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Super Success.
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शिक्षा और संस्कार जीवन के मूल मंत्र है ।
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सोच,
बिचार,
संस्कार,
व्यबहार
इंसान की जिंदगी को स्वर्ग बना देते हैं
और
सोच,
विचार,
संस्कार,
स्व व्यबहार इंसान की जिंदगी को बर्बाद कर नर्क भी बना सकते हैं ्।
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यह इस पर निर्भर करता है कि आप का
अपने* लक्ष्य* के प्रति आस्था,
जागरूकता,
जोश,
चिन्तन व रवैया क्या है ???
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कैसे?
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एक पिता के ,3 पुत्र थे।
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उसने अपने तीनों बेटों को बी काम (B Com)
तक पढ़ाई लिखाई करवाई। और नौकरी पर लगाया या लगवाया।
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बह तीनों एक ही कंपनी में काम करते थे।
मान लो
पहले बेटे की पगार। 1 x
दूसरे बेटे की पगार। 3 x
तीसरे बेटे की पगार। 10 x
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पिताजी दूसरे देश में काम करते थे,
उन्हें बहुत हैरानी होती थी कि तीनों बेटों की पढ़ाई लिखाई जब एक है तो उनकी तनख्वाह (पगार) में इतना अंतर क्यों है?
यह प्रश्न दिन रात उनके मन में चलता रहता।
पहले की 1 गुणा
दूसरे की 3 गुणा
तीसरे की 10 गुणा
क्यों भाई,
क्यों?
यही सोच सोच कर वह परेशान रहते।
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अंततः
एक दिन पिताजी ने कंपनी के C.E.O को फ़ोन कर पूछ ही लिया।
" साहिब जब मेरे बेटों की डिग्री एक है B.Com तो उनकी तनख्वाह में इतना फर्क क्यों है?"
सीईओ ने बड़ी नम्रता से पिताजी के प्रश्न का उत्तर दिया
" श्री मान पापाजी जब आप भारत बापिस लोट कर आयेंगे तो एक दिन हमारे पास आइए और आप को अपने आप सब मालूम पड़ जायेगा।"
पिताजी ने उत्तर दिया:
ठीक मैं जरुर आऊंगा जी।
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अब पिताजी की उत्सुकता और बढ़ गई।
उन्होंने छुट्टी के लिए प्रार्थना पत्र दिया।
एक महीने बाद की छुट्टी सैंक्शन (मिल) हो गई।
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एक महीने बाद पिताजी एरोप्लेन से भारत लौटे।
आकर सीधे सीईओ को फोन किया । रात होटल मे रहे ताकी क्् बेटों को पता न हो।
सीइओ ने कहा कल सुबह आप मेरे आफिस में आ जायें जी।
आप को सब प्रश्नों के उत्तर स्वयं मिल जायेंगे।
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दुसरे दिन सुबह पिताजी सीईओ के आफिस पहुंचे।
सीईओ ने उन्हें अपने आफिस के साथ बने *पर्सनल रूम* में बैठा दिया जहां पर टी ब््््् और सी सी टी वी लगा था और आफिस में होने वाली सभी वार्ता लाप सुन रहा था।।।
पिताजी वहां जाकर बैठ गये। तभी आफिस बॉय गर्मागर्म चाय व नाश्ता लेकर आया।
पिताजी जब चाय पी रहे थे तो सीईओ ने स्पीकर पर फोन लगाकर पहले बेटे जिसकी तनख्वाह एक गुणा थी को कहा:
मिस्टर ---------
आज डाक पर शिप लगा है। जिसमें हमारे काम की बहुत चीजें हैं।
जाओ देखो।
ताकि जो हो हम ले आयें।
जबाव मिला:
सर मैंने पता कर लिया है
हमारे काम की कोई चीज नहीं है।
और फोन वंद कर दिया।
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यही प्रश्न दूसरे बेटे से पूछा:
उत्तर मिला:
सर मैं डाक पर गया था।
एजैंट से पूछा।
उसने बताया कि कुछ सामान आपके काम का है,
लेजाना।
इसकी तन्खाह तीन गुणा थी।
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तभी सीईओ के आफिस में तीसरा बेटा आया और बोला: सर :
आज डाक पर शिप आया था। उसमें बहुत सा सामान हमारे काम का था, मैंने ट्रक में भरवाया और ले आया।
अब सामान गोडाउन में उतर रहा है।
यह उसका बिल व पेपर हैं।
सीईओ ने कहा:
गुड, बैठो।
चाय पिओ।
इस बेटे ज्् की तन्खवाह 10 गुणा थी ््््
उसी समय पिताजी साथ बाले कमरे से निकल कर आये।।
पिताजी को देख बेटा हैरान रह गया।
तभी सीईओ कुछ कहने लगे।
पिताजी ने उससे पहले उत्तर दिया
"मेरे सब सबालों का जबाव मिल गया है"
काम के प्रति आपका रवैया क्या है ,
यहि तनख़ाह, तरक्की
व जीवन में सफलता निर्धारित करता है।
रवैया इंसान खुद बनाता।
आलस्य छोड़, परिश्रम अपनाएं और सुखद भविष्य पाएं।
सीख:
काम दो कारणों से किया जाता है
1 एक पैसे के लिए
2 दूसरा शौक लग्न के लिए।
पहला वंधन है, दूसरा आजादी।
कंपनी से प्यार न करो, काम को करो, कामयाब हो जाओगे। कंपनी तो वदल लोगे, काम में काबिलियत होगी कंपनीज व पैसा पीछे होगा।
धन्यवाद पढ़ने और सीखने के लिए।