गरीब कौन ?
आज एक बहुत ही अजीब घटना घटी जिसने मुझे हंसाया भी और सोचने पर मज़बूर भी किया।
क्या है घटना ?
एक आदमी दूकान पर प्लास्टिक के लिफाफे लेने आया और उसने दूकानदार से लिफाफे मांगे। दुकानदार ने कहा की लिफाफे हैं। उसने उनका रेट पूछा। दूकानदार ने कहा : 3 रूपए प्रति लिफाफा।
बह बोला : 100 रूपए के कितने दोगे ?
दुकानदार बोला : 35 दे दूंगा
यानि 105 रूपए बनते हैं। तुम 100 रूपए दे देना।
बह ब्यक्ति मान गया और बोला : दे दो
दुकानदार ने जब 35 लिफ़ाफ़े कॉउंट करके दिए तो एक लिफाफा बाकि रह गया। उसने कहा यह भी ले लो।
ब्यक्ति ने 36 लिफाफे ले लिए और बोला : कोई डिस्काउंट
इससे पहले कि दूकानदार वोले , उस ग्राहक ने दो तीन बार अपने सर पर थप्पड़ मार दिया।
दुकानदार यह देख हैरान रह गया और कहा (वोला) : आप यह क्या कर रहे हैं?
ग्राहक ने बड़ी अजीबोगरीब मन में चल रही व्यथा बताई : साहिब , मैं एक अच्छे खासे घर का हूँ। गाड़ी पर देखो ये लिफाफे लेने आया हूँ। पहले एक दूकान पर पूछा उसने 6 रूपए लिफाफा बताया। मैंने नहीं लिए। दूसरे ने 4 रूपए लिफाफा बताया। मैंने सोचा इससे कम मिलेगा तब लूंगा। अब आप ने 3 रूपए लिफाफा बताया और तब भी मैंने आपसे मोल तोल किया और आप ने मुझे 36 लिफाफे दे दिए। फिर भी मेरा मन आपसे मोल तोल करने के लिए जुबान खोलने बाला था। इस लिए मैंने अपने आप को थप्पड़ मारा।
मैं इस देश से ऑस्ट्रेलिआ चला गया। डॉलर कमाता हूँ पर सोच गरीब ही है। हमेशा कुछ भी खरीदता हूँ तो यही चाहता हूँ की और डिस्काउंट मिल जाये। हालाँकि आपकी दूकान तक आने के लिए मैंने कार का प्रयोग किया जिस में पेट्रोल डालता है। पेट्रोल हो सकता मैंने 100 रूपए का जला दिया हो परन्तु मन को शांति है कि मैंने लिफाफे आधे मोल में खरीदें हैं।
अब मुझे यह समझ नहीं आ रहा कि मैं अक्ल मंद हूँ या मुर्ख। यदि पेट्रोल के पैसे लगा लूँ तो लिफाफा तो 6 रूपए में ही पड़ा। समय बैसे ही बर्बाद किया है।
ग्राहक और दूकान दार दोनों बहुत खुल कर हसे। ग्राहक ने 100 रूपए दिए और चला गया।
मैं सोच रहा था गरीब कौन ? जिसके पास खाने पीने या रहने के लिए घर नहीं यानि पैसे की कमी है ?
या
जो कमाते भी काफी हैं परन्तु सोच से हमेशा लालची हैं।
आज एक बहुत ही अजीब घटना घटी जिसने मुझे हंसाया भी और सोचने पर मज़बूर भी किया।
क्या है घटना ?
एक आदमी दूकान पर प्लास्टिक के लिफाफे लेने आया और उसने दूकानदार से लिफाफे मांगे। दुकानदार ने कहा की लिफाफे हैं। उसने उनका रेट पूछा। दूकानदार ने कहा : 3 रूपए प्रति लिफाफा।
बह बोला : 100 रूपए के कितने दोगे ?
दुकानदार बोला : 35 दे दूंगा
यानि 105 रूपए बनते हैं। तुम 100 रूपए दे देना।
बह ब्यक्ति मान गया और बोला : दे दो
दुकानदार ने जब 35 लिफ़ाफ़े कॉउंट करके दिए तो एक लिफाफा बाकि रह गया। उसने कहा यह भी ले लो।
ब्यक्ति ने 36 लिफाफे ले लिए और बोला : कोई डिस्काउंट
इससे पहले कि दूकानदार वोले , उस ग्राहक ने दो तीन बार अपने सर पर थप्पड़ मार दिया।
दुकानदार यह देख हैरान रह गया और कहा (वोला) : आप यह क्या कर रहे हैं?
ग्राहक ने बड़ी अजीबोगरीब मन में चल रही व्यथा बताई : साहिब , मैं एक अच्छे खासे घर का हूँ। गाड़ी पर देखो ये लिफाफे लेने आया हूँ। पहले एक दूकान पर पूछा उसने 6 रूपए लिफाफा बताया। मैंने नहीं लिए। दूसरे ने 4 रूपए लिफाफा बताया। मैंने सोचा इससे कम मिलेगा तब लूंगा। अब आप ने 3 रूपए लिफाफा बताया और तब भी मैंने आपसे मोल तोल किया और आप ने मुझे 36 लिफाफे दे दिए। फिर भी मेरा मन आपसे मोल तोल करने के लिए जुबान खोलने बाला था। इस लिए मैंने अपने आप को थप्पड़ मारा।
मैं इस देश से ऑस्ट्रेलिआ चला गया। डॉलर कमाता हूँ पर सोच गरीब ही है। हमेशा कुछ भी खरीदता हूँ तो यही चाहता हूँ की और डिस्काउंट मिल जाये। हालाँकि आपकी दूकान तक आने के लिए मैंने कार का प्रयोग किया जिस में पेट्रोल डालता है। पेट्रोल हो सकता मैंने 100 रूपए का जला दिया हो परन्तु मन को शांति है कि मैंने लिफाफे आधे मोल में खरीदें हैं।
अब मुझे यह समझ नहीं आ रहा कि मैं अक्ल मंद हूँ या मुर्ख। यदि पेट्रोल के पैसे लगा लूँ तो लिफाफा तो 6 रूपए में ही पड़ा। समय बैसे ही बर्बाद किया है।
ग्राहक और दूकान दार दोनों बहुत खुल कर हसे। ग्राहक ने 100 रूपए दिए और चला गया।
मैं सोच रहा था गरीब कौन ? जिसके पास खाने पीने या रहने के लिए घर नहीं यानि पैसे की कमी है ?
या
जो कमाते भी काफी हैं परन्तु सोच से हमेशा लालची हैं।