਼ਿਸ਼ ਅਤੇ ਦਮ ਰੱਖ ਕੇ ਪੜਨਾ। ਫਿਰ ਅੰਗਰੇਜ਼ੀ ਬੋਲਣਾ ਲਿਖਣਾ ਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ। ਡਰਨ ਨਾਲ ਕੁਝ ਨਹੀਂ ਆਂਦਾ।

ਅਸੀਂ ਤੁਹਾਨੂੰ :



"How to speak correct,simple and powerful English"


ਸਿਖਾਂਦੇ ਹਾਂ

ਮਾਈਂਡ ਪਾਵਰ ਕਿਸੇ ਭੀ ਸਕੂਲ ਕਾਲਿਜ ਜਾਂ ਯੂਨੀਵਰਸਿਟੀ ਵਿਚ ਨਹੀਂ ਪੜਾਈ ਜਾਂਦੀ ਹੈ।

***** ਕੰਪੀਟੀਸ਼ਨ ਵਿਚ ਜਿੱਤ ਲਈ 1 ਟਿਪ ! ******

ਇਕ ਵਿਸ਼ੇ ਦੀਆਂ 10 ਕਿਤਾਬਾਂ ਪੜ੍ਹ ਕੇ ਆਪਣੇ ਆਪ ਨੂੰ ਕਾਮਫੂਜ ਨ ਕਰੋ।

ਬਲਕਿ ਉਸ ਵਿਸ਼ੇ ਦੀ 1 ਕਿਤਾਬ ਲਬੋ ਤੇ ਉਸ ਨੂੰ 10 ਬਾਰ ਪੜੋ। ਤੁਸੀਂ ਗਿਆਨ ਬਾਨ ਬਣ ਜਾਯੋਗੇ।
ਉਸ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਜਿੰਨੀਆਂ ਮਰਜੀ ਕਿਤਾਬਾਂ ਉਸ ਵਿਸ਼ੇ ਤੇ ਪੜ੍ਹੋ

ਇਕ ਨੋਟ :

ਟ੍ਰੇਨਰ ਨੇ ਕਿਸੇ ਸਕੂਲ ਕਾਲਜ ਵਿਚੋਂ ਪੰਜਾਬੀ ਦੇ ਪੇਪਰ ਪਾਸ ਨਹੀਂ ਕੀਤੇ ਹੋਏ। ਉਹ ਅਮਰੀਕਾ ਤੋਂ QUALIFIED ਹਨ। ਪੰਜਾਬੀ ਗੂਗਲ ਟੂਲ ਲਾ ਕੇ ਲਿਖਦੇ ਹਨ। ਇਸ ਲਈ ਸਿਰਫ ਪੜੋ ਤੇ ਸਮਝੋ। ਪੰਜਾਬੀ ਦੀ ਗਰੈਮਰ ਜਾਂ ਸਪੈਲਿੰਗ ਤੇ ਧਿਆਨ ਨ ਦਵੋ ਜੀ।







रविवार, 1 अक्टूबर 2017

SMALL




SMALL

IS

POWERFUL.

रविवार, 10 सितंबर 2017

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Attention: Google


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I clicked for buying extra space 100 FB. But the billing information did not accept my Rupay Card as I have the Rupay Card issued by my banker in India.


Please let me know the solution.

Thank you Google.


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गुरुवार, 31 अगस्त 2017

Basic Principles of Ayurveda

How to make living easy and happy?




AYURVEDA - The basic principles

 1. The biorhythm among humans and animals  is transferred from grandfather to father and father to son.

Biorhythm has mainly 3 components:


  • Intellectual Level:
  • Physical Level and 
  • Emotional level


2. These levels keep on changing  from day to day or hour by hour and create lot of imbalances in the body and mind. The movement of the various planets in the solar system impacts the body i.e. low and high moods are caused due to these movements. They are similar as the waves in the ocean go up and down many times during the day.

3. Mind is the master to cause  change in moods.

4. Brain( gross form of the mind) is the engine of the train called body.

5, Ayurveda has based itself on the doshas i.e Vaat, Pit and Cough that carry the functions of the body of an individual. Excess or deficit of any dosha causes imbalance in body and personality. Happiness, anger, low moods etc. are generally have the roots in imbalance of these doshas.

6. Individuals can master these doshas and manage them to create balance in Mind, Body and Spirit.

7. Ayurveda works more on "prevention is better than cure" principle.

9. Right sleep, right eating, right thinking, right behaiour along with "We attitude" are generally the benefits of Ayurveda.

10. Holistic approach of health and life is the guiding principle of Ayurveda.

Inputs by: Dr. R.Sharma, BAMS, MPH

Pic courtesy: www.trueshayri.in












































गुरुवार, 10 अगस्त 2017

A Teacher


A teacher is not a common man


And a common man can’t be a teacher.


Source: An email by Dr. Varinder Goel, MTC (Global)