सकारत्मक सोच
सफलता को आकर्षित
करती है।
Positive thinking attracts success.
A journey of thousands miles starts with first step.
Failure and time is greater teacher than success and good times.
A personal development (self-improvement) resources blog. By regularly reading this blog, you will be more confident, courageous and bold. These traits are necessary for enjoying FREEDOM of thought, feelings and actions. आत्म विकास (आत्म सुधार ) के लिए इस ब्लॉग को पढ़ें। इस ब्लॉग को लगातार पड़ने से आप की सोच बदलेगी। जैसे ही सोच नकारात्मक से सकारत्मक हुई , आप के जीवन में दुःख और समस्याएं कम और सुख और खुशियां बढ़ती जाएँगी। इस ब्लॉग को पड़ने से आप की English में भी सुधार आएगा
सकारत्मक सोच
सफलता को आकर्षित
करती है।
Positive thinking attracts success.
A journey of thousands miles starts with first step.
Failure and time is greater teacher than success and good times.
High Education
+
Work Experience
+
Bad Attitude
=
Frustration and desparation
2
Low education
+
Work Experience
+
Good Attitude
=
Desired Success+ Satisfaction+Happiness
जीवन के प्रति रबैया
उच्च शिक्षा+क्षमता और अनुभव(तजुर्बा) +नकारत्मक/बुरी सोच व व्यवहार= दुख/दर्द और परेशानी।
कम शिक्षा+क्षमता और अनुभव(,तजुर्बा) + सकारत्मक/अच्छी संस्कारी सोच= मनचाही सफलता+तृप्ति/संतुष्ट जीवन+प्रसन्ता
😢मनचाही सफलता न पाने का सबसे बड़ा कारण, यह सोचना और डरना
एक ही रोग
क्या कहेंगे लोग
जो पाना चाहते हो, उस पर फोकस करो बिना किसी की परवाह किये, बिना बताये।
लक्ष्य उचित हो तो ही प्राप्ति सुख संतूष्टि देती है।
B 1333
स्व सुधार प्रेरक सत्य घटना
रबैया (Attitude)
अकल औऱ आदतें सिखाई नहीँ जा सकती, स्वयं सीखनी पड़ती हैं।
Part 1
यह घटना बहुत ही कठिन (जो हमेँ उस समय लगती थी, अब नहीँ) English भाषा में छप्पी थी। मैं आपकी सहूलियत के लिए हिंदी में लिख रहा हूँ ताकि इससे सीख ली जाए।
जब हम 1978-79 में BA में पढ़ने के बाद Company Secretaryship जॉइन किया तो हमें एक मैगज़ीन आती थी "Student Company Secretaryship"
भारत में तीन ही सबसे बड़ी वित्त की instituteस है जो देश को चलाने के लिए सहायक है:
1 Institute of Chartered Accountants of India
(ICAI)
2 Institute of Company Secretaries of India (ICSI)
3 Institute of Costs &Works Accounts of India (ICWA)
अब शायद इसका नाम बदल कर Institute of Cost Accountants हो गया है।
यह तीनोँ institutes भारतीय वितीय ढाँचे के लिए जिमेबार हैं।
हाँ तो अब प्रेरक घटना।
Student Company Secretaryship मैगज़ीन में एक बढ़ा दिलचस्प केस आया।
1
एक गांब में 2 बच्चे हम उनका नाम Mr A और Mr B रख लेते हैँ पैदा हुए। बढ़े हुये।
2
दोनों बच्चे स्कूल में दाखिल करबाए गए। दोनो हस्ते, खेलते शरारते करते और गांब के बढ़े बजुर्गों के आशीर्वाद लेते। क्योंकि बचपन ही बेफिक्र जीवन है, बाकी तो जदोजहद और यादें है।
3 11 तक गांब के स्कूल से पास की। उस समय 11 के बाद BA होती थी। +2 बाद में आई है। अब तो 5+3+3+4 system आ गया है। NEP 2020 में।
4 अब बारी कॉलेज की आई।
बढ़े बजुर्गो के बीच बहुत दिनों तक सलाह मशवरे चले, पड़ोस के गांब के पढ़े लिखों से भी मशबरा किया गया।
तब फाइनल हुया की इन बचों को शहर में पढ़ाई के लिए भेजा जाय।
5 BA part 1 में admission हो गई। क्योंकि बच्चों के 11th में नंबर ही बढ़े अच्छे थे।
6
सुबह तैयार हो कालिज जाना एक बड़ा चैलेंज होता था पूरे परिवार के लिए। जब तक बच्चे कालिज नहीँ जाते घर के सभी सदस्य उन्हें कालिज के लिए तैयार करने में ब्यस्त रहते।
जब बच्चे कालिज चले जाते, तो घर के बड़े ब्रेकफास्ट करते।
7
दूसरा चैलेंज गांब से शहर में कालिज जाना होता था।
√ पहले तो किसी साईकल बाले से लिफ्ट लेकर शहर पहुंचना।
A को लिफ्ट मिल जाती तो बह B को हाथ हिला कर चिड़ा देता।
B मायूस हो जाता। परन्तु जब B के cycle बाला A के साईकल बाले से आगे निकल जाता तो B, A को चिढ़ा देता।
√ कालिज खत्म होने के बाद गांब बापिस आना तो और भी मनोरंजक हो जाता ।
√ पैदल आना। रास्ते में खेतों और बागों से खूब फल सब्जियां, गन्ने निकाल कर खाना।
√ सभी गाँवों के किसानों को पता था कि यह बच्चे कालिज में पढ़ते हैं । खूब खातिर होती।
सभी मिल कर खुश होते। जिस गांब से निकलते उस गांब क़े बच्चे बजुर्ग खड़े हो कर देखते कि कालिज पढ़ने बाले बच्चे कैसे होते हैं । 1962 में तो हमारे शहर में भी ब 1 या 2 कालिज थे । जो कालिज जाता था, उसके लिए लोग बस में उठ कर सीट दे देते थे।
8. इसी तरह A और B BA पास कर गए।
बाकी Part II में पढें। कल पोस्ट करूँगा।

FACTS NOT,
ATTITUDE DETERMINES ALTITUDE.
It does not matter what you are today. You can use your today to take a flight in the tomorrow. It is the attitude that determines the level of success in future. Partial success and happiness is better than expensive failure. First, be honest with yourself and identify your aptitude and passion. Then turn that passion into profession and you will never feel tired. You will not think of quitting. Your mind will automatically find out the ways and means to reach to the top of the success. Success is improving your own performance and not comparing your performance against others. Comparison is hell and it eats up your positive energy. Your self resolution to succeed is more important than anything else i.e. money, help, guidance etc.