अभिप्रेरणा
Self Motivation
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English(इंग्लिश) बोलना/लिखना उतना ही आसान है जितना एक Cycle(साईकल) चलाना।
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साईकल कैसे चलता है?
● स्टेज 1:
छोटा बच्चे को माता पिता, मामा मामी, चाचा चाची या कोई रिश्तेदार छोटा साईकल ले कर गिफ्ट दे देते हैं।
बच्चा बहुत खुश होता है, उसके आँखों मे खुशी की चमक देखने लाइक होती है।
क्या इंग्लिश लिखने या बोलने के लिये आप में बह ललक या खुशी है😢सोचें और ललक पैदा करेँ।
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जनून (ललक) में ही सफलता का सकून है।
● स्टेज 2:
अब बच्चा अपने साईकल को लेकर टेड़ी मेड़ी जगहों पर चलाता है।
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गिरता है, रगडें और चोटें लगती। कोई नुक्ता चीनी निकालता है। कोई डाँटता है।
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घर के बड़े साईकल चलाने के लिये मना करते हैं।
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परन्तु बच्चा पूरी लगन और जोश से साईकल चलाता रहता है।
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रात सोय हुए भी साईकल के सपने लेता है।
अन्त सफल हो जाता है।
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बड़े कहते हैं कि जब बड़े हो जायोगे साईकल चला लेना।
परन्तु बच्चा बडों से चोरी चोरी साईकल घर से निकाल कर चलाना शुरू कर देता है।
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गिरता है संभलता है औऱ अंत गिर गिर कर साईकल चलाना सीख जाता है।
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मान लें बच्चा 3 साल की उम्र में साईकल चलाना सीखता है। छोटे साईकल से बड़े पर आ जाता है।
फिर सारी उम्र स्कूटर/कार आदि चलाता है।
?
परन्तु कभी 80 साल की उम्र में उसे साईकल चलाना पड़ जाता है।
क्या बह चला सकता है?
जी हाँ। जरूर चला सकता है।
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कोई भी सीखी हुई कला कभी न कभी काम आ जाती है।
कभी भूलती नहीँ।
थोड़ी कोशिश से याद आ जाती है।
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इंग्लिश भी ऐसे ही है। जो आज कठिन लग रही है, कल आसान लगे गी।
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प्रोफेसर साहिब ने 40 साल पहले इंग्लिश सीखने के लिये जनून से अँग्रेज़ी पड़ना शुरू किया।
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उस समय 24 घण्टे अँग्रेज़ी ही अंग्रेज़ी दिमाग में घूमती थी।
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सारा समय शब्दोँ के अर्थ डिक्शनरियों में ढूंढने में लग जाता था।
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परन्तु आज अखबार आती है। 5 मिन्ट लगते हैं । हेड लाइन और न्यूज़ स्कैन करके सब पता लग जाता है।
लगन से पढ़ो।
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जानें।
साईकल तब तक चलता है जब तक पैडल मारते रहो।
इसी तरह अँग्रेज़ी प्रैक्टिस चाहती है।