Self Discipline
स्वयं सुधार कथा
अध्यापक से गुरु बनना कठिन है।
2
परन्तु गुरु जी के शब्द कम ज्ञान अधिक होता है।
3
जिज्ञासु ने पूछा :
गुरू जी सफलता के लिए कौन सा सही तरीका है।
गुरु जी मुस्कराए:
2-3 मिन्ट चुप रहे।
4
अब तक जिज्ञासु मन ही मन सोच रहा था "गुरु जी को इस प्रश्न का उत्तर नहीँ पता। " और खुश हो रहा था कि मैंने गुरू जी ऐसा प्रश्न पूछा जिसका उत्तर गुरु जी को नहीँ पता।
5
कम बुद्धि जिज्ञासु बढ़े खुश होते हैं जब उनके पूछे प्रश्नों का उत्तर दूसरे ज्ञानबान नहीँ देते।
6
प्रश्न पूछना आसान है परन्तु उनके उत्तर स्वयं ढूंढना अति कठिन।
7
जो प्रश्नों के उत्तर स्वयं ढूंढते हैं बह जीवन बिजेता बन जाते हैं।
दूसरे स्वयं प्रश्न बन रह जाते हैं।
8
अब 3 के आगे पढें। गुरू जी 2-3 मिन्ट के बाद बोले:
वत्स तैयारी और सफलता बैसे है जैसे तीर और कमान।
तीर को सही दिशा में रख कर लक्ष्य साधना पड़ता है।
कमान पर तीर की दिशा को लक्ष्य पर सीधा रखना पड़ता है
तब कमान पर लगे तीर को इतनी शक्ति से खींचना पड़ता है जिससे न तो तीर लक्ष्य से पीछे रहे और न ही आगे रहे बल्कि सही लक्ष्य को भेद दे।
इसमें कमान की शक्ति, स्ट्रिंग(कमान का धागा) की गुणवत्ता, तीर कमान चलाने की क्षमता, लक्ष्य भेदने की तैयारी व परिशिक्षण सभी चाहिये।
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अब इसको पेपर या कंपीटिटिव एग्जाम पर लगाते हैं।
* अच्छी पेपर की पुस्तके= कमान
* अच्छी तैयारी = तीर चलाने और लक्ष्य भेदने की कला
* पेपर में प्रश्नों के उत्तर देना= कमान पर तीर लगा कर, लक्ष्य साधना और तीर चलाना ताकि तीर लक्ष्य भेद पाए।
इसमे आँखे, बुद्धि , सही साहस, धैर्य, समय प्रबंधन, स्वयं अनुशासन आदि की आवश्यकता है।
इसलिये वत्स सफलता के लिए तैयारी के साथ साथ यह गुण भी जरुरी है।
जिज्ञासु सुन कर गुरु जी के नत्मस्तक हो गया।
आप ने भी सीख लिया होगा। आशा है।