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बुधवार, 23 दिसंबर 2020

घर बैठे बैंक पेपर की पढ़ाई करेँ

Quick Time 

Leveraging Secret

समय बचाने और बड़ाने का रहस्य


जब भी पढें तो हाथ में पेंसिल ले कर पढें।


पढ़ते जायें, इम्पोर्टेन्ट पॉइन्ट पेंसिल से अंडरलाइन करते जाएं।


इस तरह से अंडरलाइन किये हुए पॉइंट आप को बता देंगे कि यह चैप्टर या पेज पढ़ा हुआ है। और आप एक ही चैप्टर को बार बार नहीँ पढेंगे।


बहि समय दुसरे चैप्टर या पेज पढ़ने में बिताएंगे।


इस तरह समय बचता भी है और बढ़ता भी है।



 

घर बैठे बैंक पेपर की तैयारी करें

 Motivation-

Attitude Determines Altitude

प्रेरणा स्त्रोत

सोच ,
लक्ष्य 
और 
 सफलता 


1
लक्ष्य प्रारप्ति में सफलता
और सोच 
का  रोल बहुत ही महत्व पूर्ण है।

सकारत्मक सही दिशा की सोच सफलता देती है।

 नकारत्मक सोच दुःखों और मानसिक बीमारियों की जड़ है।

सकारत्मक सुखों का संसार।


2
यथार्थ जैसा है सभी के लिए  बैसा ही है। कुछ इसी यथार्थ का सद्पयोग करके सफल और सुखी बन जाते हैं। और दूसरे संघर्ष शील जीवन जीते रहते हैं।

अपने आप का विश्लेष्ण कर सोच बदली जा सकती है।

3

 रबैया बदलने से सफलता उसी यथार्थ से मिल जाती है।

4
कैसे?

एक धर्म स्थल के निर्माण में 3 मजदूर लगे हैं।

तीनों को एक ही पगार/मजदूरी मिलती है।

5
एक यूनिवर्सिटी के सोशल रिसर्चर ने 

5.1
पहले मजदूर से पूछा: 
काम कैसा लगता है?

मजदूर ने उत्तर दिया:

 मेडम जी मजबूरी है।
 काम नही करूँगा तो बचों को खाना कहाँ से ख़िलायउँगा?

रिसर्चर ने अपनी नोट बुक में लिख लिया।

5.2 
दूसरे मजदूर से पूछा:
काम कैसा लगता है?

मजदूर ने उत्तर दिया।

बहुत अच्छा।

 कम से कम मेरे पास काम है।
बहुत से लोग तो बिना काम के हैं।

मैं पूरा दिन परिश्रम करता हूँ।
स्वभिमान बढ़ता है कि मैं भिखारी नहीँ हूँ।

इस उत्तर को भी रिसर्चर ने नोट बुक में लिख लिया।

जो आप बोलते हैं, ब्रह्ण्ड बहि देता है।
 अंतर्मन सुनता होता है। 

इसलिए सकारत्मक उर्जाशील ही बोलें।

दुख,  कमियां ,मजबूरियां गिनयोगे तो यथार्थ में यही मिलेंगे।

5.3
अब रिसर्चर तीसरे मजदूर के पास पहुंची।

यह मिस्री (mason) था। 


बह हर इंट को अपने गमछे से साफ करता, 
आँखें बंद कर कुछ बुदबुदाता और ईट
को मंदिर निर्माण में लगा देता।

रिसर्चर यह सब देख रही थी और फिर बहि प्रश्न पूछा जो पहले दो मजदूरों को पूछ चुकी थी।

आपको काम कैसा लगता है?

मैडम जी यह काम नहीं मेरी पूजा है, मेरी श्रद्धा है।

मेरा सौभाग्य   है कि मूझे धर्म स्थल बनाने के लिए धर्म स्थल बनाने बाले ने चुना।

रिसर्चर सुन कर धंग रह गई।
 यह उत्तर भी उसने अपनी नोट बुक में लिख लिया ।

सारे उत्तर रिसर्चर ने यूनिवर्सिटी को दे दिए और यूनिवर्सिटी ने अपने* डेटा बैंक* में डेट डाल कर रिकॉर्ड कर लिए।

6
अब 11** बर्ष बाद यूनिवर्सिटी ने अपने रिसर्चर को यही डाटा दे कर उन तीनों मजदूरों से मिलने भेजा ताकि बह जान सके कि सोच का जीवन में क्या अंतर(effect इफ़ेक्ट) पड़ता() है।

7
रिसर्चर पहले मजदूर के घर पहुंची।

 मजदूर बीमार था।
 काठ पर लेटा था।
 खांस रहा था।।

पत्नी ने बताया 
" महीने में 20 दिन ही काम पर जा पाते हैं।

उम्र बढ़ने के कारण काम भी कम मिलता है क्योंकि जवान लोगों को काम मिलता है। 

जो कमाते हैं वह बीमारी पर लग जाता है।

खाने के हमेशा लाले पढ़े रहते हैं।"

रिसर्चर ने सब कुछ नोट कर लिया।

8
अब रिसर्चर दूसरे मजदूर के घर पहुँची।
 बह अपने घर नहीँ था 

घर बालों ने बताया आफिस में है।
रिसर्चर आफिस पहुंची।

रिसेप्शनिस्ट ने कहा: 
इंतजार करेँ।

रिसर्चर सांमने लगे सोफे पर बैठ गईं।

कुछ समय के बाद रिसेप्शनिस्ट ने रिसर्चर को अंदर जाने के लिए इशारा किया।

अन्दर का नजारा देख रिसर्चर खुश भी हुई 
और हैरान भी।

9
बहुत ही भव्य आफिस।

बड़ा टेबल। 
शाही कुर्सी।
और उस पर टाई कोट लगाए 
एक जेंटलमैन बैठा 
कुछ वर्कर को गाइड 
कर रहा था।

10
उस जेंटलमैन ने सभी बर्कर को गाइड करके भेज दिया और रिसर्चर को फ्रंट सीट पर आ कर बैठने को कहा।

रिसर्चर को परिचय देने को कहा।
परिचय जानने के बाद रिसर्चर का स्वागत किया।

11
रिसर्चर ने 11 बर्ष की जीवन यात्रा के बारे में पूछा।

"जब मैं 11 बर्ष पहले आप से मिली थी तब तो  आप के सिर पर ईंटे रखी थी। 
और आप पूजा स्थल पर भवन निर्माण  को ले जा रहे थे।

इतना बदलाब कैसे?"

यह दूसरा साबका मजदूर हँसा और बोला:
"
*बह और मैं *            जब काम करते हैं तो सफ़लता मिलती ही मिलती है।"

"बह कौन?"
 रिसर्चर ने पूछा।

"जिसने मुझे बनाया है और जिसमें मेरी पूरी आस्था है।
सुबह उसको याद कर परिश्रम- 

शारीरिक ब मानसिक -
 करना शुरू कर देता हूँ। 

*बह *हमेशा मेरे साथ रहता है।
और मैं सफलता की सीढ़ियां चड़ता जाता हूँ। 
सभी मुझे सफलता का श्रेय देते हैं। 

परन्तु मैं अपनी सफलता का श्रेय 
"उसको" 
मानता हूँ।

उसको न मानने से मेरे में नम्रता कम होती जाती है अहँकार और मन के बंधन बड़ते जाते हैं।

 "बह" की भावना  मुझे - sense of possession and frugal pride- से बचाती है।

* मैं,
 मेरा,,
 तेरा 
की बजाए
 हम, हमारा" 

की भावना को बढ़ावा मिलता है।

हां तो 11 बर्ष की जीवन यात्रा।

जब आप मिली थी मैं मजदूरी करता था। 
10बी पढ़ा था। 

मजदूरी से कुछ पैसे इकठ्ठे किये और ईवनिंग कालिज जॉइन कर लिया। 

सारा दिन काम और शाम को कालिज में पढ़ना।
पहले मजदूर होने की शर्म आती थी।

परन्तु सभी बातें करते हैं।

 फीस कोई नहीँ देता।
इसलिए मैंने अपने काम यानी मजदूरी से प्यार करना शुरू किया।

पैसे मिलते थे। 
मैं BA कर गया।
फिर MA कर लिया।

गरीबी पढाई में रूकावट थी।

झूठी शान- 
मेरी ईज़्ज़त, 
मेरी बेइज्जत, 
लोग क्या कहेंगे की भावनायों पर काबू बड़ी कठिनाई से किया। 

और सफलता आसान हो गई । 

मैं अपने पर और अपने काम पर फोकस करता हूँ।

 दूसरे क्या सोचते हैं, 
कैसे सोचते हैं 
मैं सोचता ही नहीँ हूँ।

मैंने देखा पहले मैं लोगों को बताता हूँ फिर लोग बेबजह उसमें नुकताचीनी करते हैं और मैं हताश और दुखी हो जाता हूँ

अब मैं बोलता नहीँ, 
बताता नहीँ, 
केवल करता हूँ। 

और सफल हो रहा हूँ। 
केवल करने और चुप रहने से बहुत तरक्की होती है।


B

क्योंकि मुझे मजदूरी करते भवन निर्माण का अनुभव था एक ^रियल एस्टेट^  कंपनी में नौकरीमिल गई। 

पढाई और नौकरी दोनों साथ साथ।

C

कुछ बर्षों बाद मैंने अपना काम शुरू कर लिया और ^रियल एस्टेट मैनेजमेंट^  में कॉरेस्पोंडेंस कोर्स(पत्राचार) के द्वारा डिप्लोमा किया।

अब अपना काम अपना आफिस है।

तब तक चाय आ चुकी थी। 

रिसर्चर ने चाय पी और धन्यबाद किया।

यह सब रिसर्चर ने अपनी नोट बुक पर लिख लिया।

खुश थी रिसर्चर कि एक मजदूरी करने बाले ने अपनी सोच के *बल* पर कितना बड़ा एम्पायर खड़ा कर लिया है।

 11 साल पहले ही सोच सकारत्मक थी।।
यह उसी का नतीजा है।

11
अब रिसर्चर ने इस दूसरे मजदूर से पूछ कर तीसरे बर्कर के घर का रुख किया।

उसके घर पहुंची तो देखा बहुत सुंदर घर है। 

बेटी बाहर निकली और बड़े सलीके से रिसर्चर को घर के मेहमान- घर मे बिठाया। 

बड़े अदब से ट्रे में रख कर शुद्ध जल परोसा।

बेटी ने बड़े अदब से अपनी मम्मी को बुलाया।
जब मम्मी आई, 
उसने बताया: 

साहिब तो अपनी इंस्टीट्यूट में बच्चों को पढ़ाने गए हैं।

बेटी तब तक चाय लेकर आ चुकी थी। 
उसकी मम्मी औऱ रिसर्चर ने चाय की चुस्कियां ली।

रिसर्चर ने धन्यवाद किया और इंस्टिट्यूट में तीसरे वर्कर से मिलने चल पड़ी।

12
जब इंस्टिट्यूट पर पहुंची तो गेट पर अपनी पहचान दी।
 पहचान रजिस्टर में आने का समय नोट किया।

देख कर धंग रह गई
 यह एक बहुत बड़ी इमारत थी ।

खुले खुले
 खेल के मैदान । 
यह कालिज नुमा थी।

रिसर्चर ने सोचा कि 11 बर्ष पहले बाला बर्कर जहाँ नौकरी कर रहा होगा।

13
पूछते, पूछते यह एक भव्य आफिस के बाहर थी। जिसके बाहर एक पियोन बैठा था।

रिसर्चर ने अपना विजिटिंग कार्ड पियोन को दिया। पियोन ने यह कार्ड अपने साहिब को दिया।

साहिब ने तुरंत रिसर्चर को आफिस में बुला लिया।
आफिस देख रिसर्चर अचंबित थी।

14
कुर्सी पर बैठे आदमी ने रिसर्चर से पूछा: 
क्या पियेंगी।

रिसर्चर बोली:
 नींबू पानी।

तभी कुर्सी पर बैठे ऑफिसर ने पियोन को दो गिलास नींबू पानी लाने को कहा।

पियोन ले आया।

दोनो नींबू पानी सिप कर रहे थे और जीवन यात्रा पर अपने अनुभव शेयर कर रहे थे।

15

"जरा 11 बर्ष की जीवन यात्रा पर रोशनी डालें"
रिसर्चर ने कहा।

"जरूर जी"

जब आप पहले मिली थी। 
तब मैंने इंजीनियरिंग (B.E/B.Tech) की डिग्री की हुई थी।

पर *सरकारी नौकरी* मिल नहीँ रही थी। मैंने सोचा सरकारी नौकरी का इं त जार करने की बजाए क्यों न अपना काम करूँ।

आज आफिस है और मैं आत्मनिर्भर हूँ। 
नौकरी लेने के सुपने की बजाए नौकरी देता हूँ।

कमाई करता हूँ।
 नेशन पर बोझ नहीँ। 
कमाई करके टैक्स देता हूँ।

 हमारे एक प्रोफेसर कहा करते थे: 
परिवार औऱ देश पर बोझ न बनना।

स्वरोजगार करो। 
दुसरों को रोजगार दो।

काम काम होता है।
।काम को प्यार करोगे जीवन हमेशा सुखी रहेगा।

 आज छोटा करोगे। 
अनुभव होगा। 

उस अनुभव से आगे बड़ जायोगे। 
नहीँ तो डिग्रियां गिनते ही दुःखी रहोगे।

डिग्रियां केवल जहाँ जरूरत है बहां बतायो और दिखायो।

 डिग्रियां का बखान करके बेबजह अहंकार को या दूसरों को रौब दिखाने के लिए प्रयोग न करो।

इनसे प्राप्त ज्ञान अपने काम मे लगायो, 
दूसरे केवल बातें करने बाले, लिफाफे बाजों से बहुत आगे निकल जायोगे

काम कोई छोटा
 या बड़ा नहीँ होता। 

हमेशा छत पर जाने बाली सीढ़ियों के बारे में सोचो।

पहली , दुसरीं ..........
सीड़ी से चढ़ कर ही छत पर पहुंचा जा सकता है।
 एक दम छलांग लगा कर नहीँ।

केवल यही बड़ी  सोच
 आज मुझे जहाँ पर "चेयरमैन " की कुर्सी पर बैठाए है।

मैंने पार्ट टाइम M Tech किया PGDBM किया आज चेयरमैन हूँ  ।

अपने आप पर फ़ोकस करो।

Listen to everyone but never deviate to do what you are doing.

Nobody knows everything;
But everybody knows something.

Listen well to gain from that something.
Never compare with others. Neither copy.

Be original.

रिसर्चर देख रही थी कि 11 साल पहला मेसन जो आज  *चेयर मैन * है जब यह बता रहा था
 तो उसकी आँखों में 
खुशी,
 संतुष्टि और बिजेता
 होने की चमक झलक रही थी।

16

इन 11 सालों में की स्टडी का विश्लेषण रिसर्चर ने यूँ किया।
16.1

 जो परिश्रम और जीवन को नकारत्मक नजीरिये से देखते हैं वह असफलता और दुःखी जीवन को आमंत्रित करते हैं। (उदाहरण पहला मजदूर)

16.2
जो परिश्रम और जीवन को सकारत्मक व उज्जवल नजीरिये से देखते हैं बह मन चाहा जीवन जीते हैं।
(उदाहरण दूसरा मजदूर)

16.3
जो परिश्रम लग्न और मगन कर नम्रता से करते हैं, जीवन में उन्नति ही उन्नति करते हैं। 
(उदाहरण तीसरे मजदूर की सोच, लग्न और दिखाबे रहित मेहनत)
*
Work in silence
Let the results speak aloud.
@
Your World will know and appreciate it.

#
Surround yourself with positive, vibrant winning thinkers and achieve victories.

$
Never boast of victories. But do celebrate victories.

%
Verbal etiquettes bring laurels in life.

सोच संसार बनाती है,
 इसे बड़ा बनाएंगे
तो बड़ा पाएंगे।

बड़ा बनाने के लिए उच्च जीवन का साहित्य पढें।

Attitude determines altitude.

तुम्हारी सोच तुम्हारे जीवन की ऊँचाई बताती है।

Setbacks when emcourage to re-attempt and succeed, legends are born.

कोशिश करने पर ठोकरें और झटके तो सम्भब हैं, अवश्यम्भावी है। जो इन कठिनाईयों और झटकों को ठेंगा दिखा गया बह जीवन में सफलता और सुख पा गया।

Strong minded, strong willed never QUIT.


जो सोचो गे, बहि पयोगे।

अपने आप से बड़ी बाते करेँ।
 अपने गुणों पर फोकस करे।

सोने से पहले आईने में देखें।
 सोचें आज क्या सीखा।

थैंक यू गॉड,
थैंक यू गॉड
थैंक यू गॉड

दिन भर क्या अच्छा किया क्या गलत किया सोचें।
कह कर आगे गलत न करें की शपथ लें।
जिसने आपके साथ गलत किया है उसे माफ कर दें। आपकी स्वयं की जीवन ऊर्जा बड़ जाएगी।

नींद अच्छी आएगी। सुबह तरोताजा होंगे।

धन्यबाद।

Never Never Give Up

प्रयत्न बिलम्ब कर दें परन्तु क़भी न छोड़ें।