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शुक्रवार, 2 अक्टूबर 2020

बैंक एग्जाम गाइडेंस

 Thinking Process

थिंकिंग प्रोसेस

सोचने की प्रक्रिया

1. Thought Assimilation

बिचार प्रक्रिया: 

रिसर्च बताती हैं एक दिन में एक विकसित इंसानी दिमाग में 60000 से 66000 तक बिचार आगमन करते हैं। सभी इंसान अबैज्ञानिक या बैज्ञानिक तरीके से इनसे झुझते हैं ।

2.Accept/Reject 

अंततः इन बिचारों को या तो एक्सेप्ट करते है या रिजेक्ट करके समस्यायों के  समाधान की तरफ अग्रसर होते हैं।

जो अपने डिसिशन हाँ या न में लेते हैं जीवन में अत्याधिक प्रगतिशील रहते हैं। सोशल मीडिया पर दो ही टैब होते हैं- Accept/Ignore, एक्सेप्ट/इग्नोर

Accept/Delete एक्सेप्ट/डिलीट

परन्तु एक तीसरी सोच रखते हैं। यह डिसिशन हां/न में न ले कर 'देखेँगे, करेंगें, देख लेते हैं" मेन्टल मोड में रहते हैं।

अर्थात मेद खराब, नीँद खराब। याददाश्त उखड़ी उखड़ी, आलस्य और प्रौरस्तीनशन

(काम टालने की सोच का बढ़ना)

Lack of clarity of decision का बढ़ना जो सफलता को अधिक कठिन और असंभब बनाता है।

एक स्टूडेंट ने बताया: हमें टीचर ने एक एक आलू दिया और कहा कि यह अपने बस्ते (satchel) में रख लें। तब तक रखें जब तक मैं आपको इसे बाहर निकाल कर फेंकने के लिए न कहूँ।

दिन बीतते गए और आलू में से बस्ते में दुर्गंध बढ़ती गई।

परन्तु मास्टर के डर के कारण कोई भी न कहे। क्योंकि मास्टरजी ने कहा था जिसने आलू फेंका उसके नम्बर काट दूँगा।

हफ्ते के बाद जब बच्चे स्कूल आये, मास्टर जी ने देखा सभी आलू की दुर्गंध के कारण नासिका दवाये बैठे हैं।

तभी मास्टर जी ने फरमाया: क्या सीखा आलू से?

बच्चे चुप, कोई उत्तर नहीँ ।

फिर मास्टरजी बोले: यदि आप आलू की दुर्गंध 7 दिन सहन नहीं कर पाए, तो सोचिए जो अपने बुद्धि घर में अस्वीकार्य बिचारों, क्रोध, घृणित सोच और जहरीले ज्वलनशील विचार कई कई साल रखे रखते हैं और अंत मानसिक बीमारियों के शिकार बन जाते हैं।

सोच बैज्ञानिक रखेँ। अंध बिश्वासी नहीँ, तभी जीवन में प्रगति कर पायेंगे।

सोच के 2 टैब ही रखें।

Accept और 

Ignore