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सोमवार, 9 जून 2014

LIVE LIFE KING SIZE

राजा जैसा जीवन कैसे जिएं ?

हम सभी थोड़ी सी कोशिश करें तो अपने मन पसंद का जीवन जी सकते है। जिसमे हँसी हो ख़ुशी हो। प्रयतन करें सभ कुछ संभव है।  पर्यटन लगातार करें कियूंकि जीवन हमारा है जीना हमें है। 

जीवन में से दिमागी परेशानी से बचने के लिए :

1 लालच पर लगाम लगाएं': मन की आँखों (आँखें बंद करके ) सोचें कि जितना संघर्ष कर रहा हूँ उतना में जीवन में भोग भी लूँगा या छोड़ कर चला जायूँगा।  दूसरे कहीं इकठा करते करते ही जीवन लीला समापत न हो जाये और जो पाया है उसे भोग ही न सकूँ।  इसका ज्ञान होते ही इंसान के आतम चक्षु उसे ज्ञान बान की तरह व्यव्हार करने के लिए सतर्क कर देते हैं।  कर्म करना धर्म है परन्तु धर्म से कर्म न करना पैशाचिक है।  इससे मनुष्य स्वयं से ही अप्रसन रहता है और अपने साथ रहने बाले सभी सदस्यों व् दोस्तों को ही अपनी अप्रसन्त्ता का कारण समझ कर अपने स्वर्ग जैसे जीवन को नरक की तरह जीता है।

2. इच्छाओं के गुलाम नहीं मालिक बने :  मन इच्छाओं का भंड़ार है एक की पूर्ति करो तो दूसरी मुंह खोले आगे खड़ी हो जाती है। इनको लिख कर देखिये।  केवल दिमाग से सोचने से यह पहाड़ लगने लगती है।  परन्तु लिखने से आप देखेंगे की यह उतनी गंभीर नहीं थीं जितना तनाब बना हुआ था।  दूसरों को न बताएं।  जरूरते व् इच्छाएं आपकी है स्व इनका हल ढूंढे।  अब इन इच्छाओं की पूर्ति के लिए एक समयबद्ध प्रोग्राम बनायें।  कौन सी इच्छा पहले पूरी करनी है कौन सी 2 नंबर और कौन सी तीन नंबर पर।  और इसी पर्कार सभी को क्रम प्रधान करें। एक से दो साल का प्रोग्रामबनायें।  सभी इच्छाएं एक ही बार में पूरी नही की जा सकती।  यह तो बैसा है जैसा किसी धर्मस्थल पर सभी श्र्धालू लाइन न बनाकर एक ही समय में दर्शन करना चाहते हों।  इस लिए अपनी इच्छाओं की सूची (लिस्ट ) बनायें।  उसके उपरांत उनकी पूर्ति के लिए प्रोग्राम।  एक लड़की ने अपनी लिस्ट मे15 साल की आयु में 140 कार्य करने की लिस्ट बनाई और 47 साल की उम्र में यह लिस्ट समापत हो गई।  इस लिए उसे फिर से अपने भविष्यके लिए कार्यों की लिस्ट बनानी पड़ी।  अधिकतर मनुष्य कार्यों की  लिस्ट नहीं बनाते बल्कि लिस्ट को अपने मस्तिष्क में ही बनाये रखते हैं।  यही उनके तनाब का , रुग्णता का कारण बन जाता है। डॉक्टर के सलाह पर पता चलता है कोई रोग नहीं है परन्तु मन रोगमुक्त होता नहीं।  शरीर की आरोग्ता के लिए मन का आरोग्य होना अति आवश्यक है।                प्रयोग में लाएं।  लाभ पाएं।



 

रविवार, 10 जून 2012

Desire


Always ask God to give 

what you Deserve 


and not what you desire. 

It’s because your desires may be few, 

but trust me you Deserve  a Lot.

गुरुवार, 27 नवंबर 2008

MOULD OF MIND

“Clay allows itself to be molded into any forms.
But baked clay is of no use for this purpose.
Mind burnt by profane desires
is incapable of taking divine moulds."