पड़ने की जगह।
Right planning for learning and preparation.
पढ़ने की जगह का सफलता में बहुत महत्ब है।
1 कुछ बच्चे बिस्तर पर लेट कर पढ़ते हैं। इससे पढ़ने का पोस्चर बिगड़ जाता है। रीढ़ की हड्डी का सीधा रहना बहुत जरूरी है। ताकि पढ़ने।में आसानी रहे और समझने में समस्या न हो।
जब लेखक MBA (Banking & Finance) कर रहा था तब इस पढ़ने के तरीके का अहसास हुआ।
जो चैप्टर लेट कर या टेढ़े हो कर पढ़ा जाता बह याददाश्त में 4-5 बार पढ़ने में समझ आता था।
परन्तु जो रीढ़ की हड्डी को सीधा रख कर पढ़ा जाता बह 2 बार मे ही समझ आ जाता और 2 बार revision करने पर पूर्ण समझ आ जाता।
2
इसलिए घर पर अलग कमरे में आप।एक ही जगह पर बैठने की जगह बनाये। जहाँ बैठ कर शांति से पढ़ सकें।
जो बच्चे तरीका बताते हैं, बह यह है।
2.1
धरती पर चौकी रख।लेता हूँ। सामने भी चौकी है। किताब ले कर बैठ कर जाता हूँ।
लगातार पड़ता हूँ।
ताकि शोर डिस्टर्ब न करे, एक छोटा रेडियो रख कर म्यूजिक सुनता हूँ। इसकी तरफ कोई ध्यान नहीं। परन्तु यह बाहर से आने बाली आवाजों से बचाता है।
स्क्रीन टाइम, सोशल मीडिया, फ़ोन बन्द करके रखता हूँ। जीवन मेरा है, करियर मेरा है, सोशल मीडिया ने तो करियर बना नहीँ देना है।
मैं आशा बादी हूँ। प्रार्थना करता हूँ। स्वयं पर बिश्वास बड़ता है। ऊर्जा बढ़ती है।
मेरा बिश्वास है कि मेरा इष्ट+मैं मिल कर सब कुछ कर सकते हैं।
मेहनत मेरी, रहमत तेरी पर बिश्वास करता हूँ।
2.2
सामने थेर्मोकोल का विज़न बोर्ड लगाया है। जो चैप्टर पढ़ लेता हूँ। बह मैं उस बोर्ड पर लिख देता हूँ।
मैंने लिखा है:
Sr No Name।of Chapter Pages Target Revised target
Sr No : जैसे 1, 2, 3, .........
Name of Chapter: जैसे English Grammar (Noun)
Target: कब तक पूरा करना है। डेट डाली है।
Revised Target: कई बार किसी कारण target पर चेप्टर पूरा नहीं होता(शादी बिबाह, बीमारी आदि ) के कारण, तो टारगेट नया लिख देता हूँ, इसे revised target लिखता हूँ।
Pages:
चैप्टर में पेज कितने हैं। इससे मन up रहता है। चैप्टर से डर नहीँ लगता है।
2.3।
साथ मे पानी का घड़ा रखा है। बार बार पीत हूँ। इससे दिमाग पढ़ने के लिए तरोताजा रहता है।
2.4
तैयारी कैसे करें??
- एक subject की एक ही किताब लें। इसे बार बार पड़े।
पहली बार -पेंसिल ले कर
दूसरी बार पहले से गहन।
तीसरी बार आँखे बंद करकेसोचें समझें क्या पड़ा है
और जो समझ आये उसे नोट बुक पर लिखें ।
उसके बाद किताब खोले और देखें जो आप ने लिखा है बह कितना सही है।
अपने को खुद नंबर दे। फिर अपने मे ही सुधार करें।
किताब एक ही बार बार पढ़े, ताकि कॉसेप्ट्स अच्छी तरह से समझ आ जाएं।
एक से अधिक किताब न खरीदें, न पढ़ें जब तक पहली किताब 4/,5 बार न पड़ लें।
नहीँ तो कांसेप्ट क्लियर होने की जगह confusion बढ़ जायेगा।
ट्रेनर की सलाह:
तैयारी लगातार करते रहें।
जब बैंक क्लर्क या बैंक पी ओ की जॉब निकलेगी तभी तैयारी करेंगे तो सफलता मुश्किल है।
तैयारी का रिज़र्व बनाये रखें।
ओलिंपिक की तैयारी गोल्ड मैडल लेने बाले 10/15 साल पहले करना शुरू करते हैं। कई बार हार का सामना कर गोल्ड मैडल तक पहुंचते हैं।
जितना तैयारी पहले करोगे उतना ही अच्छा रहेगा। मानसिक उतेजना कम होगी।
एक बढ़ी ग़लती:
बच्चे एक बड़ी गलती करते हैं।
जैसे बैंक जॉब के लिए ऑनलाइन विंडो आज खुला और 30 दिन के।बाद बन्द होगा।
अप्लाई उसी दिन या 7 दिन।में कर दें।
फॉर्म का प्रिंट आउट लें और बार पढ़ कर सारे डॉक्यूमेंट तैयार करके अप्लाई करेँ। एक बार में या बिना प्रिंट लिए फॉर्म अच्छी तरह समझ नहीं आता।
दूसरे 7 दिन से ज्यादा अप्लाई में डिले न करें।
25 दिन के बाद रश बढ़ जाता है और कई बार सर्वर क्रैश हो जाता है औऱ बच्चे शिकायत करते हैं कि मैं अप्लाई नहीँ कर पाया।
जरा पुछो सारा महीना क्या कर रहे थे?
इसलिए अप्लाई में सुस्ती न करना,। यह बैसे ही है जैसे रेल सवारी के लिए रेल टिकट।
चुपचाप तैयारी करें, दूसरों को।बताने बाले।कम ही पास होते हैं।
जो भी competitive exam आये उसे अप्लाई करो।और पेपर दो। ज्ञानबान बनो गे।
रिजल्ट या पास या नया तजुर्बा। ज्ञान।
FAIL: First Attempt in Learning.