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सोमवार, 15 फ़रवरी 2016

Farmer and His Diamond






                                                             किचन या बाथरूम 
Source :    






किसान और उसका हीरा

एक गांब में एक मेहनती किसान रहता था। बचपन में उस किसान ने धार्मिक ग्रंथों में पड़ा था कि यदि पुरे मन व लग्न से   प्राथना की जाये तो भगवन  मन की मुराद पूरी कर  देते हैं।  

किसान बड़ा उदमी ब प्रयोगत्मक स्वभाव का था।  एक दिन उसके मन में आया क्यों न शब्दों व् सचाई को जाना जाये। 

 हसीं मजाक के लिए उसने  अपनी किचन पर बाथरूम का बोर्ड लगा  दिया।

 सभी दोस्त  उस के घर आ कर उससे पूछने लगे कि यह किचन है या बाथरूम ? हम बाथरूम में बनी चाय नहीं पिएंगे।  


किसान  बुद्धिमान था बुद्धिमान लोगों  के दोस्त भी उनसे अधिक बुद्धिमान ही हो सकते हैं। जैसे शेर की दोस्त केवल शेरनी ही हो सकती है कोई गीदडी नहीं।

उस किसान ने अपने दोस्तों से कहा :

मेरे प्यारे दोस्तो   नाराज़ न होइए चाय किचन में ही बनेगी , बाथरूम में नहीं।  

किचन पर बाथरूम का बोर्ड तो केवल चूहों को धोखा देने के लिए लगाया है ता के बो पढ़े सच में तो ये किचन ही है,,  

यदि पटिआला को जाने बाली बस पर अमृतसर का बोर्ड लगा हो तो मुर्ख उसे अमृतसर को जाने बाली बस समझेंगे परन्तु ड्राइवर और कंडक्टर को तो पता है कि बस  पटिआला जायेगी,  अमृतसर  की टिकट नहीं काटेंगे। 

सभी दोस्त उस सीधे साधे परन्तु बुद्धिमान दोस्त की बातों से उभरी सच्चाई पर बहुत हँसे, दोस्त बुद्धिमान था /समाज नहीं , समाज से बचने  के लिए शब्द बदले, शब्द बदलने से किचन बाथरूम नहीं बन गई , बस पटिआला की जगह अमृतसर नहीं चली गई : सबक : शब्द बदलने से रिश्ते नहीं बदलते ,

इस घटना को हुए कुछ ही  दिन हुए तो एक सन्यासी उस किसान के घर पर भिक्षा लेने के लिए आया/, किसान ने उस स्वामी की बहुत आओ भगत की/ , स्वामीजी ने आशिर्बाद दिया : भगवान तुम्हें हीरे जवाहारात दे/, 

किसान ने बड़ी  उत्सुकता से पूछा :         स्वामीजी मैं तो किसान हूँ पूरा दिन खेतों में काम करता हूँ /     तो मुझे हीरा कैसे मिल सकता है /                  स्वामीजी ने उत्तर दिया : तुम केवल भगवान का सिमरन किया करो।  भगवान सब कुछ कर सकता है। जो हीरा तुम्हारी किस्मत में  है बह किसी और को नहीं मिल सकता।  तुम भगवान पर बिश्वास करके  पूजा किया करो/ , बस फिर क्या था                  किसान ने स्वामी के चरण स्पर्श किये और स्वामीजी चले गए  और किसान हर सुबह दोपहर शाम पाठ पूजा करता / मन में एक ही प्रार्थना कि हीरा मिल जाये /

किसान 30 -40 साल भगवान का पाठ करता रहा/, जब भी कोई हीरा ढूंढ के लाता तो बह पत्थर निकलता , किसान को बहुत दुःख होता /, आहिस्ता आहिस्ता किसान ने हीरा ढूंढ़ना बंद कर दिया  और मायूस रहने लगा /हीरा मिलने की सभी आशाएं भी छोड़ दी ,  

बहुत साल मायूस रहने के बाद जब बह अपने खेत में हल चला रहा तो उसमे उसने  एक चमकता हुआ पत्थर देखा/, बह उस पत्थर को उठा लाया और उसी तरह से प्यार करने लगा जैसे किसी हीरे को /,  

साल बीतते गए,  एक दिन फिर उसी  सन्यासी ने अलख जगाई।  

 किसान एक दम उसकी आवाज पहचान गया , ख़ुशी से बह बाहर आया और स्वामीजी को प्रणाम किया , 

उन्हें  अन्दर आने का आग्रह किया/

स्वामीजी जब अन्दर आ कर चटाई पर बैठे तो उन्होंने किसान से पूछा

 : क्या हीरा मिला ?

 किसान ने मायूस मन से  कहा

 : नहीं मिलाजी  मैंने बढ़ी कोशिश की परन्तु पत्थर ही मिले,     अब तो मैंने कोशिश ही छोड़ दी है। 

स्वामीजी का मन दुखी हो गया।  स्वामीजी ने घर में इधर उधर नज़र दौड़ाई और देखा की सामने रखा कुछ चमक रहा है। 

 उन्होंने किसान से पूछा : बह क्या है ? 

बह बोला:         साथ बाले खेत में चमकता पत्थर मिला मैं इसे उठा कर ले आया। 

 लायो , इसे इधर लायो , देखूँ : स्वामीजी बोले 

किसान चमकते पत्थर को उनके पास लेकर आया।  

स्वामीजी हैरान रह गए और बोले :

 भलेमानस यह हीरा है/ पत्थर नहीं / यह तुम्हारा जीवन सम्बार देगा , संभाल कर  रखना दुनिया की नज़रों से दूर /     

 किसान बहुत खुश था मन ही मन भगवान का धन्यबाद कर रहा था और सोच रहा था कि सही है : भगवान पर विश्वास करने व  भरोसा रखने  से सब कुछ मिलता है चाहे पल भर के लिए सही / 

किसान सोच रहा था : प्रार्थना में बड़ी शक्ति है /

यह जान कर कि मेरे पास हीरा है किसान की काम करने की शक्ति बढ़ गई / पुरानी सभी समस्याएं और दुःख भूल गए / नई स्फूर्ति उसके शरीर में आ गई / जीवन एक उत्सव की तरह लगने लगा 

परन्तु किसान की यह ख़ुशी अधिक समय नहीं रही / एक दिन किसान जब सुबह उठा तो उसका बह हीरा अपनी जगह पर नहीं था / 

किसान घबरा गया , सभी जगह ढूंढा पर हीरा न मिला / 

किसान बड़ा दुःखी  रहने लगा /

 उसका  स्वभाव भी चिड़चिड़ा हो गया /

 फिर  दोबारा  बह मायूस रहने लगा /

दुःख की दवा प्रार्थना है / 

किसान फिर प्रार्थना करने लगा /

भगवान ने सुन ली /                                            गांव में शादी का उत्सव था / 

किसान को भी न्योता आया / 

किसान बहां गया /

 लेकिन बैठे बैठे उसने  उधर नज़र दौड़ाई तो क्या देखता है कि उसका हीरा बहां है / 

उसने मन ही मन खुशी महसूस कि चलो हीरा मेरे पास नही तो किसी नज़दीक के गांब बासी के पास है / 

अब बह किसी न किसी बहाने उस गांव बाले के पास जाता है  बैठता है अपने हीरे को देखता है  और अपने घर बापिस आ जाता / अपने हीरे की यादोँ में खुश रहता है।  अब किसान ने अपने मन को समझा लिया  है कि हीरा उसके पास या गाँव बाले के पास क्या फर्क पड़ता है / 

है तो उसकी नज़रों के सामने /

Moral :  To be happy, be content what you have. God gives what you deserve at the right time, Have patience, It pays.










































सोमवार, 4 जून 2012

Prayer


eyk drgwh ky bwhr bhUq KubsUrq lPj ilKy Qy

“Kudw ky pws AwpkI dUAw sunny ko bhUq bkq hY
pr ikAw Awp ky pws dUAw mwNgny ky iley bkq hY”

शुक्रवार, 30 दिसंबर 2011

PRAYER






There is nothing that you cannot achieve by prayer.



“Payer has been the saving of my life,

without it,

I should have been a lunatic long ago.

I have my fair share in the bitterest of public and private experiences.

They threw me into temporary despair,


but if I was able to get rid of it, it was because of prayer.”


शुक्रवार, 23 दिसंबर 2011

PRAYER





Your prayers  are never lost.

They are always answered.



It is a question of time as when you realize it.

“Never was a faithful prayer lost.

Some prayers have a longer voyage than others,

But then they return with their richer lading at last.

So, that the praying soul is a gainer by  for an answer.”