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बुधवार, 18 नवंबर 2020

घर बैठे बैंक पेपर की तैयारी करेँ

Self Discipline
स्वयं सुधार कथा

अध्यापक से गुरु बनना कठिन है।

2
परन्तु गुरु जी के शब्द कम ज्ञान अधिक होता है।

3
जिज्ञासु ने पूछा :

 गुरू जी सफलता के लिए कौन सा सही तरीका है।

गुरु जी मुस्कराए: 

2-3 मिन्ट चुप रहे। 

4
अब तक जिज्ञासु मन ही मन सोच रहा था "गुरु जी को इस प्रश्न का उत्तर नहीँ पता। " और खुश हो रहा था कि मैंने गुरू जी ऐसा प्रश्न पूछा जिसका उत्तर गुरु जी को नहीँ पता।

5
कम बुद्धि जिज्ञासु बढ़े खुश होते हैं जब उनके पूछे प्रश्नों का उत्तर दूसरे ज्ञानबान नहीँ देते।
6
प्रश्न पूछना आसान है परन्तु उनके उत्तर स्वयं ढूंढना अति कठिन।


7
 जो प्रश्नों के उत्तर स्वयं ढूंढते हैं बह जीवन बिजेता बन जाते हैं।

दूसरे स्वयं प्रश्न बन रह जाते हैं।

8

अब 3 के आगे पढें। गुरू जी 2-3 मिन्ट के बाद बोले:

वत्स तैयारी और सफलता बैसे है जैसे तीर और कमान।

तीर को सही दिशा में रख कर लक्ष्य साधना पड़ता है।
कमान पर तीर की दिशा को लक्ष्य पर सीधा रखना पड़ता है 
तब कमान पर लगे तीर को इतनी शक्ति से खींचना पड़ता है जिससे न तो तीर लक्ष्य से पीछे रहे और न ही आगे रहे बल्कि सही लक्ष्य को भेद दे।

इसमें कमान की शक्ति, स्ट्रिंग(कमान का धागा) की गुणवत्ता,  तीर कमान चलाने की क्षमता, लक्ष्य भेदने की तैयारी व परिशिक्षण सभी चाहिये।

9
अब इसको पेपर या कंपीटिटिव एग्जाम पर लगाते हैं।

* अच्छी पेपर की पुस्तके=  कमान 
* अच्छी तैयारी =  तीर चलाने और लक्ष्य भेदने की कला
* पेपर में प्रश्नों के उत्तर देना= कमान पर तीर लगा कर, लक्ष्य साधना और तीर चलाना ताकि तीर लक्ष्य भेद पाए।
इसमे आँखे, बुद्धि , सही साहस, धैर्य, समय प्रबंधन, स्वयं अनुशासन आदि की आवश्यकता है।

इसलिये वत्स सफलता के लिए तैयारी के साथ साथ यह गुण भी जरुरी है।

जिज्ञासु सुन कर गुरु जी के नत्मस्तक हो गया।

आप ने भी सीख लिया होगा। आशा है।






 

घर बैठे बैंक पेपर की तैयारी करेँ

 Stay positive and happy


Work hard and hope for best.

Surround yourself with happy and genuine.


केवल खुश और सच्चे हितैषी लोगों का संग करेँ। जिनसे सकारत्मक ऊर्जा मिले।

^ आप ने देखा होगा कि पेपर के एकेडमिक पार्ट पर कम पोस्ट हैं औऱ प्लानिंग रणनीति(स्ट्रेटेजी) और स्वयं सुधार पर अधिक पोस्ट है।

$ बिलकुल सही पढ़ा। प्लांनिंग, स्ट्रेटेजी, स्वयं सुधार जीवन मे सफलता देता है।। किताबें तो सभी बच्चे एक ही पढ़ते हैं फिर कोई गोल्ड मैडल ले जाता है दूसरा पास भी नहीँ हो पाता।

६ केवल प्लांनिंग, स्ट्रेटेजी और स्वयं सुधार ही बेहतर है गोल्ड मेडलिस्ट का।

@ अपने 86400 हीरों का सही प्रयोग करें। 24×60×60.

शाबाश! 
* मन लग कर पढ़ो, मेहनत करो
* सही खायो जो सेहत अच्छी रखे।
**मन चित प्रसन्न रखेँ। हमेशा "मैं बिजेता हूँ" की फीलिंग लें। हाथ पर पेन से छोटा सा निशान बनायें, जिसे देख याद यह फीलिंग आये और पेपर की तैयारी याद आये, पढ़ना शुरू।
*अपनी पढ़ाई पर फोकस रखें
* बाकी सब पेपर के बाद।

सुप्रभातम


घर बैठे बैंक पेपर की तैयारी करें

 Nervousness


नर्वसनेस
घबराहट
1
जिस  विद्यार्थी  में यह नर्वसनेस्स होती है उसमें आत्म विश्वास की कमी रहती है।
2
जिसमें आत्म।बिश्वास की कमी होती है उसे तैयारी अच्छी होने क़े बाबजूद भी अपने पर शक्क रहता कि ," मैं यह कर।पायउँगा या नहीँ" Self doubt is like locust that destroys the best preparation.

आत्म शक्क उस टिड्डी दल की तरह है जो हरी भरी फसल को नष्ट कर देती है।

3
इसलिए स्वयं का आत्म मन्थन करेँ कहीं आपका आलोचक आपके अपने अंदर तो नहीँ। First of all kill your own "inner critic.' 

अंदर से एक आवाज या नकारत्मक बिचार आते हैं:

 मैं नहीँ कर पायउँगा, मुझसे नहीँ होगा, बाहर से दूसरों के शब्द: तुमसे नहीँ होगा, तुम नहीँ कर पायोगे। यह कुछ लोग खुद नहीँ कर सकते या जीवन।में नहीँ कर पाए होते तो ऐसा कहते हैं।

उसी समय मन में बुदबुदाए : खुद से हुया नहीँ , मुझे कह रहा/रही है। और भूल जायें, इग्नोर कर दें। सकारत्मक ऊर्जा बढ़ेगी।

4
यदि inner critic है तो अपने आप को auto suggestion दें : .
Yes, I can do. 
I am educated.
 I am hard working.
 My memory is sharp.
I am intelligent.
I am daughter/son of ..............पिता का नाम लिखें या पिता का काम जैसे soldier etc

इसे बार बार बोले, 100 बार 7 से 10 दिन। inner critic शान्त हो जाएगा। सकारत्मक ऊर्जा बढ़ जाएगी। पढ़ाई पर फ़ोकस बढ़ जाएगा।

5
घबराहट यानी nervousness को दूर करने के लिए
1
 योग करेँ - लोम विलोम
2
 पानी खूब पीयें
3 
सफल/असफल की चिंता छोड़ केवल और केवल पढ़ायी करेँ।।
4 
30 मिन्ट पढें 5 मिन्ट की ब्रेक लें। फिर दोबारा पढें।
5
Deep Breathing करेँ। ध्यान करेँ।
6
Walking?exercise करेँ।

घबराहट खत्म।

Regret/अफसोस

जो कर दिया, बह अच्छा होगा या बुरा।
अच्छा हुया, आप खुश
बुरा हुया, तो अनुभव
दोबारा आसान हो जाएगा। समस्या कहाँ है।

याद रखें, हमारे इर्द गिर्द लोग केवल बोलते हैं: करो, करो, कब होगा, तुम कर भी पायोगे या नहीँ। लेकिन इन्हें इग्नोर करके करते जायो।

सफल होने पर यही तालियां मारेंगे।