एक गुण
जो हर जगह
हर समय
हर
प्रस्थिति में
काम देता है
USE Appreciation instead of expectations
Welcome everyone with a smile .
मीठी बोलबानी
मीठी बोलबानी बाला इंसान
करेला यानि कड़बी बस्तु भी बेच सकता है
परन्तु कड़बी ऊँची बोलबानी बाला इंसान
शहद भी नहीं बेच सकता।
कई लोग जैसे ही जीवन में तरक्की करते हैं उनकी बोलबानी मीठी से कड़बी हो जाती है।
उनके लिए और सभी के लिए कबीर जी लिखते है :
बड़ा हुआ तो क्या हुआ , जैसे पेड़ खजूर
पक्षी को छाया नहीं , फल लागे अति दूर।
जो हर जगह
हर समय
हर
प्रस्थिति में
काम देता है
USE Appreciation instead of expectations
Welcome everyone with a smile .
मीठी बोलबानी
मीठी बोलबानी बाला इंसान
करेला यानि कड़बी बस्तु भी बेच सकता है
परन्तु कड़बी ऊँची बोलबानी बाला इंसान
शहद भी नहीं बेच सकता।
कई लोग जैसे ही जीवन में तरक्की करते हैं उनकी बोलबानी मीठी से कड़बी हो जाती है।
उनके लिए और सभी के लिए कबीर जी लिखते है :
बड़ा हुआ तो क्या हुआ , जैसे पेड़ खजूर
पक्षी को छाया नहीं , फल लागे अति दूर।
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