समय अनमोल है।
एक गांव में एक आलसी व्यक्ति रहता था।
2
सभी गांव के वुद्वीमान व्यक्ति समय समय पर उसे
काम धंधा करने के लिए कहते।
परन्तु उस आलस्य भरे व्यक्ति पर कोई प्रभाव नहीं होता।
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उसकी पत्नी और मां यह देख बहुत दुखी थे।
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एक दिन उस गांव में संन्यासी महात्मा आए।
गांव की वहु वेटीयां भी महात्मा जी के दर्शन करने गईं।
जब इन महिलाओं को पता चला तो बात आलसी की मां और पत्नी तक पहुंची।
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दोनों ने आपस में विचार विमर्श किया और दुसरे दिन महात्मा से मिलने गईं।
6
महात्मा से इन सास बहु ने अपना दुख सुनाया ।
महात्मा जी ने सांतभावना दी
"मैं आपका दुःख समझ गया हूं।"
7
सास बहू घर वापिस आ गईं।
8
दुसरे दिन महात्मा जी उनके घर आए।
सभी घर पर ही थे।
महात्मा जी के लिए साफ़ सुथरा विछौना विछाया गया।
जब महात्मा जी वैठ चुके,
तो अपनी पोटली में से एक लिफाफा निकाला और
आलसी व्यक्ति को देते हुए कहा
: यह बीज हैं।
और यह अभिमंत्रित खुरपी है। इससे जो भी वोयोगे वह आम खुरपी से 5 गुणा अधिक पैदावार देगा।
परन्तु मैं यह खुरपी आपके पास 15 दिन के लिए है।"
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आलसी व्यक्ति खुशी से फूला नहीं समा रहा था।
10
दुसरे दिन सुबह आलसी की बीवी ने सोते हुए आलसी को कहा:
उठो और खेत में जाकर उस *जादूई खुरपी *से बीज वो दो ताकि हमारी गरीबी दूर हो, खाने पीने के लिए भरपेट खाना मिल सके।"
11
आलसी ने करवट ली और सोते हुए वोला:
तंग न करो,
अभी बहुत दिन हैं,
कल बीज दूंगा।"
इसी तरह से 15 दिन गुजर गए परन्तु आलसी ने कुछ नहीं वोया।
16
आज 16बें दिन महात्मा जी आ गए और अपनी "जादूई खुरपी" वापिस लोटाने
को कहा।
अब आलसी व्यक्ति महात्मा जी के आगे गिड़गिड़ाने लगा कि "खुरपी" कुछ और दिन के लिए दे दी जाए।
परन्तु महात्मा जी न माने।
अब पछताने से क्या लाभ ।
समय रहते कुछ किया नहीं।
महात्मा जी अपनी "जादूई खुरपी " ले गए।
और
आलसी पछताता रहा।
शिक्षा:
समय संसार की सबसे वहुमुल्य वस्तु है जिसे दुनिया की कोई धन दौलत खरीद नहीं सकती।
अवसर केवल
सतर्क,
सजग,
जागने वाले व्यक्तियों के लिए होते हैं
न कि आलसी नींद के लोभी के लिए।
हमारे पास भी वच्चे आते हैं।
कालिज में अडमिशन
या वैंक में नौकरी का
पोर्टल एक महीना खुला रहता है,
जैसे ही 30 दिन पूरे होते हैं,
पोर्टल वंद,
वच्चे आएंगे और पूछें गे
"सर क्या मैं किसी तरह इस नौकरी या कोर्स के लिए एप्लिकेशन दे सकता हूं?
हमारा जबाव :
नहीं,
अब अगले साल।
वच्चे निराश हो वापिस चले जाते हैं।
इनसे पूछे कि पोर्टल के खुलते ही पहले 10-15 दिन में एप्लीकेशन क्यों नही भरते ।
एप्लीकेशन पोर्टल खुलते ही 3-4 वार पढ कर , सभी डाकूमैटस लोड करके भरें। मन की शांति वनी रहेगी और पोर्टल को 3 -4 वार पढ़े,
तब एप्लीकेशन भरें और दोवारा एप्लीकेशन को ताकि कोई गलती हो तो उसे ठीक कर सकें।
इससे सफलता के चांस वडते है।
शिक्षा और नौकरी जीवन के लिएअति आवश्यक है।
नहीं तो आलसी व्यक्ति की तरह आखरी तारीख का इंतजार करते रहते रहोगे।
वाकि आप जानो।
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ऐसा न हो:
अब पछताए क्या होत है
जब चिड़िया चुग गई खेत।
्न्र्न््न्र्न््न्र्न््न्र्न्
सोच समझ से सजग रह कर जीवन जिएं।