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शनिवार, 27 फ़रवरी 2021

पढ़ना

 पढाई एक नशा है।


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कोई किसी को ★पढ़ा नहीँ सकता★ जब तक पढ़ने बाले का पढ़ाई में ♀स्वयं रुचि न हो।

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रुचि के लिये पढ़ाई समझ आना जरूरी है।

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पढ़ाई न समझ आये तो एक बहुत ही आसान तरीका है - बार बार पढ़ते जायो। 

जैसे जिस गाने में रुचि हो बार बार सुनने से कण्ठ(याद) हो जाता है, उसी तरह पढ़ाई है।


उधाहरण:

कभी स्वेटर को उधड़ने या उलझे धागे को साधा है? यदि हाँ तो याद करिए

👌

स्वेटर तब तक नहीँ उधड़ता जब तक इसका एक सिरा न ढूंढ़ पाएँ। 

एक बार सिरा मिल गया, तो 5 मिन्ट में ही अनजान  सारा स्वेटर उधड़ देता है।

👌

इसी तरह उलझी पतंग की डोर या उलझा धागा साधा जा सकता है।

💐

पढ़ाई भी ऐसे ही है।

एक बार समझ आने लग गई तो आपको पढ़ने में रुचि बढ़ जाएगी। आपके अपने रोकेंगे तब भी आप रुकोगे नहीँ।

😢

रुचि कैसे पैदा करेँ?

आप देखेंगे कि पढ़ने लिखने बाले उम्र बढ़ने के बाबजूद तरोताजा सोच रखते हैं।

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केवल पढ़ाई ही जिसका कोई अंत नहीँ।

पहले क्लास पढ़ने के लिये पढ़ते हैं।

फिर कंपीटिटिव एग्जाम के लिये यानी काम काज के लिये।

फिर खाली समय में मन, बुद्धि को कुशाग्र करने के लिये पढ़ते हैं।

किताबेँ,

अखबारें, 

मैगज़ीन, 

वीडियोस, 

सोशल प्लेटफार्म


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 ज्ञान 

विज्ञान या 

अज्ञान

 का असीमित स्रोत है।

बुद्धि से सदुपयोग करेँ।


दुरुपयोग आपको बर्बाद कर सकता है।



गुरुकुल Gurukul

 Discipline

and 

Knowledge

is 

Gurukul.

Knowledge: IQ, SQ, EQ


IQ: 

Intelligence quotient   

SQ:

 Social Quotient

EQ: Emotional Quotient

😢

गुरुकुल में ब्यक्तितय का सर्बपक्षीय विकास होता है।

जैसे 

* बौद्धिक बल शिक्षा

* नैतिकता की शिक्षा

* समाज और राष्ट्र प्रेम शिक्षा।

* शारीरिक(योगा ज्ञान) और मानसिक स्वास्थ्य (मेडिटेशन)

शिक्षा।

ताकि बिद्यार्थी सर्व कला भरपूर बनने की क्षमता रखे और प्रेम, करूणा, सहनशीलता, शौर्य , दिरदृष्टि जैसे  सदगुण प्रफुल्लित हो सकें।

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घर बैठे English बोलना/लिखना सींखेँ

 Tough (Difficult) Times

कठिन समय(बुरा वक़्त)

Tough times
- tease
- tear and
- trouble.

But
Tough time is like physical exercise.

 You  may not like to do exercise today but it will make you stronger tomorrow.

Today's hard and smart work on learning a skill, clearing an exam or competition will "empower you".

कठिन समय, कड़ी मेहनत, लग्न से किये प्रयत्न बुरे लगते हैं। परन्तु सफलता मिलने पर या नहीँ भी मिलने हम महसूस करते हैं कि हम में बहुत शक्ति समर्था और ज्ञान।की बृद्धि हो चुकी है।

जो कल तक हम दूसरों से पूछ पूछ कर जीवन चलाते बहां हम स्वयं अपने आप जीवन चला रहे हैं।

💐
कैसे ?
40-45 साल पहले प्रोफेसर साहिब ने अँग्रेज़ी अखबार पढ़ना शुरू किया। 

परन्तु डिक्शनरी ले कर शब्दोँ के अर्थ ढूंढते ही 4-5 घन्टे में केवल एक पेज पढ़ सकते थे।

परन्तु आज 40-45 साल बाद 24 पेज का अखबार 10 मिन्ट में समझ आ जाता है। 

औऱ उसके बाद अपना रिसर्च work करने लगते हैं।

😢
कल,(27th February, 2021) ऑनलाइन इनटरनैशनल कांफ्रेंस थी।

👍
USA(अमेरिका)
Bangladesh(बांग्लादेश)
UAE(बहरीन)
India(भारत) 
आदि देशों के प्रोफ़ेसर ने अपने
अपने बिचार विमर्श किया।

बिचार विमर्श दुनिया की शिक्षा  पद्ति पर आधारित थे।

इस लिये आज की मेहनत कल आपके लिये सशक्तिकरण का स्रोत बनेगी को ध्यान रख कड़ी मेहनत करेँ।

सुप्रभातम