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लघु कथा , बृहद शिक्षा
समुद्र के किनारे खड़ा एक व्यक्ति समुद्र से आने वाली लहरों को देख रहा था।
लहरों का पानी समुद्र के किनारे से बाहर आ जाता और यह व्यक्ति उसे अपनी मुठि में भर कर फिर समुन्दर में फेंक देता।
यह नज़ारा समुन्दर के किनारे सैर करने बाले हर रोज़ देखते।
लहरों का पानी समुद्र के किनारे से बाहर आ जाता और यह व्यक्ति उसे अपनी मुठि में भर कर फिर समुन्दर में फेंक देता।
यह नज़ारा समुन्दर के किनारे सैर करने बाले हर रोज़ देखते।
कुछ बड़बड़ाते : शायद यह दिमागी तौर पर ठीक नहीं है?
दूसरे कहते : यह पागल लगता है , घर के सदस्य इसे घर पर बरदाश्त नहीं करते इस लिए समुन्दर के किनारे पर आ कर लहरों को बापिस फेंकता रहता है।
इसी तरह के अंदाज़े बहुत से सैर करने बाले युवक और युवतियां लगाती। वहुत से बच्चे उस व्यक्ति को देखते और अपने माता पिता से तरह तरह के सवाल पूछते। माता पिता भी जो मन आता बह उत्तर दे देते।
इसी तरह से कई दिन बीत गए और सैर करने बाले भी मनगढ़न्त कहानियां अपने बच्चों को सुनाते रहे।
एक दिन एक उत्सुक युवक ने हौसला करके उस व्यक्ति से पूछा :
आप समुन्दर की लहरों को बापिस समुन्दर में क्यों फेकतें हैं ? बड़ा अज़ीब सा लगता है। क्या आप इस का उत्तर देंगे?
आप समुन्दर की लहरों को बापिस समुन्दर में क्यों फेकतें हैं ? बड़ा अज़ीब सा लगता है। क्या आप इस का उत्तर देंगे?
समुद्र के किनारे खड़ा व्यक्ति मुस्कराया और बोला :
आप और दूसरे सैर करने बाले व्यक्ति जो सोचते हैं वैसा कुछ भी नहीं है। बास्तव में मैं एक मुठी भरता हूँ और समुन्दर में फ़ेंक देंता हूँ। उस मुठी में चार पाँच घोंगे भी दोबारा समुन्दर में चले जाते हैं। इस तरह मैं इन घोंगों की जान बचा लेता हूँ। जो घोंगे समुन्दर की लहरों के साथ बहार आ जाते हैं और किनारे पर पड़े रहते हैं वह अपना जीवन खो देते हैं।
इस पर युवक ने कहा : इससे कोई अधिक अंतर तो नही पड़ता।
समुन्दर किनारे खड़े व्यक्ति ने उत्तर दिया : सभी ऐसा ही सोचते हैं और जो कर सकते हैं बह भी यही सोच कर नहीं करते ,
लेकिन यह जो संसार है एक समुन्दर की तरह है और हम सभी का जीवन उन इंसानों की दें है जो जब से संसार बना है ने छोटी छोटी कोशिशों की।
अधिकतर इंसान बड़ी बड़ी उप्लाब्दियों के इंतज़ार में जीवन विता देते हैं जबकि जीवन का सार तो छोटी छोटी उपलव्दी में होता है।
लेकिन यह जो संसार है एक समुन्दर की तरह है और हम सभी का जीवन उन इंसानों की दें है जो जब से संसार बना है ने छोटी छोटी कोशिशों की।
अधिकतर इंसान बड़ी बड़ी उप्लाब्दियों के इंतज़ार में जीवन विता देते हैं जबकि जीवन का सार तो छोटी छोटी उपलव्दी में होता है।
युवक इस उत्तर से बहुत प्रभाभित हुआ और उसे नमस्कार करके चला गया।
फिर कभी उसने उसे "पागल" की संज्ञा नहीं दी। जब भी गुजरता तो उसे मुस्कराहट दे कर गुजरता।
pic courtesy : www .youtube.com