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शनिवार, 14 जनवरी 2023

Learning Stages

Preparation stages for competitive exam or degree /diploma courses.


 Step 1

1 E=R 


E= Eligibility

R= Requirement

1.1

सबसे पहले यह चैक करो कि जो कोर्स करने जा रहे हो उसके लिए मिनिमम क्वालिफिकेशन क्या है और क्या मैं उसके लिए क्वालीफाई भी करती/करता हूं।

1.2

हर कोर्स कोई विना किसी उद्देश्य के तो न करोंगे। इसलिए यह जरूरी जानकारी प्राप्त करें कि इस कोर्स/कम्पीटीशन को पास करने पर क्या काम करना है। 

1.3

जैसे बैंक क्लर्क के लिए क्वालीफिकेशन कोइ भी ग्रैजुएशन यानी B.A, B.Com, B.SC., BCA, B.Ed,BBA,  LLB degree आदि है।

और बैंक क्लर्क का काम

* फ्रंट डैस्क पर बैठ कस्टमर को गाइड करना

* कम्प्यूटर में लेन देन की एंट्री करना

* पास बुक अपडेट करना

* नये बैंक खोलना आदि।

1.4

इसलिए इस कंपीटिटिव इगजैम के लिए तभी एप्लाई करें यदि क्वालीफाई करते हैं, और काम अच्छा लगता है।

और अपना 100% मन लगाकर पढ़ाई लिखाई तैयारी कर सकते।

1.5

आधे अधूरे मन से किया काम कभी सफलता नहीं देता है।

1.6

यह केवल गाईडैस है। 

वैवसाईट जरूरी देखें। उसी की सूचनाएं उचित व सही हैं।


Step 2

यदि आप ने अगले बर्ष पेपर देने हैं तो तैयारी अभी से शुरू कर दो।

2.1

डिग्री के 

2nd year में पढ़ते ही तैयारी कर दो 25% समय दो इसे और , 75% डिग्री की पढ़ाई को।

2.2

बिना प्लान के तो बैसे भी 2-3 साल बच्चे खराब कर देते हैं।

Step 3

जब वैबसाइट पर बैकैंसी निकले तो एप्लाई कब करना शुरू है और कब बन्द है उसकी जानकारी सम्पूर्ण जानकारी रखें। 

3.1

और एप्लिकेशन को 3-4 बार अच्छी तरह से पढ़ें। जो एप्लीकेशन भरने के लिए सेरटीफिकेट, सूचनाएं, फोटो आदि चाहिए पहले तैयार रखें।

3.2

आरिजनल सैरटिफिकेट ले इधर उधर न घूमें। 

उनकी फ़ोटो कापी ले प्रयोग करें। 

ताकि आरिजनल सेफ घर पर हों।

 * यदि फोटोकापी गुम भी हो जाए तो आरिजनल से दोबारा वनवा सकते हैं।

** परन्तु यदि आरिजनल गुम हो गये तो डुप्लीकेट लेने में सालों लग जायेंगे।

3.3

हड़बड़ी या जल्द बाजी न करें।

 जीवन का सवाल है।

 करोड़ों कमायोगे यदि नौकरी पा जायोगे।

3.4

आखरी तारीख से पहले कम से कम 5-10 दिन पहले एप्लाई कर दो । 

आखरी दिनों में वैबसाइट क्रैश हो जाता है क्योंकि रश बहुत होता है। 

यह शिकायत है बहुत से बच्चों की।


4

अब पेपर की तैयारी करना शुरू।

 दो तरीके हैं

4.1

घर पर अकेले

क्लास में ग्रुप स्टडी

4.2

पहला तरीका है कि घर पर किताब लो अकेले पढ़ो। बहुत कठिन है और जो सफलता एक साल में मिलनी थी , 3-4 साल लग जाते हैं। विधार्थी कहते हैं। घर पर पढ़ाई में मन नहीं लगता डिस्टर्ब बहुत है। 

घर बाले काम कहते रहते हैं। पड़ोसी की डिसटबैंस अति अधिक। और जब पास न हो तो सारा भांडा पढ़ने बाले पर फोड़ देते हैं। 

यह अनुभव है घर पर तैयारी करने वाले बच्चों का।

4.3

क्लास ज्वाइन करें। 

कोचिंग लें।

फीस दे। 

बिना टिकट लिए लाटरी भी नहीं निकालती है।

4.3.1

लाभ:

अनुभबी एक्सपर्ट की कोचिंग। जीवन के 30-40 साल बच जायेंगे। क्यों कि टीचर/ट्रेनर आप से 30-40 साल अधिक अनुभवी होगा।।


कम से कम 25-30 सह विधार्थियों की सहायता Group Learning में मिल जाती है। यानी 25-30 ब्रेन आपकी सहायता कर रहे हैं।

*

Discipline अनुशासन व रैगुलरटी। जो घर पर नहीं हो पाता है।

*

डाउट क्लीयरिंग सैशनज

*

मेमोरी स्किल्स 

*

मोटीवेशन सैशन 

*

पर्सनालिटी डेवलपमेंट

*

प्रेरणा व प्ररेक प्रसंग।

*

माइंड पावर स्किल्स,

Relevance and connectivity issues resolutions.

*

Qualified trainers.

MBA (Banking & Finance) trainers.

5

General Guidance 

5.1

सफलता यकीनन बनानें का सबसे कारगर तरीका है कि आप का एट्टीट्यूड Attitude क्या है, आपका एप्टीट्यूड Aptitude क्या है। 

Attitude = किसी काम, मेहनत या चैलेंज के लिए आपका मानसिक रिस्पांस "हां" है या "न" है।

यदि "न"है तो कभी उस काम में कामयाबी मिल ही नहीं सकती। 

सबसे पहले अपने मन और मस्तिष्क से काम या चैलेंज के प्रति "हां" का रवैया होना जरूरी है। इसे अपनाएं। मन को बार बार कहें: हां मैं कर सकता हूं, मैं कर सकता हूं।

Experts opine:

There are only two attitudes in the world 🌍

Yes, I can. 

No, I can't.

Both are right.

See which one you have.


5.2

Mind माइंड पावर एक बहुत शक्तिशाली स्किल है जिसे आप डिवैलप कर सकते हैं।


ब्रेन की लोकेशन होती है।           हैड।

परन्तु माइंड की लोकेशन, सम्पूर्ण शरीर में है।

कैसे ?

जो आपने खाया,

 पिया, 

देखा, 

सुना 

उसके असर और

 प्रभाव शरीर में प्रभावी हो जायेंगे।


किसी ने बुरा ब्यबहार किया, उसका प्रभाव मन मस्तिष्क पर हो ही जाता है। 


ठंडा पानी पिया

या ठंडे पेय ्् 


शरीर पर अपना ठंडा प्रभाव देंगे।

इसी तरह से पौष्टिक आहार है।

जंक फ़ूड शरीर को दीर्घायु नहीं दे पायेगा। 

*

नशे, 

मदिरा पान,

 बुरी आदतें,

 बुरी संगत 

जीवन की दिशा और दशा बिगाड़ देती हैं

*

शरीर को अन्दर से खोखला कर देती हैं।

इनसे बचना चाहिए।


यह कौन कर सकता है, करता है,

मांइड अर्थात 

 मन 

*

चेतन मन और अवचेतन मन ।

अवचेतन मन की शक्ति बहुत प्रभावी है।


सोचो आप खाना खाने बैठे और मन पसन्द सब्जी न बनी हो, हर निवाला वे स्वाद लगेगा। 

तो यह वे स्वाद किसने बनाया।

 मन ने। 

इसलिए सबसे पहले जीत के लिए मन को समझना और समझाना चाहिए।

जैसे बैंकर बनने के लिए हर रोज :

 50-60 बार बोलें : 

**

I am a banker. Yes, I can do it. 

**

इससे बहुत फर्क पड़ता है। 

सफलता के चांस /तीन गुणा बढ़ जाते हैं। 

दिन में कई बार बोलिए मन ही मन। 

सफलता का मानसिक माहौल बन जायेगा और

जो पढ़ोगे आसानी से समझ आ जाए गा।

5.3

दो ब्रेन

एक हैड में है और दूसरा पेट भी ब्रेन है

दोनों को भोजन चाहिए।

पेट को खाना और ब्रेन को बिचार।


पेट जो खाता है बह न पचे तो तकलीफ देता है । इसलिए हम सोच समझकर, मौसम मुताबिक, शरीर मुताबिक खाना खाते हैं। 

जो खाना अब खाया है, साधारण होगा तो कम से कम 3-4 घंटे पचने के लिए लगाता है।

*

इसी तरह से जो 

पढ़ते हैं, 

सुनते हैं, 

देखते हैं 

बह ब्रेन के लिए खाना है।

 इसलिए सोच समझकर ही पढ़ना लिखना, सुनना और देखना चाहीए। इसका प्रभाव अनूकूल या प्रतिकूल होगा।

*

इसपर 6/18 रुल एप्लाई होता है।

अर्थात जो 6 घंटे पढ़ते हैं, सुनते हैं, देखते है उसे दिमाग में 18 घंटे घुमाओगे तभी सही मनन कर पाओगे।

इसलिए सही पढ़ा, सही रिजल्ट देगा

ग़लत पढ़ा गलत।

उसके बाद लिखोगे तो परमानैंट हो जायेगा। 

भूलेगा नहीं।




5.4

चित्र और मित्र चरित्र बनाते हैं।

अच्छे अच्छा चरित्र देते हैं। जो सुख मय जीवन देता है।

बुरे की संगति बर्बाद कर देती है।

आप स्वयं अपना जीवन के निर्माता हो। कैप्टन हो।

सोच बिचार कर अपने को दिशा निर्देश दो


" I am Best"

 फील करने वाले बैसट वन ही जाते हैं।

मन ही मन महसूस करो, 

कोशिश करो, 

वन जाओगे।

असम्भव कुछ नहीं है, ढ़ूढने से सब हल मिलते हैं ‌। समय लगता है, 

इसलिए धीरज रखें, कोशिश करते जायें, लिखते जायें, अपनी कोशिश भी।




धन्यवाद पढ़ने के लिए।


















बुधवार, 21 दिसंबर 2022

Fuel your mind

 Fuel your mind for Success, 

Super Success.

1

शिक्षा और संस्कार जीवन के मूल मंत्र है ‌।

2

सोच, 

बिचार, 

संस्कार,

व्यबहार

 इंसान की जिंदगी को स्वर्ग बना देते हैं

और

सोच,

 विचार,

 संस्कार, 

स्व व्यबहार इंसान की जिंदगी को बर्बाद कर नर्क भी बना सकते हैं ‌‌्।

3

यह इस पर निर्भर करता है कि आप का 

अपने* लक्ष्य* के प्रति आस्था,

जागरूकता,

जोश, 

चिन्तन व रवैया क्या है ???

4

कैसे?

5

एक पिता के ,3 पुत्र थे।

6

उसने अपने तीनों बेटों को बी काम (B Com)

तक पढ़ाई लिखाई करवाई। और नौकरी पर लगाया या लगवाया।

7

बह तीनों एक ही कंपनी में काम करते थे।

मान लो 

पहले बेटे की पगार।      1 x

दूसरे बेटे की पगार।       3 x 

तीसरे बेटे की पगार।     10 x

10 

पिताजी दूसरे देश में काम करते थे, 

उन्हें बहुत हैरानी होती थी कि तीनों बेटों की पढ़ाई लिखाई जब एक है तो उनकी तनख्वाह (पगार) में इतना अंतर क्यों है?


यह प्रश्न दिन रात उनके मन में चलता रहता।

पहले की 1 गुणा

दूसरे की 3 गुणा

तीसरे की 10 गुणा


क्यों भाई,

 क्यों?


यही सोच सोच कर वह परेशान रहते।

11

अंततः 

एक दिन पिताजी ने कंपनी के C.E.O को फ़ोन कर पूछ ही लिया।


" साहिब जब मेरे बेटों की डिग्री एक है B.Com तो उनकी तनख्वाह में इतना फर्क क्यों है?"


सीईओ ने बड़ी नम्रता से पिताजी के प्रश्न का उत्तर दिया

" श्री मान पापाजी जब आप भारत बापिस लोट कर आयेंगे तो एक दिन हमारे पास आइए और आप को अपने आप सब मालूम पड़ जायेगा।"


पिताजी ने उत्तर दिया: 

ठीक मैं जरुर आऊंगा जी।

12

अब पिताजी की उत्सुकता और बढ़ गई।

उन्होंने छुट्टी के लिए प्रार्थना पत्र दिया।

एक महीने बाद की छुट्टी सैंक्शन (मिल) हो गई।

"13

एक महीने बाद पिताजी एरोप्लेन से भारत लौटे।

आकर सीधे सीईओ को फोन किया । रात होटल मे रहे ‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌ताकी क्् बेटों को पता न हो। 

 सीइओ ने कहा कल सुबह आप मेरे आफिस में आ जायें जी। 

आप को सब प्रश्नों के उत्तर स्वयं मिल जायेंगे।


14

दुसरे दिन सुबह पिताजी सीईओ के आफिस पहुंचे।

 सीईओ ने उन्हें अपने आफिस के साथ बने *पर्सनल रूम* में बैठा दिया जहां पर टी ब््््् और सी सी टी वी लगा था और आफिस में होने वाली सभी वार्ता लाप सुन रहा था।।।


पिताजी वहां जाकर बैठ गये। तभी आफिस बॉय गर्मागर्म चाय व नाश्ता लेकर आया।


पिताजी जब चाय पी रहे थे तो सीईओ ने स्पीकर पर फोन लगाकर पहले बेटे जिसकी तनख्वाह एक गुणा थी को कहा:

मिस्टर --------- 

आज डाक पर शिप लगा है। जिसमें हमारे काम की बहुत चीजें हैं।

 जाओ देखो। 

ताकि जो हो हम ले आयें।


जबाव मिला:

 सर मैंने पता कर लिया है 

हमारे काम की कोई चीज नहीं है। 

और फोन वंद कर दिया।

15

यही प्रश्न दूसरे बेटे से पूछा:

उत्तर मिला:

 सर मैं डाक पर गया था।

 एजैंट से पूछा। 

उसने बताया कि कुछ सामान आपके काम का है, 

लेजाना।


 इसकी तन्खाह तीन गुणा थी।

16

तभी सीईओ के आफिस में तीसरा बेटा आया और बोला: सर : 

आज डाक पर शिप आया था। उसमें बहुत सा सामान हमारे काम का था, मैंने ट्रक में भरवाया और ले आया।

अब सामान गोडाउन में उतर रहा है। 

यह उसका बिल व पेपर हैं।


सीईओ ने कहा:

 गुड, बैठो।

 चाय पिओ।



 इस बेटे ज्् की तन्खवाह 10 गुणा थी ््््


उसी समय पिताजी साथ बाले कमरे से निकल कर आये।।

पिताजी को देख बेटा हैरान रह गया।


तभी सीईओ कुछ कहने लगे।

पिताजी ने उससे पहले उत्तर दिया


"मेरे सब सबालों का जबाव मिल गया है"

काम के प्रति आपका रवैया क्या है , 

यहि तनख़ाह, तरक्की 

व जीवन में सफलता निर्धारित करता है।

रवैया इंसान खुद बनाता।

आलस्य छोड़, परिश्रम अपनाएं और सुखद भविष्य पाएं।

सीख:

काम दो कारणों से किया जाता है

1 एक पैसे के लिए

2 दूसरा शौक लग्न के लिए।


पहला वंधन है, दूसरा आजादी।

कंपनी से प्यार न करो, काम को करो, कामयाब हो जाओगे। कंपनी तो वदल लोगे, काम में काबिलियत होगी कंपनीज व पैसा पीछे होगा।


धन्यवाद पढ़ने और सीखने के लिए।















सोमवार, 28 जून 2021

Self Knowledge

 B 1458


Know thyself

Know thy enemies


Thousand battles

Thousand victories.

              ---*-*--Sun Tzu

1

दुनिया ‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌का सबसे ‌‌‌‌‌‌‌‌वडा ‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌ज्ञान 

अपने ‌‌‌‌आप को जानना ‌और आपने ‌‌‌‌‌‌‌आप को पहचानना है।

पहचाने।


2

 आपने आप को जाने

आपने ‌‌कमजोरियो को‌ पहचाने,

 मानें

तभी सुधार कर पायोगे।


जीवन ‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌में हजारों संघर्ष /कोशिशें

हजारों सफलताऐ।


 जैसे ‌‌‌‌‌‌‌‌‌दूध पीते वच्चे

के लिए ‌‌‌‌उठ कर चलना भी एक ‌‌सफलता है।



  


इसके लिए ‌‌‌‌‌दो‌ तरीके

 ‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌  लाभ दायक सिद्ध हुए हैं

A

 आंखों ‌‌‌‌‌को ‌बंद करें, 

 10 से‌20 मिनट शांति से 

सुख आसन ‌‌‌‌‌‌‌‌‌

में ‌ वैठ कर अपने ‌  आंशिक काल

और दीर्घ काल के सपने, 

उनको पूरा करने के लिए साधन न कोशिशे 

और ‌‌‌‌मन भटकाऊ विचारों को देखते रहे।


रीड की हड्डी सीधी रखें।


कलम, 

पैंसिल/पैन 

और कापी या नोट वुक

 हमेशा ‌‌‌‌इस समय अपने साथ रखें।

B

हथेलियों को 5-7 वार घर्षण करें। 

हथेलियों कोआंखों पर रखें।

2 मिनट वाद हथेलियों को हटाएं।

आंखों को खोलें। 


हाथों से आंखों ‌‌‌‌पर पानी डालना सुकून देता है।


जो बिचार आए हैं ‌‌‌‌‌

उन्हें लिखें। डेट/तारिख ‌‌‌‌‌डाल कर।।

 यह आपको‌ मानसिक ‌‌‌‌‌‌‌‌‌तनाव नहीं, 

सारी उम्र दिशानिर्देश देगा।


ऐसा करने से जो विना लिखे 10 साल में नहीं कर सकोगे, 

बह एक साल में  कर ‌‌पायोगे  ।

Work in silence

Let the success 

Make noise.

हमेशा ‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌

अपने ‌‌‌‌आप से‌ विजेता  जैसी वातें करें।

मुंह ‌‌‌‌‌बंदमन ही मन

कहें" मैं कर लूंगा/लूंगी"

"मैं विजेता/विजेती हूं"

"आज ‌‌‌‌‌नही‌‌ तो ‌कल जीत मेरी होगी"

"कोई मुझे ‌‌‌‌‌हरानहीं सकता, जब तक मैं खुद हार नहीं ‌‌‌‌‌‌‌मानती/मानता"

आप अपनी प्रशंशा खुद करें, 

झूठी नहीं, सच्ची।

प्रशंसा के लिए दुसरो के सहारे रहे।


कम ही होते हैं जो ‌  प्रशंसा करते ‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌हैं।


अधिकतर आलोचना करते हैं, 

उन्हें ध्यान से सुनो।

।।

फ्री के साइकोलॉजी के डाक्टर हैं।

आप की कमीयां ‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌बत।््  वताएंगे  



हो सकता अपनी यह कमीयां आप को ही पता न हो।

चुपचाप सुधार लेना।


 


ऐसा करने से

आप देखें गेंद दिनों दिन ‌‌‌‌ आपका आत्मविश्वास ‌‌‌‌और  मनोवल बडता चला जाएगा।


आप पहले से अधिक ‌‌‌‌‌‌मन 

 बुद्बी से शक्तिशाली और प्रसन्न चित्त हो जाओगे।  



एक शकां दूर करें।


कर्म करें, 

गलतियां करें,

 गलतियां सुधारे।


डिग्री डिप्लोमा पढ़ाई लिखाई का तभी है यदि उनका प्रयोग अपने अौर अपनों का जीवन ‌‌‌‌‌‌‌स्तर ऊपर उठा सको।


बिल गेट्स कहते हैं: 

गरीबी में पैदा होना हमारे बश में नहीं, परन्तु ग़रीबी में मरना शर्मिंदगी है।




कोई ‌‌‌‌‌‌‌‌‌भी काम 75% से 90% पूर्ण ‌‌‌‌‌कर लिया, 

समझो काम पूर्ण ‌‌ । 

आगे ‌‌आहिस्ता आहिस्ता ‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌स।  

धा र के चक्कर में स्वास्थ्य

 अौर सुख चैन ‌ख राब कर लेते हैं। 












सोमवार, 21 जून 2021

Attitude सोच

 

सकारत्मक ‌‌‌‌‌सोच

सफलता को‌ आकर्षित

करती है।

Positive thinking attracts success.


A journey of thousands miles starts with first step.


Failure and time is greater teacher than success and good times.

रविवार, 2 मई 2021

घर बैठे English बोलना/लिखना सींखेँ।

 Positive or Negative 


Positive attitude builds career, society, nation and world at large.


Excessive negative ATTITUDE destroys self, society nation and world at large.

 सोच सकारात्मक, सभी कुछ हसीन लगता है।


सोच नकारत्मक सभी उखड़ा उखड़ा, उझड़ा उझड़ा लगता है



नीचे मेरा एक COVID 19 पर कमेंट है जो लोगों ने लाइक किया है।


*Csn Sarma found your comment
 "Here are people who remain positive even in worst times like Ms Sarita whereas there are others who are born whiners.

They always focus what is wrong with this world, do not trust the efforts and achievements human race over millions and millions of years.

They spread negativity through their written and spoken words to create panic in the minds of the weak and feel they are serving the society.

NO.
 BIG NO.

They are parasites eating at the vitals of society built over millions and millions years' efforts of billions of humans.

For them,
fear of death haunts throughout life and they keep dying inch by inch daily
mentally.

Physical death descends once in life.
Who is born , has to die.

Can anybody escape it?

Yes,
it can come today or after 10 or 20 years.

Welcome it as we welcome the newly webbed bride


Why to panic self and others in family or
network?

Let's spread hope, the rare gem that makes the life cheerful."
* helpful.
यह मेरा कमेंट है, पढें, समझे और आशा बादी रहें।
इस दुनिया में।कुछ लोग हैं ऐसे हैँ जो केवल इस दुनिया में क्या कमी है उसी पर फोकस करते हैं, जबकि दिखाई देने बाली खूबसूरत दुनिया करोड़ों सालों से करोडों लोगोँ की मेहनत का फल है।
जीवन एक खूबसूरत यात्रा है, उन्हें उसका एहसास नहीँ।

बह इसी पर फोकस रखते हैं कि दुःखी कैसे रहा जाए। नकारात्मक पड़ते हैं। नकारात्मक सुनते हैं, हमेशा किसी न किसी कारण से डरे रहते हैँ खासतौर पर इन्हें मौत का डर, फेल होने का डर, लोग क्या कहेंगे, मेरी इज्जत का क्या होगा आदि मानसिक डर सताते रहते। 

यह आप भी डरे रहते हैं और अपनों को भी डराते रहते हैं।
यही नहीँ यह समाज में भी डर फैलाते हैं।

जन्म हुआ है तो मौत भी होगी। डर किसका।

आज नहीँ होगी 10/20 साल हो जाएगी।।फिर डरना किसका।

यह लोग उन कीडों मकोड़ों की तरह हैं जो अच्छी भली हरि भरी फसलें बर्बाद कर देते हैं।
यह समाज बर्बाद कर देते हैं। बचो इनसे।

अपना attitude देखो। समझो। आशावादी है या निराशा बादी।

मंगलवार, 27 फ़रवरी 2018

Know your attitude.

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Pic Courtesy: www.wallpaperlicker.com                        Pic Courtesy: www.aliexpress.comd

3 HORSES

1. A king had three horses.

2. One day his dearest friend came to meet him.

3. Out of  curiosity, the friend asked: For how much did you buy  this horse? He said: "X" amount of money.

4. Friend further asked: For how much did you buy  this  2nd one?   He replied: 6 X.

5. Friend quizzed more : And for  how much did you buy  this 3rd horse? The king replied: 15  X.

Really surprised, you paid 15 times more for the 3rd horse when compared with first horse. May I know the logic behind this deal."

"Yes, of course you can, said the king."

"Listen, I need to use hunter to make the first horse run. I had bought it for "X". I repent. It is waste of my money and time. More mental frustration than service it gives to me. I have to beat it virtually with hunter to make it run. It irritates me."

" Now to 2nd horse. I just show it the hunter and it starts running and I ride it well."

" The 3rd one is nicest its behaviour and service. When it sees me coming from the palace, it raises its tail giving me an indication  as if saying: "I am ready to give you ride. Come and sit." As soon as I come and sit on it, it starts running."

" So now I understand that value addition comes with ATTITUDE and responsibility."

Friend learnt it. Every body should check himself or herself what kind of horse s/he is. It is self analysis. None other can do it. 


तीन घोड़े ा 


एक राजा के पास तीन घोड़े थे। एक दिन उस राजा का दोस्त आया और उसने उन घोड़ों के बारे में पूछा 
राजा ने बताया 

1  यह पहला घोड़ा : इसे चलाने के लिए चाबुक से पीटना पड़ता है।  बहुत तकलीफ होती है।  परन्तु इसका स्वाभाव ही यह है। 

2. यह दूसरा घोडा : इसे चाबुक दिखायो और यह भागने लगता है।  

3. और यह तीसरा घोडा :    यह मेरी पसंद है।  मैं अभी महल से बाहर ही निकलता हूँ तो यह मुझे सवारी देने के लिए अपनी पूछ हिलाने लग जाता है।  मैं आता हूँ और इसकी पीठ पर बैठ जाता हूँ।  सवारी समाप्त होने पर यह मुझे मेरे महल तक छोड़ जाता है।  


इसी तरह से इंसान का स्वाभाव है।  कुछ काम करने के लिए बार बार कहना पड़ता है।  यह दूसरों की शिकायतें ही लगते रहते है।  
कुछ काम को स्वयं समझ लेते है या अपने साथियों से सलाह लेकर काम पूरा कर लेते हैं। 

यह तीसरी तरह के कुछ अपने आप काम देखते हैं और कर लेते हैं इन्हें कहने की ज़रुरत नहीं पड़ती।  यह बहुत तरक्की करते हैं।  

सोचिये आप कौन सी केटेगोरी में हैं।  यह आपके लिए और कोई नहीं कर सकता।  लिख कर देखने से पता चलता है।  अपने अंदर झांकना और अपनी कमियों को जानना और उनके लिए अपनी जिम्मेबारी लेना बहुत ही मुश्किल काम है।  हाँ असंभव नहीं।  




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