Real Education
* असली शिक्षा*
1.
सब्ज़ी की दुकान पर बैठी अधेड़ महिला अपनी सब्जियों को धो कर साफ करके रख रही है।
2
तभी एक बड़ी सी गाड़ी आ कर उस की फड़ी(अस्थाई दूकान) के आगे आ कर खड़ी हुई।
3
शीशा नीचे हुया और उसमें बैठी महिला ने अपनी बेटी से कहा: जा जा कर सामने से टमाटर ले कर आ और 100 का नोट थमा दिया।
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बेटी गई और बोली:
ओ बुढ़िया, एक किलो टमाटर दे।
सब्ज़ी बाली महिला ने एक किलो टमाटर तोल कर दे दिये।
लड़की ने 100 का नोट दिया, टमाटर लिये और जा कर कार में बैठ गई।
4
सब्ज़ी बाली महिला की बेटी कार के नज़दीक आई और 60 रुपये बापिस किये।
तो कार बाली महिला ने कहा:
रख ले।
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छोटी सी लड़की बोली:
नहीँ बीबीजी जो हमारे थे हमने रख लिये।
6
अब माँ ने देखा कि बेटी को कुछ समय लगा है, कुछ बातें हुई हैं, उसने अपनी बेटी से पूछा:
तुमने सम्मान से बात की, अपशब्द तो नहीँ बोले।
7
नहीँ मम्मी जी आप ने सिखाया है:
बड़ों का सम्मान करो , ऊँची आवाज में किसी से न बोलो, छोटों से प्यार करो, भाषा को अभद्र न बनायो। किसी की बुराई न करो। मैं हमेशा आपकी शिक्षा का ध्यान रखती हूं।
मैंने अब भी बैसा ही किया।
अच्छा अब मैं स्कूल जाती हूँ। स्कूल से बापिस सीधी जहां आ जाऊँगी और उसने अपना बस्ता उठाया और स्कूल चली गई।
8
यह सब कार बाली महिला सुन रही थी और मन ही मन अपने आप को कोस रही थी कि इस सब्ज़ी बाली ने अपनी बेटी को जीवन के बोलबानी और व्हबरिक संस्कार दे दिये पर मैं न दे पाई।
9
जब कार घर पहुंची तो इस महिला के चाल ढाल, ब्यवहार में शालीनता और नम्रता झलक रही थी ।
सभी(पति, सास ससुर, औऱ बाकी परिवार के सदस्य) हैरान थे। मन ही मन पश्चाताप चल रहा था।
जीवन में यह संस्कार 99.99% परिस्थियों में काम आते हैं।
पढ़ाई लिखाई केवल 0.01% केवल वर्क और colleague या कॉलेज के दोस्तों के साथ।
यह maturity से आते। matu rity उम्र और सीखने से आती है ।