Improvement Vs Perfection
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Continuous improvement is BETTER■
than
delayed
perfection.
- Mark Twain, American Writer
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हम में से बहुत हमेशा परफेक्शन यानि हर काम में कोई न कमी निकाल कर सुधार नहीँ करते।
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कमीं कोई भी निकाल सकता है।
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परन्तु उस कमी को सही कैसे करना है नहीँ बता पाते।
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किसी की कमी निकालना,
अर्थ
उसे जो काम कर रहा है हतोअहित(discourage) करना है।
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हौसला बढ़ाने की बजाय घटाना है।
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हौसला बढ़ाने वाला तो जीवन में तरक्की के लिये एक ही काफी है।
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इसलिये हमेशा करते रहो, सुधारते रहो।
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आज दिमागी एक कदम चलो गे और यदि चलते रहोगे तो एक साल ज्ञान के 365 कदम सीख जायोगे।
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अपना मनोबल स्वयं बढ़ाते रहो।
दुसरे बड़ा दें ठीक,
नहीँ बढ़ाएं तो भी ठीक।
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हतोअहित कभी न हों।
यदि मूड खराब हो भी जाये तो सकारत्मक सोचो।
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मन पसंद म्यूजिक सुनो।
मन पसंद चलचित्र देखो।
जो दोस्त मनोबल बढ़ाये,
सोच से पॉजिटिव हो को फोन करेँ।
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मूड ठीक हो जाएगा।