SELF😢 BELIEF
Master of Success
आत्म विश्वास और मेहनत
सफलता क़े सूत्र हैं-
सुरक्षित, सुदृढ़ और सम्पूर्ण ।
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Listen to your inner voice. ,
जब भी कोई दुबिधा हो तो आँखें बंद करके सोचो और जो अपने बारे में महसूस करते हो उसे लिखो ,तारीख और समय के साथ।
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लिखे से डर लगे या लगे कि यह किसी प्रकार की परेशानी दे सकता है, जैसे दीर्घकालिक रिश्तों में दरार पड़ सकती है तो लिख कर पेपर को जला दें या फाड़ कर फेंक दें।।लिखने से मन हल्का और दिमाग गड़े सड़े दर्दनाक बिचारों से छुटकारा दिलवाता है।
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लिखा हुआ जीवन को सही दिशा देता है क्योंकि दिमाग में बिचार पढ़े नहीँ जा सकते। पढ़ने से पता चलता है बिचार लक्ष्य की दिशा में हैं या लक्ष्य हीन दिशा।में
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लिखना बैसे ही स्वयं को दिशा देता है जैसे सड़क पर लगा किसी गांब या शहर या स्थान के लिये मील पत्थर ।
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इससे दिमाग खाली।होगा और जो मनचाहा हो भरें।
जैसे खड़े पानी में जीव पैदा हो कर।पानी गन्दा कर देते हैँ, परन्तु चलता पानी फ़्रेश , साफ और ताजा होता है
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इसी तरह से दिमाग से भी बहुत सड़े गले बिचारों को, जो बिचार काम मे बाधा डालते हैं, जो बिचार काम के नहीँ हैं को समय समय पर लिख कर निकालते रहना चाहिए। नहीँ तो यह मन में चलते रहते हैं और नए बिचारों को पनपने नहीँ देते हैं।
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नकारात्मक बिचार को सकारत्मक बनाये फिर जलबा देखें
जैसे अपने सामने एक पेपर पर लिख कर दीवार या बोर्ड पर लगाये
"☺️ "मैं शक्तिशाली हूँ☺️
"☺️ मैं जो चाहूँ कर सकता हूँ☺️
अपनी क्षमता और परिस्थितियों के दायरे।में रह कर छोटे छोटे कदम बढ़ाते चले जायो हर रोज़। असफलता सीख देती है। क्या सीखा पर फोकस करो न कि
😊 मेरे से यह क्यों नहीं हुआ?😊
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Expectations(आशाएँ)
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अपने से आशाएँ रखो, अपनी अंदुरनी शक्ति बढ़ायो, करो ज्यादा बतायो नहीँ।
Results will speak.
जब प्राप्तियां होंगी सभी को नज़र आ जाएंगी।
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बेबजह असंभब आशाएँ दुसरों से करोगे तो आशाएँ पूरी न होने पर दर्द होगा। यदि हो तो दिमागी "विचार डिलीट" ,बटन दवायो।
बेबजह आशा<: बह "(भगवान) है न सब ठीक करेगा।
आस्था सही है परंतु अंध विश्वास नहीँ।
😢आस्था+ सही प्रयत्न=सफलता😢
अपने आप से कहो: छोड़ @मैं यह क्या सोच रही/रहा हूँ?
°°"अपने बिचारों के मालिक बनो। बहि सोचो जो चाहिये'
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एक बच्चे ने बताया :
मेरी एक आदत ने °मेरे जीवन का बहुत समय बर्बाद किया। मुझे बहुत बुरी आदत थी दुसरों की बातें सुनने की , दुसरों की जिंदगी में दखलअंदाजी करने की।
मैं बिना पूछे सलाह देता था, जब सांमने से कोई सलाह नहीँ मानता " मैं अपने बोले शब्द भूल जाता परन्तु दूसरे के शब्द दिन रात मेरे दिमाग में टस टस करते रहते।
मैँ कई दिन, कई महीने, कई साल इन्ही शब्दोँ का दिमागी बोझ ढोता रहता। कियूंकि जिसने यह शब्द बोले होते बह जब जब नज़र आता तोमेरे अंदर घृणा उतपन्न होती। मन रूग्ण हो उठता ।।
मेरा काफी समय नष्ट हो जाता।
सर मैं आप।का आभारी (thankful) हूँ। आप ने कहा कि बिचारों को, आदतों को केवल आप और आप ही ठीक कर सकते हो, सुधार आप ने करना है।किसी और ने नहीँ।
मुझे समझ आ गया। अब मैं दुसरों के झमेलों में नहीँ पड़ता।
इससे मेरा समय बचता है । मानसिक ऊर्जा बढ़ती है और।मैं उर्जाबान रहता हूँ। मैं फर्स्ट क्लास में पास हुया हूँ।
छोटी सी दिशा से मेरा कितना बड़ा फायदा हो गया।
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इस लिये आशाएँ दुसरों से नहीँ खुद से कीजिये।
सभी जो हेल्प करे न करे के आभारी रहें और धन्यबाद करेँ। बहुत उन्नति करेंगे। धन्यबाद।
B 1327