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शुक्रवार, 23 अक्टूबर 2020

घर बैठे पेपर की तैयारी करेँ

 स्व सुधार Part II

मार्गदर्शन

Habits die hard, bad habits die very hard.

Carelessness costs career.

गैर जिमेबार जीवन कैरियर औऱ सुख बर्बाद कर देता है।

आशा है आपने दोनो दोस्तोँ   के बारे में स्व सुधार Part I में पढ़ लिया होगा। 

दोस्तों के नाम A और B रखे थे।

तो दोनों दोस्त अब शहर में कालिज में ग्रेजुएशन (BA/B Com/B.Sc/BCA/ BBA/etc) के 

लिए पढ़ रहे है।

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कालिज आने जाने में मजा बहुत आता था। कालिज आते,  जाते ।

 जाते समय तो कालिज पहुंचने की उथल पुथल रहती। परन्तु जब कालिज का समय समाप्त होता तो  सुबह से भी अधिक मज़ा☺️ आता।

आते जाते को लिफ्ट के लिए हाथ देना।

 यदि A  को लिफ्ट मिल जाती तो बह B को मुहं बना कर चिड़ाता। 

और B बहिं ठहर कर किसी दूसरे से लिफ्ट लेने के लिए खड़ा रहता या पैदल ही चल पड़ता।

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मज़ा तो तब आता जब कई बार लिफ्ट नहीँ मिलती और दोनोँ दोस्त अमरूद के खेतों में जा कर मालिक से पूछ कर अपने किताबों  को अमरूदों से भर लेते और सारे रास्ते खाते हुए मज़ा लेते आते।

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कभी अमरूद, 

कभी बेर, 

कभी वाटर मेलन (मतीरा),

 कभी खरबूजे, 

कभी गन्ने आदि इनकी हर रोज़ के pre-lunch नाश्ता होता।

कोई भी किसान इनको मना नहीँ करता।

 सभी खुश होते कि कालिज में पढ़ने बच्चे उनके पास आते हैं।

किसान दरियादिल होते हैं।

 अपने को अहोभाग्य समझते कि देश का भविष्य इन्ही पढ़े लिखों के हाथ में है। पढ़े लिखे ज्ञान बान की इस दुनिया को बहुत जरूरत है।

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इसी तरह हस्ते खेलते 3 साल गुजर गए और पता ही नहीं चला कि कब पेपर हुए और दोनों कब बैंक में सिलेक्शन हो गई।

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क्योंकि दोनों की joining इकठ्ठे हुई थी, ट्रेनिंग शेड्यूल भी एक ही थी।

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अब ट्रेनिंग शहर के बड़े होटल में हुई। 9.30 बजे से 5 बजे तक ट्रैनिंग हुई। 

शाही ब्रेकफास्ट होटल में डाइनिंग हॉल में हुया।

 बैंक ने इंतज़ाम किया था।

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सुबह की चाय, 

लंच और

 शाम की हैवी टी ट्रेनिंग के दौरान ही दी जाती।

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जब ट्रेनिंग खत्म होती तो A और B दोनो अपने कमरे में आते।

 जरा फ्रेश हो कर B अपने टेबल पर बैठ सारे दिन की training में जो सुना और सीखा होता उसके raw notes को फाइनल करने लगता तो A उससे उलझ जाता और कहता कि जहाँ घूमने फिरने आये है या पढाई करने?

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परन्तु डिनर करने के बाद A और B सो जाते क्योंकि A बिजली बंद करने की जिद करता।

 जैसे ही A सोता, B उठ कर, टेबल पर बैठ कर, दिन भर में जो सीखा, समझा होता उसकी सोच सोच कर training रिपोर्ट बनाता और अपने ब्रीफ़केस में रख लेता।

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जब ट्रेनिंग से A और B बापिस आते तो आते ही बैंक का Branch Manager ट्रैनिंग रिपोर्ट मांगता।

A हँस देता और कोई रिपोर्ट नहीँ देता। 

परन्तु B अपनी ट्रेनिंग रिपोर्ट दे देता।

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नतीजा Time scale के आधार पर A 60 साल की उम्र में DGM बन कर रिटायर हो गया। पेंशन मिलनी शुरू।

और B पहले बैंक का GM बना, फिर  CGM बना और फिर बैंक का Director बन गया।

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खाली दिमाग शैतान का घर होता है। 

सही कम सोचता है, गलत अधिक।

Mr A गांब में जहाँ भी जाता गांब बाले पुछते B तो रिटायर नहीँ हुया, तुन्हें क्या हुया।

 कुछ गांब बाले तो काना फुसी करने लग पढ़े कि A को बैंक ने ससपेंड कर दिया है।

 कोई हेरा फेरी की होगी।

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इस कानाफूसी का नतीजा यह हुया कि Mr A  ने एक बकील से सलाह ली। 

बकील ने कहा आपके साथ कानूनन गलत हुया है । 

संबिधान का article 14 आपको Right to Equality देता है।

 जब Mr B को बैंक ने Director बना दिया तो आपके अधिकारों का हनन हुया है। आप मुकदमा करके बैंक से मुआबजा ले सकते हो।  

माड़ी सलाह भी बर्बाद कर देती है।

सलाह सभी दे देते हैँ, भुगतना खुद को पड़ता है। मुक़दम्मे पर जो खर्च हुया , समय बर्बाद हुया बह तो बकील या किसी और ने नहीँ दिया।

 नुकसान तो Mr A का हुया जिसने ईर्ष्या बश अपनी बुद्धि का प्रयोग नहीँ किया।

किसी भी कर्म का CBA सोचिए। CBA=Cost Benefit Analysis.

एक मुकद्दमे में 5-6 साल लग जाते हैं, मन की शांति, समय की बर्बादी, पैसे की बर्बादी, 5-6 साल किसी भी काम को फोकस नहीँ कर सकता। चिड़चिड़ापन बढ़ जाता है, गुस्सा बढ़ जाता और अंत मुकदमे की कोई गारंटी नहीँ आप की फ़ेवर में हो न हो।

लड़ाई, झगड़े, पुलिस, कोर्ट, मुकदमे से बचना ही अच्छा है। यह जीवन से सुख छीन लेते हैं। 

केवल अहंकार ही लड़ाई झगड़े करवाता है। इससे बचें


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Mr A ने बैंक पर मुकदमा कर दिया।

निचली कोर्ट से Mr A मुकदमा हार गया।

अपील honourable High कोर्ट में कर दी।

बहां भी Mr A हार गया।

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अब बकील के कहने पर MR A ने अपील Honourable Supreme Court of India में कर दी।

Apex Court में एक दो तारीखों में मुकदमे का फैसला हो गया।

बैंक के बकील से honourable Justice ने पूछा : बैंक ने किस आधार पर Mr B को Bank Director  दिया।

17.1

बैंक के बकील ने कहा:

 Me लार्ड, Mr A और Mr B दोनोँ ने बैंक एक ही बैच में जॉइन किया। 

दोनों को ट्रैनिंग पर भेजा गया।

 दोनो की ट्रेनिंग पर एक जैसा खर्च हुया।

17.2

Mr A ने कभी ट्रेनिंग रिपोर्ट नहीं दी। ट्रेनिंग पर खा पी कर TA bill बैंक से लेता रहा।

जबकि Mr B ने सभी training reports बैंक को दी। 

जो बैंक ने कॉपीज करा कर सभी ब्रांचेज़ को भेजी।

 जिसे पढ़ कर बैंक में कई नये रूल बने और बैंक को करोड़ों का लाभ हुया। 

Mr B की ट्रेनिंग रिपोर्ट्स का भरा हुआ ट्रक माननीय सुप्रीम कोर्ट के बाहर खड़ा है जो माननीय जज साहिब चैक करबा सकते हैं।

17.3

Mr A का बैंक के प्रति रबैया गैर जिमेदारना रहा। इस लिए उसे DGM के लेवल पर रिटायर मैंट मिली। 

17.4

जबकि Mr B का रबैया बहुत जिमेदारना रहा और बैंक ने उसे GM, CGM, Director के पद दिए।

बैंक के बकील ने Mr A और Mr B की ट्रेनिंग पर हुए खर्च का ब्यौरा भी दिया। 

इसके साथ ही Mr B द्वारा दी गई रिपोर्ट्स से बैंक  को क्या लाभ हुया इसका ब्यौरा भी दिया।

17.5

इस पर माननीय न्यायाधीश जी ने बहुत ही सुंदर जजमेंट दी/जो अलगर्ज़ों के लिए कान खड़े करने के लिए काफी है।

जज साहिब ने कहा और लिखा: 

मेरे पास कोई पावर नहीँ है कि मैं निक्कमे Mr A जो समाज पर बोझ है की पेंशन बन्द करदूँ, मैं बैंक से कहता हूँ यदि बैंक रूल इज़्ज़ाज़त देते हैं तो Mr A से सारे Training का खर्च बापिस ले ले, मुकद्दमे का खर्च ले और पेंशन बन्द कर दे।

शिक्षा:

 अपना काम जिमेबारी और लगन से करोगे तो प्रगति कोई नहीँ रोक सकता। जो जानते हो उसे लिखो। ताकि सभी उसका लाभ ले सकें। सकीर्ण सोच न रखें।

Sharing is caring.

 

Procastination and careless destroy good careers. Work first.

नोट: 

इस लेख को शिक्षा के दृष्टिकोन से पढ़े। लेखक का किसी भी की भावनायों को ठेस पहुंचाना नहीँ है।

Benefits of writing:

Diary decreases/destroys depression. So write diary.

जीवन के बहुत से खटे मीठे अनुभव हम दुसरों को बता नहीँ सकते, पर उन्हें लिख कर जला देने से मन हल्का हो जाता है, तनाब दूर हो जाता है। हर रोज़ डायरी लिखने से (डेट जरुरी है) मानसिक तनाब नहीँ रहता और जीवन को मार्ग दर्शन मिलता है।

अभी कुछ दिन पहले CBI के साबका डायरेक्टर ने आत्म हत्या कर ली। डिप्रेशन में थे।

जीवन को जियें। मन की स्थिति को गहराई से जान कर लिखते चले जायें। आपको पता चल जाएगा सुधार कहाँ करना है।

सुधार तो स्वयं ही करना है। यदि कमरे में अधिक धूप आ रही है तो सूरज को जितना मर्जी कोसो, कोई लाभ नहीँ, उठो और पर्दा खींच दो, अपने आप अधिक धूप।कम हो जाएगी।

इसी तरह दूसरों को कोसने से कुछ नही बदलना। TV का रिमोट हमारे पास है। जब चाहो बंद कर दो, जब चाहो चला लो, किस से मिलना है, किस्से नहीँ मर्जी हमारी है। हम किसी के ब्यवहार को नहीँ बदल सकते पर उसके बयवहार पर क्रिया या प्रतिक्रिया तो हमारे हाथ में है।

पढ़ना: 

किताबेँ हैं, हम हैं। जब।मर्जी खोलो जितना मर्जी पढ़ो। 

पढ़ा जीवन मे हमेशा काम देता।

मैंने यदि यह लेख न लिखा होता तो आप तक पहुंचता। 55 करोड़ आदमी पढ़ेंगे। क्योंकि Google ने लिखा कि प्रोफेसर हिंदी में लिखो 55 करोड़ लोग हिन्दी पढ़ते हैं।उनके पास डेटा होगा तभी लिखा है।

इस लिए जो जानते हो लिखो और अपने सहयोगियों से डिस्कस करो। जो बुरा समझो भूल जायो, जो अच्छा हो लिख डालो। गुस्सा आये लिखो। बोलो नहीँ। बोलने से दोस्ती/रिश्ते टूट जाते हैं।

धन्यवाद