दोपहर का समय था। सूर्य तप रहा था। एक ज्ञान बान अपने चरखे पर सूत कात रहे थे।
तभी एक जवान लड़का परेशानी की हालत में उनके पास आया।
लड़का बोला : बाबाजी में क्या करूँ ? मेरी बीबी मुझ पर शक करती है , छोटी छूटी बात पर झगड़ती है , में काम काज से थक कर आता हूँ , बजाये इसके की मुझे शांति से मुस्कराहट से पानी पिलाये, आराम करने दे बह दिन भर की शिकायतें मेरी शिकायते बच्चों की शिकायतें ले कर मुझे आराम की बजाये बेआराम कर देती है। फिर शुरू होती है वेबजह की बहस। यदि मैं चुप रहूँ तो बह कहती है कि दिन में आफिस या काम पर ऐसा क्या हुआ की मैं चुप हूँ। उसकी पुछ्ताश मुझे किसी पुलिस बाले की तफ्तीश से काम नहीं लगती। लड़ाई झगड़ा अपशब्द बोलना , बहस करना तो हमारारोज़ का काम है. मुझे काम से इतनी दिमागी थकाबट नहीं होती जितनी घर आ कर होती है। मुझे कोई हल बताएं। में शादी को सफल कैसे बनायुं।
इस समय तक ज्ञान बान की पत्नी लोई जी पानी का गिलास लेकर आ चुकी थी ; बह बोली पानी पीजिये।
जवान लड़के ने गिलास लिया और पानी पि लिया। मन कुछ शांत हुआ।
ज्ञान बान अपनी पत्नी से बोले : लालटेन ले आईये।
जवान लड़का बड़ा हैरान था की दोपहर के तीन बजे पूरी धूप में ज्ञान बान लालटेन क्यों मँगबा रहे हैं।
उनकी पत्नि जी लालटेन ले कर आ गयी।
बह लालटेन ज्ञान बान के चरखे के पास रख कर चली गयी।
ज्ञान बान ने दोबारा पत्नि जी को बुलाया और कहा : कुछ मीठा मेहमान के लिए ले आईये।
पत्नि नमकीन ले कर आई और नमकीन मेहमान को दे दिया। मेहमान और ज्ञान बान ने उसे खा लिया।
ज्ञान बान फिर मेहमान से पूछने लगे : तो आप क्या कह रहे थे ?
जवान बोला "मुझे मेरे प्रश्नों का उत्तर मिल गया है।
आप ने लालटेन मांगी आपकी पत्नी ने बिना पूछे लालटेन ले आई। कोई प्रशन नहीं किया। आप ने मीठा माँगा और बह नमकीन ले आई। आप ने कोई प्रशन नहीं पूछा न ही कोई शब्द बोले।
आप की पत्नी समझदार है जो समाज गयी की लालटेन केवल रौशनी ही नहीं देती आप को किसी और काम के लिए चाहिए होगी। आप समझदार है बिना बोले समझ गए कि घर में मीठा नहीं होगा तभी तो आपकी पत्नी नमकीन ले कर आई। जिस पति पत्नी में सूज बूज है बह घर स्वर्ग है।
पति पत्नी का आपसी विश्वास व् सूज बुज ही गृहस्थ जीवन का आधार हैं। दूसरों की दखलबाजी घर बर्बाद कर देती है पति घर का राजा है पत्नी रानी। बाकि सब राजपथ के मेहमान हैं। हाँ सबका अपनी अपनी जगह पर महताब जरूर है। लेकिन बह पति पत्नी का पर्याय नहीं है। अच्छा में चलता हूँ।
ज्ञान बान मुस्कराये और मेहमान को द्वार तक छोड़ने के लिए आये