Female Specie -
A power unbelievable.
नारी एक शक्ति।
सम्मान करें "स्त्रियों" का
*स्त्रियां " कुछ भी बर्बाद
नहीं होने देती
* बह समझती हैं और
सहजती है,
* संजोती और संभालती हैं
कल के लिए,
गर्म मौसम में
सर्द और दर्द मौसम व वक्त के लिए।
इसलिए कुल की देवी कहलाती
* मोह, ममता की मूर्ति है स्त्री
हो मां
, बहन हो, पत्नी या भावी ।
*
बह सहजती है ।
संभालती है
ढकती है
बांधती है
उम्मीद को आखिरी छोर तक।
*
कभी तुरपाई से
कभी टांका लगा के
कभी धूप दिखा के
कभी हवा झला के
कभी छांट कर
कभी वीन कर (Sieving Skills)
कभी तोड़ कर
कभी मरोड़ कर
कभी जोड़कर
देखा होगा न?
परन्तु प्रशंसा न की होगी कभी।
पुरुष यह सब नहीं कर पायेगा
अपनी इगो में पड़कर
केवल असहाय और असहयोगी वन जायेगा।
* देखा होगा न?
अपने ही घर में शाम को सुबह की वची
"बासी" रोटी खाते हुए।
दोपहर को थोड़ी सब्जी को भी तड़का लगाते हुए।
दीवारों की सीलन
तस्वीरों से हटाते हुए।
बचे खाने से मान से
अपनी खाने की थाली
सजाते हुए।
फटे पुराने कपड़ों को भी
डस्टर बनाते हुए।
आओ इन्सान बनें
"नारी " का मान व सम्मान करें।