(Inner Personality- known to you only but like the fragrance of flowers impacts your image and relationships with family, friends, society nation and world)
Power of AIM in life.
1
Aim, Goal, Mission, Target
or
whatever name the desired objective is known;
BUT it has great importance and power in life.
2
Most important self deciding question is
2.1 Who am I?
Use this guiding help chart:
2.1.1 I am_______________
2.1.2 I am _______________
and so on
Think
and
Write minimum 10 strenths
Write as many as your strengths as you like but not less than 10.
2.1.2
"What is my aim in life?
or
Objective to be achieved in life?"
3
☺️ Think about a Train without proper destination board and engine.☺️
Will you buy a ticket and board this train?
" No not at all",
your mind will say.
4
So, have a "vision board" ,
better nail it on wall or wooden plank
and write your
aim,
mission,
goal,
target
on it.
5
Now your mind will START
finding
ways and means to achieve
THIS Written GOAL.
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START with
whatever you know,
whatever you have
and
where you are.
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DO NOT CHANGE
the Goal often
or many times
BUT do change the strategy,
ways and means
to achieve the desired GOAL.
8
There can be many
sub goals
to reach
or
achieve the BIG Goal.
9
Check your behaviour and actions and ask yourself
"Is this nearing me to my Goal?"
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Strengthen your strengths of achieving by reading about the goal and writing with what is achieved .
Date is important so that you may know whether you are in right direction or moving in misdirection.
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Achieving goal becomes
easier and sure
by following these steps.
पर्सनालिटी डेवलपमेंट
(अंतर पर्सनालिटी जो एक फूल की खुशबू की तरह है और आपका दुसरों के मन में इमेज और रिश्ते सुधारता है)
जीवन में लिखित लक्ष्य का महत्ब।
1
ऐम,
गोल,
मिशन,
टारगेट या
अपने चाहे लक्ष्य
को किसी भी नाम से जाने परन्तु" लिखित लक्ष्य "को पाने में बहुत ही महत्ब है।
2
अपने आप से पूछे जाने बाले प्रश्न?
2.1
मैं कौन हूँ?
2.2
मेरे जीवन का लक्ष्य क्या है?
या
मेरे जीवन का उद्देश्य क्या है?
नमूना:
2.2.1 मैं_______________हूँ
2.2.2 मैं _______________हूँ
इसी तरह लिखते जाएं।
कम से कम अपने 10 गुण लिखें।
अधिक
* जितने चाहो*
लिख सकते हो। 20, 30, 50 आदि
3
☺️
जरा सोचिए क्या आप उस *ट्रैन या बस* का टिकट लेंगे जिस पर कहाँ जा रही का डेस्टिनेशन बोर्ड न लगा हो?
नहीँ न।
परन्तु जीवन बिना लिखित लक्ष्य के जी रहे हैं।
यदि लक्ष्य अभी पता नहीं तो पढ़ते जायो सीखते जायो।
लक्ष्य मिल जाएगा।
इंसान एक जैसे होते हैं, केवल सोच बढ़ी छोटी होती है।
बोलिये न केवल सुनिए, दूसरे की सोच पता लग जायेगी।
👍
सोचिए और कम से कम 2 साल में क्या करना और कहां पहुंचना है को लिख कर रखें और उसे दिन में कई बार पढें।
ताकि लॉ ऑफ अट्रैक्शन से ब्रह्मण्ड आपके लक्ष्य पूरे करे।☺️
4
इसलिए "विज़न बोर्ड "बनाएं
और अपनी दीवार पर लगाएं।
डेट जरूर लिखें।
बिना डेट कहानी है।
जो हज़ारों सालों से सुनाई जा रही हैं।
5
अब आपका दिमाग जो शरीर का इंजन है बार बार इस लक्ष्य को पाने क़े तरीके ढूंढे गा।
इसे भी लिखते जायो डेट डाल कर।
दिशा निर्देश और दिशा मिलती रहेगी।
6
सबसे पहले अपनी नोट बुक पर
जहां हो,
जो हो,
जैसे हो
लिखो और आगे बढ़ने के प्रयत्न करो। अपनी मजबूरियों को न देखें। सोचो और लिखो कि आज से 5-7 साल कहाँ।होंगे।
इसके सुपने।
जो मजबूरियां गिनबायें उनसे दूर रहें।
देखो समझो सब,
पर बोलो न,
बतायो न,
केवल करो।
एक चुप सौ सुख।
करने से जिंदगी बदलती है।
अपने और अपनी मेहनत पर बिश्वास करो।
दुसरों पर नहीँ।
जैसे किस्मत, सरकार आदि।
पढ़ो
पेपर दो,
पास करो,
आज नहीँ तो कल नौकरी मिलेगी ही।
हार्ड वर्क सभी करते हैं,
स्मार्ट बर्क करेँ।
यह पैसिव लर्निंग से होता है
हर रोज़ एक घण्टा पढ़ने से, पेपर हो न हों, एक साल में 365 घन्टे का ज्ञान एकत्रित हो जाता है।
कुछ 10 घन्टे में 1 चैप्टर पूरा करते हैं।
दूसरे कुछ 10 घण्टे में 10 चैप्टर पढ़ और समझ लेते हैं ।
यह पैसिव रीडर होते हैं।
मर्जी आपकी।
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बार बार लक्ष्य न बदल कर,
लक्ष्य को प्राप्त करने का तरीका बदलिए।
लर्निंग स्ट्रेटेजी या करने का तरीका मेरा कहना है।
अपनी कमीयों को दूर कर,
स्वयं अनुशाशन से कठिन से कठिन लक्ष्य प्राप्त किया जा सकता है।
8
बड़े लक्ष्य को पाने के लिए कई छोटे गोल प्राप्त करने पड़ते हैं।
जैसे किसी पहाड़ पर चढ़ने के लिए संघर्ष पहले कदम से शुरू होता है
जो छोटे छोटे क़दम लेने से नहीँ डरता बह ऊंचे पहाड़ पर पताका फहरा ही देता है।
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अपने ब्यवहार और दिन में किये कर्मो को चैक करके अपने आप से पूछें कि
" क्या यह मुझे लक्ष्य के नजदीक ले जा रहे है या भटका रहे हैं? "
जिन्दगी दिनों और पलों का तो पुलंदा है।
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अपने लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए "गुणों" को बढ़ायो औऱ कमियों को सुधार कर घटायो।
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उपरलिखित को फॉलो करने से "लक्ष्य प्राप्ति" सुगम हो जाती।
इसका प्रिंट लेकर बार बार भी पढ़ सकते हो या अपनी नोट बुक नोट भी कर सकते हो।