Self Acceptance is key to
BIG ACHIEVMENTS in life.
Self acceptance removes
self conflict.
कल एक बिद्यार्थी कैरियर (Career Guidance and Mentoring) गाइडेंस के लिये आया।
फ्रंट डेस्क अटेंडेंट ने जो बह कहना चाहता था को रिकॉर्ड किया और प्रोफेसर साहिब को दे दिया।
अब इस बिद्यार्थी ने क्या कहा:
1
मैं प्राइवेट स्कूल में नहीँ पढ़ पाया कियूंकि मेरी फैमिली फीस और खर्च अफोर्ड नहीँ कर सकती।
2
मेरे पिता बिजली का काम करते हैं औऱ 10बीं पढ़े हैँ।
3
मेरी कोई ख़ाहिश पूरी नहीँ की।
4
जब भी कभी कोई पैसा मांगो तो पिता डांटने लग पड़ते हैं।
मां रो पड़ती है।
बहन पिता के डर से ही भाग जाती है।
5
घर में पढ़ने का माहौल है ही नहीँ है।
दादा जी 4 बजे पाठ करना शुरू कर देते है। नींद भी पूरी नहीँ होती।
सारा दिन थकावट रहती है।
माता जी पिता के काम पर जाते ही TV शुरू कर डेली सोप देखती है और जबरदस्ती हमें सुनाती है।
दिमाग में पढ़ाई की बजाय बह TV सीरियल ही रहते हैं।
पढ़ाई की बात करूं तो कहती है: किस्मत में होगा तो पास हो जायोगे।
कभी एक बाबा और कभी दूसरा बाबा।
मुझे तो बहुत डर लगता है।
यह सब सुन कर, प्रोफेसर साहिब को बिद्यार्थी को आज (13-2-2021) अपने पास बुलाया।
प्रश्न
1
आप हर रोज कितनी देर पढ़ते हैं?
* कभी पड़ता हूँ कभी नहीँ।
2
दोस्तों से कितनी देर मिलते हो?
* 4 से 5 घन्टे ।
3 सोशल मीडिया/tv या फोन पर कितने समय बिताते हो।?
* शायद 3 -4 घन्टे।
आप कल आना।
बह विद्यार्थी आज(13.2.2021) आया और प्रोफ़ेसर साहिब ने ऐसे गाइड किया।
1
जरूरी नहीं कि पढाई प्राइवेट स्कूल्ज में ही अच्छी होती है।
बड़े प्राइवेट स्कूलों में स्टाफ की योग्यता ग्रेजुएशन /पोस्ट ग्रेजुएशन होती है जबकि सरकारी स्कूल में कम से कम ग्रेजुएशन और B ed होना जरूरी है।
नम्बर ही जीवन नहीँ हैं।
धैर्य, दया, मौन, शांति, दूरदर्षिता, मैत्री, मानवीय गुण, नम्रता, सरलता और संतूष्टि भी पढ़ाई का हिस्सा है जो जीवन को सम्पूर्णता देते हैं।
धन दौलत होने के बाबजूद भी कुछ लोग दुःखी हैं क्योंकि उनके पास उपरलिखित गुण नहीँ हैं।
इनका सही समीकरण सरकारी स्कूलों में दिखता है।
कहते हैं:
Contented pauper is happier than uncontented king.
*संतुष्ट रंक असुंष्ट राजा से बेहतर होता है ।*
प्राइवेट स्कूल में तो नंबर दौड़ लगी हुई है।
☺️
ज्ञान और गुण संचार तो शून्य समान है।
इसलिये इस हीन भावना से ग्रस्त न हो।
और अपने आप को उपर उठाओ।
श्री लाल बहादुर शास्त्री जी भारत के प्रधानमंत्री थे और सरकारी स्कूल में पढ़े थे ।
फीस 10 पैसे प्रति महीना थी।
जो गरीबी के कारण उसके पिता नहीँ दे सकते थे। 1932 में कहाँ होते थे पैसे।
बच्चों का पेट भरने के लिये मां बाप 2 मुठी कनक के लिये महीनों जागीरदारों के खेतोँ में काम करते थे।
भारत गुलाम था तब।
ऐसे हालात में सरकारी स्कूल में पढ़ कर भी शास्त्री जी भारत के प्रधानमंत्री बने।
2
आप अपना समय प्रबंदन करो।
7-8 घन्टे TV, सोशल मीडिया या फोन पर बिताते हो इसमें से 1/2 भी अपनी पढ़ाई पर लगायोगे तो जीवन भर सुखी रहोगे।
पढ़ाई, ज्ञान, गुण, काबलियत ही आपकी सारी उम्र सहायता करेगी, सोशल मीडिया, TV या दोस्त नहीँ।
सोशल मीडिया, tv खाली समय बिताने के लिये सही है परंतु क्या एक कप चाय दे सकता है। नही न।
अभी तो माता पिता आपका साथ दे रहे हैं,
जब से पैदा हुये हो खाना/फीस दे रहें हैं।
जैसे ही उम्र में बड़ोगे तो सभी जिमेबारी आप पर आ जायेगी।
कोई दोस्त सारी उम्र साथ न देगा।
हाँ सच्चे दोस्त जीवन का गहना होते हैं, परन्तु सच्चे दोस्त भी आपके घर के लिये धन नहीँ देंगे ।
उनका साथ ही बड़ा मनोबल देता है।
तब एक दम से पढ़ना या काबिल बनना अथवा धन कमाना बहुत कठिन हो जाएगा।
इस लिये आज ही अपनी जिमेबारी समझो,
पिता अपनी जिमेबारी का निर्वाह कर रहे हैं, माता अपनी- खाना बनाती है, कपड़े धोती है, घर संभालती है।
पिता की छत्र छाया ही बड़ी है, यह घर के सभी मेंबर को सुरक्षा का अहसास देती है।
क्या माता का काम आपके पिता, दादा या आप कर सकते हो? नहीँ न। इसलिये माता का सम्मान और पिता का मान औऱ सहयोग आपको जीवन में सम्पूर्णता देगा
आप बिद्यार्थी हो। बिद्यार्थी की(अपनी ) जिमेबारी समझो।
आपकी जिमेबारी क्या है?.
1
पढ़ाई करना, ज्ञान बढ़ाना। भाग भाग कर घर के काम करना बड़ो से बहस नहीँ सहयोग करना। इससे आप स्व द्वेष (सेल्फ कनफ्लिक्ट) से बच जायोगे जो स्व ऊर्जा को खा जाता है।
समय प्रबंधन के लिये:
घर के सारे काम एक पर्ची पर शाम को या सुबह लिख लो और देख देख आप अपने खाली समय में करते रहो।
एक ने तो घर के दरवाजे पर चाक से लिखा हुआ है और पर्ची पर नोट करके करता रहता है।
काम तो जरूरी है।
इसे टालो न बल्कि करो और थोड़े दिन में काम ही खत्म हो जाएंगे।
टालने से काम खत्म न होगा। फिर आज/अभी करलो।
इससे पढ़ने में अधिक मन लगेगा, फोकस बड़ेगा।
2
Health is greatest wealth.
स्वास्थ्य सबसे बड़ा धन है।
स्वस्थ शरीर के लिये
- ब्यायाम,
- खेल कूद,
- योग और
- संतुलित हल्का घर पर पका आहार
आदि करना उचित है।
3
पिताजी का मन, बचन, कर्म से सम्पूर्ण सहयोग करना। पिता का ऋण कोई नहीँ दे सकता। पिता डाँट डपट करता है परंतु बेटे की सफलता पर मन ही मन बहुत खुश होता है।
Respect your mother and cooperate your father.
Never trouble your father.
शास्त्र कहते हैं :
पिता सुखी, धन वृद्धि और सफलता असीमित।
👍 इसे पित्र ऋण कहते हैं।
4
शास्त्र आगे कहते हैं:
जिसने माता के दर्शन कर लिये और आशीर्वाद ले लिया उसे किसी तीर्थ यात्रा की जरूरत नहीं है।
💐
इतना महत्ब है मां का।
5
अब आपकी ओर ध्यान देते हैं।
आप यदि एक बदलाब कर लेते हैं तो 85% समस्या का हल हो जाएगा।
सेल्फ एक्सपटेंस करो।
अपने बिचारो से।
अपने आप को जानो,
अपने आप को मानो,
आपकी अंदुरनी ऊर्जा बड़ जाएगी।
मन ही मन कहो:
* मेरा परिवार अच्छा है।
* मेरा गांब/रहने की जगह अच्छी है।
* मेरा घर अच्छा है छोटा/बड़ा या झुग्गी झोपड़ी।
घर घर बालों से बनता है दीवारों से नहीँ।
*मेरे पिता अच्छे हैं।
** मेरी माता अच्छी है।
*** मे्रे दादाजी अच्छे है।
** मेरी दादी अच्छी है।**
*** मेरा देश अच्छा है**
*** मेरा कोर्स /पढ़ाई अच्छी है**
मैं सभी को प्यार करता हूँ।
इससे से मन से अपने बिचारों की विरोधता समाप्त होगी और स्वयं को उर्जाबान महसूस करोगे।
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लंबे गहरे सांस ऊर्जा बढ़ाएंगे।
1
घर नहीँ बदलेगा।
2
स्कूल नहीँ बदलेगा , जो है इसे अच्छा मानो।
सरकारी स्कूल ज्ञान देने बाले होते हैं, केवल सूचनाएं नहीँ।
यदि अग्नि अधिक दी जाए तो दाल/भाजी जल जाती है, इसी लिये सहनशीलता भी जरूरी है।
3
मां बाप बहन भाई दादा दादी सब परमानेंट हैं।
इनको मानो और ब्यर्थ इन पर अपनी ऊर्जा न बर्बाद करो।
4
आपने सब के बारे में बात की परन्तु अपनी जिमेबारी के बारे मेँ नहीँ बताया।
जिस दिन इंसान अपनी जिमेबारी को समझ कर मेहनत करने लग जाता है,
उस दिन से दुनिया की कोई ताकत उसकी सफलता को बिफलता में नहीँ बदल सकती।
अपनी जिमेबारी को समझो और करो, समय प्रबन्धन करो, दूरदर्शी बनो।
आज की नहीँ 5 -10 साल बाद की सोच कर जिओ।
5-10 साल बाद पढाई, ज्ञान और कर्म प्रेम काम आएगा।