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बुधवार, 21 दिसंबर 2022

Fuel your mind

 Fuel your mind for Success, 

Super Success.

1

शिक्षा और संस्कार जीवन के मूल मंत्र है ‌।

2

सोच, 

बिचार, 

संस्कार,

व्यबहार

 इंसान की जिंदगी को स्वर्ग बना देते हैं

और

सोच,

 विचार,

 संस्कार, 

स्व व्यबहार इंसान की जिंदगी को बर्बाद कर नर्क भी बना सकते हैं ‌‌्।

3

यह इस पर निर्भर करता है कि आप का 

अपने* लक्ष्य* के प्रति आस्था,

जागरूकता,

जोश, 

चिन्तन व रवैया क्या है ???

4

कैसे?

5

एक पिता के ,3 पुत्र थे।

6

उसने अपने तीनों बेटों को बी काम (B Com)

तक पढ़ाई लिखाई करवाई। और नौकरी पर लगाया या लगवाया।

7

बह तीनों एक ही कंपनी में काम करते थे।

मान लो 

पहले बेटे की पगार।      1 x

दूसरे बेटे की पगार।       3 x 

तीसरे बेटे की पगार।     10 x

10 

पिताजी दूसरे देश में काम करते थे, 

उन्हें बहुत हैरानी होती थी कि तीनों बेटों की पढ़ाई लिखाई जब एक है तो उनकी तनख्वाह (पगार) में इतना अंतर क्यों है?


यह प्रश्न दिन रात उनके मन में चलता रहता।

पहले की 1 गुणा

दूसरे की 3 गुणा

तीसरे की 10 गुणा


क्यों भाई,

 क्यों?


यही सोच सोच कर वह परेशान रहते।

11

अंततः 

एक दिन पिताजी ने कंपनी के C.E.O को फ़ोन कर पूछ ही लिया।


" साहिब जब मेरे बेटों की डिग्री एक है B.Com तो उनकी तनख्वाह में इतना फर्क क्यों है?"


सीईओ ने बड़ी नम्रता से पिताजी के प्रश्न का उत्तर दिया

" श्री मान पापाजी जब आप भारत बापिस लोट कर आयेंगे तो एक दिन हमारे पास आइए और आप को अपने आप सब मालूम पड़ जायेगा।"


पिताजी ने उत्तर दिया: 

ठीक मैं जरुर आऊंगा जी।

12

अब पिताजी की उत्सुकता और बढ़ गई।

उन्होंने छुट्टी के लिए प्रार्थना पत्र दिया।

एक महीने बाद की छुट्टी सैंक्शन (मिल) हो गई।

"13

एक महीने बाद पिताजी एरोप्लेन से भारत लौटे।

आकर सीधे सीईओ को फोन किया । रात होटल मे रहे ‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌ताकी क्् बेटों को पता न हो। 

 सीइओ ने कहा कल सुबह आप मेरे आफिस में आ जायें जी। 

आप को सब प्रश्नों के उत्तर स्वयं मिल जायेंगे।


14

दुसरे दिन सुबह पिताजी सीईओ के आफिस पहुंचे।

 सीईओ ने उन्हें अपने आफिस के साथ बने *पर्सनल रूम* में बैठा दिया जहां पर टी ब््््् और सी सी टी वी लगा था और आफिस में होने वाली सभी वार्ता लाप सुन रहा था।।।


पिताजी वहां जाकर बैठ गये। तभी आफिस बॉय गर्मागर्म चाय व नाश्ता लेकर आया।


पिताजी जब चाय पी रहे थे तो सीईओ ने स्पीकर पर फोन लगाकर पहले बेटे जिसकी तनख्वाह एक गुणा थी को कहा:

मिस्टर --------- 

आज डाक पर शिप लगा है। जिसमें हमारे काम की बहुत चीजें हैं।

 जाओ देखो। 

ताकि जो हो हम ले आयें।


जबाव मिला:

 सर मैंने पता कर लिया है 

हमारे काम की कोई चीज नहीं है। 

और फोन वंद कर दिया।

15

यही प्रश्न दूसरे बेटे से पूछा:

उत्तर मिला:

 सर मैं डाक पर गया था।

 एजैंट से पूछा। 

उसने बताया कि कुछ सामान आपके काम का है, 

लेजाना।


 इसकी तन्खाह तीन गुणा थी।

16

तभी सीईओ के आफिस में तीसरा बेटा आया और बोला: सर : 

आज डाक पर शिप आया था। उसमें बहुत सा सामान हमारे काम का था, मैंने ट्रक में भरवाया और ले आया।

अब सामान गोडाउन में उतर रहा है। 

यह उसका बिल व पेपर हैं।


सीईओ ने कहा:

 गुड, बैठो।

 चाय पिओ।



 इस बेटे ज्् की तन्खवाह 10 गुणा थी ््््


उसी समय पिताजी साथ बाले कमरे से निकल कर आये।।

पिताजी को देख बेटा हैरान रह गया।


तभी सीईओ कुछ कहने लगे।

पिताजी ने उससे पहले उत्तर दिया


"मेरे सब सबालों का जबाव मिल गया है"

काम के प्रति आपका रवैया क्या है , 

यहि तनख़ाह, तरक्की 

व जीवन में सफलता निर्धारित करता है।

रवैया इंसान खुद बनाता।

आलस्य छोड़, परिश्रम अपनाएं और सुखद भविष्य पाएं।

सीख:

काम दो कारणों से किया जाता है

1 एक पैसे के लिए

2 दूसरा शौक लग्न के लिए।


पहला वंधन है, दूसरा आजादी।

कंपनी से प्यार न करो, काम को करो, कामयाब हो जाओगे। कंपनी तो वदल लोगे, काम में काबिलियत होगी कंपनीज व पैसा पीछे होगा।


धन्यवाद पढ़ने और सीखने के लिए।















सोमवार, 1 फ़रवरी 2021

पढ़ाई

 पढ़ाई /काबलियत



बिज़नेस मैन का बेटा बिज़नेस मैन बन सकता है पढ़े या न पड़े।


परन्तु एक टीचर का बेटा बिना पढ़े लिखे सीधे टीचर नहीं बन सकता।


पढ़ाई और काबलियत केवल स्वयं लग्न और कोशिश से आती है। 


स्व सुधार:

संस्कार बढ़े हैं या शिक्षा : 

भिक्षु ने अपने गुरु से पूछा।


गुरु जी बोले:  संस्कार

तो गुरु जी शिक्षा क्यूँ?


ताकि संस्कारों का मूल्य और शक्ति बढ़ सके। 


उधाहरण से समझाता हूँ

1 

एक बच्चा है केवल 10बी तक पढ़ा लिखा और अपने पिता के साथ खेती करने लगा। माता पिता का सम्मान करता है, भाषा मीठी है, माता पिता की आज्ञा पालन करता है।

समाज मे सभी के काम आता है। जितना हो सकता है, समर्था अनुसार सहायता करता है 

गांब के बच्चों को पढ़ाता और गाइड भी करता है।


बहुत से बच्चे उससे बेसिक गाइडेंस ले कर बढ़े बढ़े पदों पर लग गए।

☺️

अब इसी का दूसरा भाई है।

पहले गांव में पढ़ा। फिर मां बाप ने कर्ज लेकर पढ़ाया लिखाया।

शहर में पढ़ा , शादी हुई पढ़ी लिखी लड़की से।

यह हर चीज यानी पिता का संघर्ष, माँ और भाई के त्याग को पैसों में तोलता है।

अब रेटिरेमैंट के बाद गांब में रहने के लिये आया।

परन्तु स्वार्थी स्वभाव के कारण, गांब में दुःखी हो गया, शहर में रहने के लिये मजबूर।

अकेले पति पत्नी। 

बच्चे दूसरे देशोँ में।

स्वार्थी स्वभाव और अहँकार के कारण कोई सहायता भी नहीँ करता, न ही बोलता बुलाता है। नतीजा अकेला पन।

अब सोचो पहला अच्छा है या दूसरा?

पहले के पास संस्कार हैं

दूसरे के पास शिक्षा 

संस्कारों से शिक्षा का मोल।कई गुना बढ़ जाता है।

संस्कार क्या है,,?

1

- जन्म देने बालों की इज़्ज़त करना

2

-  ऐसा कोई ब्यवहार या कर्म न करना जिससे उनका मन दुःखी हो।

3

- ,स्कूल।में टिफ़िन शेयर करना संस्कार वासुदेवाय कुटुंबकम की भावना देता है।

4

,-सहायता देना और सहायता मांगना भी एक अच्छा संस्कार है कियूंकि No man is an island.

जीवन की 3 stages हैं,:

        * Dependence(निर्भरता) बच्चा पैदा होता है, माता पिता, आर्थिक, बौद्धिक, सामाजिक सभी तरह का सहारा देते हैं।

       **Independence (स्वतंत्रता,) बच्चा पड़ता है लिखता है स्वतंत्र हो जाता है, निर्भर से आत्मनिर्भर हो जाता है।।परन्तु 10-15 साल में फिर अहसास होता है जीवन निर्भर और आत्मनिर्भर से ऊपर है।

            *** Inter -dependence इस स्टेज पर स्वार्थ नम्रता और शेयरिंग में बदल जाता है, समाज क़े लिये कुछ करने को मन करता है। अपनी तरक्की की बजाए दुसरों की खुशी अच्छी लगती है।

         जरूरी नहीं के सभी तीसरी स्टेज पर पहुंचे। अधिकतर 2 stages तक संतुष्ट रहते हैँ।

         इसलिये संस्कार शिक्षा से अधिक खुशी देने का साधन हैं।

संस्कार स्वयं बिना सिखाये सीखने पढ़ते हैं जबकि शिक्षा सिखाई जाती है। परन्तु जीवन यापन शिक्षा से होता है।

        केवल संस्कार: खुशी का स्तर 50 %

        केवल शिक्षा: खुशी का स्तर 50%

        संस्कार + शिक्षा= खुशी का स्तर 100%

5

- करुणा , दुसरों से, प्रेमपूर्वक व्यवहार, व्यावहारिक नम्रता, आस्था, बिश्वास- स्वयं और दूसरों पर, संशय संहार, बीरता, शौर्य, गंभीरता, बड़ों का सम्मान, संतुष्टि भरा जीवन,  अंध विश्वास न करना, जिओ और जीने दो की भावना रखना , देश प्रेम आदि संस्कार इंसान को साधारण मनुष्य से असाधारण बनाते है

अपनाएं और देखेँ शिक्षा कैसे सफलता में बदलती है।

शुरू में ज्ञान प्रचार नाम के पीछे डिग्रियां लगा कर होता है, फिर असली ज्ञान अनुभव से बढ़ जाता है औऱ डिग्रियां दिखाबा बंद और जो सीखा है उसकी शेयरिंग शुरू।

संस्कार हर पल हर जगह काम आते हैं, घर पर, सड़क पर, किसी से मिलने पर, शिक्षा केवल जहाँ जरूरत होती बहिं काम आती है। जैसे टीचर की शिक्षा स्कूल में, ऑफिसर की शिक्षा आफिस में।

बाकी जगह तो संस्कार चाहिए।

हम बात करते हैं, बात कहने के भी अलग अलग तरीके होते, अलग अलग लहज़ा होता है, अलग अलग अलग हाव भाव होते हैं , अलग अलग उच्चारण होते हैं, सहजता, धीरे से बोली बात कानों को मिठास देती है, दिलों को जोड़ती है, जबकि ऊँची आवाज़ में की गई, सहज और मीठी बात भी कड़वी लगती है, ईर्ष्या को बढ़ावा देती ह।।


संस्कार  पर्सनलिटी के लिये  बैसे ही है 

जैसे 

फूल की खुशबू, 

दूध की सफेदी,

 गन्ने की मिठास।


सोचें और स्वभाव सुधारे।




B 1331



गुरुवार, 1 अक्टूबर 2020

Bank Exam Guidance

  Motivation

धन बह इकठ्ठा करो, जो तुम्हारी रक्षा करे;

न की बह जिसकी रक्षा तुम्हे करनी पड़े।


शिक्षा ही बह धन।है। जो दुनिया के हर देश में रक्षा करता है। कोई इसे चुरा नहीँ सकता, छीन नहीँ सकता, लूट नहीँ सकता।