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Saturday, April 22, 2017

Listening




Listening
Leverages
Learning

Best  Rule:

Listen 70 % of the time.
Speak 30 % of the time.

Many times, many answers are found when we keep the mouth shut and listen attentively. This saves our menntal energy. My personal experience, if I do not open my mouth for 5 minutes, I find the answer to the problem from the speaker itself. The less we speak, more we become popular. People wait to listen to us.

सुनने से ज्ञान बड़ता है।  क्यूँकि हर इंसान ने अपनी जिंदगी में सीखा है यदि आप धीरज से सुनेगे तो जो उसने जिंदगी में सीखा है बह पलों में जान जायेंगे।

किसी से अपनी समस्यायों या परेशानी के लिए सलाह लें सहायता स्वम अपनी आप करें।  पूछे नहीं ढूंढे। फोकस करने से सब मिलता है।





Monday, April 3, 2017

Power of Thoughts



CHANGE THOUGHTS
LIVE LIFE OF YOUR CHOICE.

Feelings can be changed. Change feelings and thoughts will be changed, Thoughts when changed will make your life as dreamed and desired by you.

It takes but one positive when given a chance to survive and thrive to overpower an entire army of negative thoughts.

 -----   Robert H.Schuller, Positive Thinker and Writer of books on how to achieve success in life.

A boy from a countryside i.e. village went to attend an interview in an MNC.

When he was attending the interview, the managing director of the company asked:

" Where do you see after 5 years?"

The young rustic boy replied quickly pointing towards the MD's chair:

"There sir."

The Managing Director had never imagined this quick and abrupt reply from the simple looking boy. The reply shook him from within but he regained the composure and dared to speak:


"Where will I go?", the MD grinned.

"Have not you planned for the next 5 years sir?" was the next reply from the boy.

This is the clarity of thought. Power of dreams and giving the direction to the mind what to conceive and believe, so that it can achieve. No distractions allowed. This kind of thinking is like Lion Thinking. Lion thinks to achieve 100% without failure. Passion for achieving matters.

Positive thoughts create opportunities while negative thoughts derail opportunities. It is mind that makes or breaks the determination to achieve conceivable thoughts.

How can we achieve what is dreamed?


In the sky, two sparrows - one small and one big - say young and elder ones were flying. They were enjoying the flight.  Right at that time, an airplane crossed them. The young one felt the fear and was surprised to see the airplane.

The young sparrow asked the elder wise one: What was this that crossed us? It looked like us. But its speed was enormous, may be 10 times faster than that of ours.

"Didn't you notice the smoke, the big sparrow was leaving behind?"

"Yes, that I did", said the young sparrow.

"It was ignition that propelled the big sparrow (airplane)", replied the elder sparrow.

"What is ignition?", asked the young little sparrow.

"Oh! you don't know ignition. It is the fire in the belly. No sparrow can gain speed without ignition."

So, dears, without passion i.e. fire in the belly, to achieve any dream in life is not possible. Dream is not what you dream while you sleep, but it is what you dream with open eyes and closed eyes 24 hours a day, 7 days a week till it becomes a reality. This is also referred to as : Creative Visualization. 






The pic used here is not having website. Hence to express gratitude to the creator. If anybody's copyright has been violated, it may be intimated immediately, so that the violation may be corrected immediately. 

सोच बदलो
संसार बदलो 

1 . भावनाओं को बदला जा सकता है , कोशिश करने से।  जैसे हे आप अपनी भावनाएँ यानी feelings बदलेंगे बैसे ही आपके बिचार बदलने शुरू हो जायेंगे।  जैसे ही बिचार नकारत्मक बिचार सकारत्मक बिचारों में बदलने शुरू हुए आप की जिंदगी आप के सपनों की जिंदगी बननी शुरू हो जाएगी।  

2 इंसान को यदि एक कंप्यूटर समझ जाये तो दिमाग एक सॉफ्टवेर की तरह है।  सॉफ्ट बेयर को रिप्रोग्राम किया जा सकता है , शरीर इसी सॉफ्टवेर के जरिये चलता।  फर्क कंप्यूटर के सॉफ्टवेर और दिमाग का यह है कि कंप्यूटर के सॉफ्टवेर की सीमा होती है कंप्यूटर की सीमा होती है जैसे 400 GB आदि परंतु इंसानी दिमाग की कोई सीमा नहीं है।  इसकी कैपेसिटी का अंत नहीं है।  इसलिए यदि सुख चाहिए तो लिख कर देखिये कि मुझे चाहिए क्या फिर इस पर सोचते जाईये और लिखते जाईये।  अधिकतर बार ऐसा होता है कि हम अपनी सोचने की ऊर्जा ऐसे बिचारों पर लगाते हैँ जो हम असली जिंदगी में पसंद तक नहीं करते। 

3 रोबर्ट एच शूलर , एक बहुत बड़े पॉजिटिव थिंकर जाने जाते है।  उनका कहना है : नकारत्मक बिचारों की फ़ौज को मन में से भगाने के लिए मन में एक सकारत्मक बिचार का प्रवेश काफी है। 

यह तो उसी तरह है जैसे एक कमरे में पूर्ण अँधेरा है और छोटा बच्चा उस कमरे ,में प्रवेश करने से घबरा रहा है परंतु उसके पिता या घर के किसी बड़े ने उसे एक छोटा सा दिया जलाकर कमरे में प्रवेश करने के लिए कहा।  बच्चा अब दिया लेकर कमरे में बेझिझक चला गया।  डर तो उसके मन में आया ही नहीं। 

4. इसी तरह से नकारत्मक बिचार इंसान को जीवन में आगे बढ़ने से रोकते है।  प्रगति में सबसे बड़ी रुकाबट हमारा बीते हुए भूत काल की यादें होती है।  क्या हम उन पर आज फोकस करें तो उनमे कोई बदलाब ला सकते हैं? नहीं कभी नहीं।  तो दिमागी ऊर्जा उन पर लगाने का क्या लाभ?

एक टीचर ने इसी तथ्य को बच्चों को समझाना चाहा।  उसने बच्चों को कहा कि अपने किताबों के थैले में एक दो आलू रख कर आना।  जब जहाँ यह आलू आपके ठेले में ही रहें।  बच्चे मान गए।  परंतु 5 -7 दिन के बाद आलुयों में से बदबू आने लगी।  दर के मारे बच्चे टीचर को बताते नहीं।  परंतु एक बच्चे ने हिम्मत की और बोला : मास्टरजी अब तो और सहन नहीं होता , आलुयों में से बहुत बदबू आ रही है। 

मास्टर मुस्कराया और बोला : आप आलुयों की बदबू 7 दिन बर्दाश्त नहीं कर पाए परंतु जो अपने भूतकाल में घाटी घटनायों की बदबू अपने मन में लिए हो और जो आपका आज और आने वाला कल बर्बाद कर रहा है उसके बारे में सोचा है क्या कभी।  आलू फ़ेंक डोज बदबू चले जाएगी परंतु भूतकाल की यादों से छुटकारा पाने पर भभिस्यए में सफलता की रफ़्तार तेज हो जाएगी। अपने दिमागी बस्ते को भूतकाल की बदबू से भी तो खली करो।  हाँ भूतकाल के महक को अपनी शक्ति बनाये रखो। 

5 . विचार शक्ति  : जिंदगी में योजनाबद्ध सोचना भी एक कला है। बहुत से लोग एक ही समय पर 
बहुत कुछ सोचते है और सभी पर सफलता पाना चाहते है जिसका अंत केवल तनाब यानि स्ट्रेस ही रह जाता है।  एक समय पर एक काम सोचने और करने के लिए फोकस करने से सफलता की रफ़्तार बढ़ जाती है।  कैसे :

एक बार एक गांव से एक लड़का शहर में इंटरव्यू के लिए आया. कंपनी केMD ने पूछा :
आप अपने आपको 5 साल के बाद कहाँ देखते हो मेरा अर्थ है कि 5 साल बाद आप अपने को कहाँ सोच कर बैठे हो। 

लड़का मुस्कराया और बोला : आपकी सीट पर 
MD ने ऐसे उत्तर की अपेक्षा नहीं की थी।  

बह झुळझुळ कर बोला : तो मैं कहाँ जायूँगा। 
लड़का बोला : सर आपने अपने लिए अगले 5 बर्ष के लिए प्लान ही नहीं किया ?

लड़का तो सलेक्ट हो गया।  यह है क्लैरिटी ऑफ़ थॉट।  कई लोग सारी सारी उम्र अपने बारे में नहीं जान पाते कि उन्हें पहुँचाना कहाँ है।  लिख कर , डेट डाल कर सोचिये।  यह आपका गोल बन जायेगा और आप इसे प्राप्त भी कर लेंगे। 

6 Fire in the belly : आसमान साफ़ था।  मौसम सुहाना था।  दो चिड़ियों ने उस आसमान में उड़ कर सुहाने मौसम का आनंद लेना चाहा।  दोनों ने आसमान में उड़ना शुरू किया।  जब बह दोनों उड़ रही थीं उसी समय उनके नजदीक से एक जहाज धुयाँ छोड़ता हुआ गुजर गया गया।  

छोटी चिड़िया ने बड़ी चिड़िया से पूछा : यह क्या था ? लगता तो हमारे जैसा था परंतु स्पीड में हमारे से कई गुना ज्यादा। मेरे ख्याल में ये एक बड़ी चिड़िया थी। 

बड़ी चिड़िया मुस्कराई और बोली : बुधु यह चिड़िया नहीं जहाज था।  
छोटी चिड़िया ने फिर हैरान से पूछा : परंतु ये हमारे से तेज कैसे उड़ रही थी ?

बड़ी चिड़िया ने उत्तर दिया : तूने उसके पीछे धुयाँ नहीं देखा।  इसे इग्निशन कहते है यानि अंदर पेट्रोल जल रहा है और उसका धुयाँ बाहर निकल रहा है यही इसे स्पीड देता है। 

छोटी चिड़िया जैसे सब  समझ गयी हो ने कहा : अच्छा ! ऐसा है?


इसी तरह से जिस इंसान के अंदर अपनी मंज़िल पाने के सपनों का इग्निशन होता है और अपने सपनो के लिए जी तोड़ म्हणत करता , बह कभी अपनी मंज़िल पाने में पीछे नहीं रहता।  अपने आप से प्यार, अपने पर भरोसा, सही दिशा में ईमानदारी से परिश्रम इंसान को उसकी मंज़िल पर पहुंचा ही देती है , कोई रोक नहीं सकता। 


असफलता जैसा कोई शब्द नहीं।  जब हम किसी काम में फेल होते है तो ज्ञान तो बटोर ही लेते हैं।  

Monday, February 6, 2017

For Attention of Google



The Officer at Google

Today my email account showed that I have utilized 14.81 GB and it will be blocked after utilization of 15 GB.

I clicked on "buying 100GB space" but it did not accept Rupay debit card.

Earlier,  I got the message that I can pay by Rupay debit card.

Please look into the matter.

I will remit the payment by Rupay Debit card.

Thanking you,

Sunday, December 25, 2016

EDUCATION Loan

गाइडंस  (Guidance )

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भारत में शिक्षा खर्चीली है।  यह यथार्थ की बजाय एक दिमागी पहाड़ अधिक है।  जबकि शिक्षा एक ऐसी इन्वेस्टमेंट है जो बच्चे के लिए बरदान है।

A child without education is like a bird without wings.
एक 
अशिक्षित बच्चाबैसे है जैसे  बिना परों के पक्षी। 

Education i s a better guard of liberty than standing army.
सेना की बजाये शिक्षा बेहतर मानसिक आज़ादी प्रदान करती है। 

Educating a child today is preparing the child for tomorrow i.e. future.
 बच्चे को आज पढ़ाने का अर्थ है उसका भविष्य संबारना। 

It is education that enables a child to travel the entire world with least  spending  More world can be visited and understood through reading books.

शिक्षित इंसान कम खर्च से दुनिया की सैर कर सकता है।  अधिक दुनिया किताबें पढ़ कर समझी जा सकती है। 

अब एक केस स्टडी। 

5 -7 बर्ष पहले एक करियाना (grocer ) आया और कहने लगा :
आज के महंगाई के युग में 

परिवार पालना और बच्चों की पढ़ाई बहुत ही खर्चीला काम है। 

प्रोफेसर साहिब ने पूछा यह आप क्यों कह रहे हैं ?

ग्रोसर बोला :


 साहिब मेरी तीन बेटियां हैं।  बड़ी  12 बीं मे पढ़ रही है , उससे छोटी 10 बीं में और उससे छोटी 9 बीं क्लास में।  मैं बड़ी मुश्किल से 15000 रूपए महीना कमा पाता हूँ।  मैं हमेशा चिंतित रहता हूँ की इनकी शादी कैसे कर पायूँगा। 

यह सब उसने एक ही सांस मैं कह दिया।  जिससे पता चलता था कि बह कितना परेशान है। 

प्रोफेसर साहिब बोले : आप अपनी बड़ी बेटी को मेरे पास भेजना। 

ठीक साहिब , बह बोला। 

कुछ दिनों के बाद उसकी बड़ी बेटी और ग्रोसर आप आया। 

बेटी ने बताया कि बह  12 बीं क्लास Non -Medical में कर रही है और उसके बाद B.Sc करेगी। 

बिलकुल सही , आप B.Sc करने के बाद मेरे पास आना और आगे की पढ़ाई के लिए में आपको गाइड कर दूंगा।  परंतु B.Sc में कम से कम 50 % नंबर जरूर लेना। 

उसके 3 -4 साल बाद बह लड़की अपने पिता के साथ आई।  उसने B.Sc. 66 % नम्बरों से पास की थी। 
प्रोफेसर ने  दी।  

अब आगे की क्या प्लान है।  लड़की ने अभी बोलना ही था उससे पहले उसका पिता बोला : अच्छा सा लड़का देख इसकी शादी करेंगे।  

इस उत्तर से लड़की के चेहरे पर उदासी छा गई।  

प्रोफेसर ने लड़की से पूछा : बेटी आप क्या करना चाहती हो ?

"मैं आगे पड़ना चाहती हूँ "

पिता से पूछा : आप इसकी शादी पर कितने पैसे लगायोगे 

पिता बोला : 2 -3 लाख लगा ही दूंगा। 

"ठीक है आप केवल 50000 रूपए दें और यह MBA कर लेगी। MBA करने से इसको अच्छी नौकरी मिल जाएगी और यह साड़ी उम्र आपकी सहायता करेगी "

पिता हैरान था कि क्या ऐसा हो सकता है ?



प्रोफेसर ने लड़की को कहा , आप MAT की तैयारी करो।  MAT (Management Aptitude Test ) होता है जिससे MBA में एडमिशन मिलती है।  

प्रोफेसर ने अंग्रेजी बोलना लिखना सीखाया। 

लड़की MAT पास कर गयी।

उसके बाद उसने MBA के लिए क्वालीफाइंग टेस्ट जैसे GD , PT ,ST  आदि पास कर लिए। 

पिता ने जो 50000 रूपए दिए थे उनसे कालिज को फीस का एडवांस दे दिया। 

कालिज ने प्रोविजनल एडमिशन लैटर भेज दिया।  

यह लेटर लगा कर और कई डॉक्यूमेंट लगा कर बैंक से एजुकेशन लोन ले लिया।  बड़ी आसानी से लोन मिल गया। 

2 साल होस्टल में रह कर लड़की ने MBA कर ली और एक कंपनी ने कैंपस इंटरव्यू में उसे स्लैक्ट कर लिया। 
कुछ साल उस कंपनी मैं काम करने के बाद उस लड़की की ऑस्ट्रेलिया मैं काम करने बाले लड़के से शादी हो गई।  

कुछ साल बाद उसकी बहने भी ऑस्ट्रेलिया चली गई।  पिता और माता भारत में हैं और बहुत खुश हैं कि उनकी तीनों बेटियां खुश हैं।  प्रोफेसर का धन्यवाद करते है। 

बैंक लोन तो 7 साल में ख़त्म हो जायेगा परंतु MBA की डिग्री और उससे मिला मान सामान तो हमेशा  ही रहेगी। बिना लोन के पिता हो सकता उन बच्चों की पढ़ाई 12 बी में ही बंद कर देता।  बच्चों का भविष्य 99 % माता पिता द्वारा हौसला और आर्थिक सहायता देने से होता है।  कोई दूसरा इतना बच्चों का भविष्य इतना परभाभित नहीं कर पता जितना माता पिता का हौसला।

यदि आपकी  स्थिति अच्छी नहीं है तब भी बैंक एजुकेशन लोन लेकर बच्चे को काबिल बनायो।  बच्चा कमाई करके  लोन बापिस लोटा देगा।  उसका साथ केवल  माँ बाप  और अपनों ने ही देना है किसी और ने नहीं।  पढ़ाई से ज्ञान बढ़ता है।   

असली धन 

धन बह इकठा करो जो तुम्हारी रक्षा करे। 
न की बह जिसकी रक्षा तुम्हे करनी पड़े।

Pic Courtesy : www.vasantinfotech.com

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Thursday, December 22, 2016

भारत में मकान कैसे बनायें ?


How to build a house in India?Image result for small houses 

भारत में मकान कैसे बनायें ? 
इस ब्लॉग को पड़ने के लिए धन्यबाद। 

किरायेदारों  के लिए खुशखबरी।

जैसे ही मकान की बात करें तो मन घबरा जाता है।  मन मैं बड़े भयानक डरावने विचार आने शुरू हो जाते हैं।  क्योंकि हमने ऐसे लोगों से मकान बनाने की नकारत्मक अनुभव सुने होते हैं।  यह अनुभव कैसे होते हैं :
1 . मकान बनाना बहुत ही कठिन काम है।
2 . मकान बनाने के लिए मजदूर सही नहीं मिलते हैं।
3 . मज़दूर तंग बहुत करते हैं।
4 . बनाने बाले मिस्री मकान बनाने से पहले लागत 1०००  रूपए बताएं तो असलियत में 5000 रूपए लगते हैं।
5 . जीवन भर की कमाई लग गई परंतु मकान अभी भी पूरा नहीं बना।

यह कुछ ऐसी बातें हैं जिनको सुन कर जिसके पास मकान नहीं है  उसका अपना घर बनाने का हौसला ही टूट जाता है।  इस लेख को पड़ने के बाद आप का मन अपना घर बनाने के लिए उत्साहित हो जायेगा और आप अपने छोटे से बजट में भी अपना छोटा सा मकान बना कर अपने मां बाप या अपने बीबी बच्चों के साथ हंसी ख़ुशी और सुख से मालिक की तरह जीवन जी सकेंगे।

मान लें आप की तनखाह या इनकम 10000 रूपए महीना है।  एक साल मैं आप ने 1.20 लाख रूपए कमाए।  और आप किराये पर रह कर कम से कम 2500 रूपए किराया दे रहे हैं।  यानि एक साल में 30000 रूपए किराया देते हैं।  तो क्या करें :

1 . आधार कार्ड दे कर अपना इनकम टैक्स डिपार्टमेंट मैं रजिस्ट्रेशन करवाएं और पैन (PAN) कार्ड बनबाये।
2 . घबराएं नहीं पैन (PAN) कार्ड कोई आप से इनकम टैक्स नहीं मांगता।  यह आधार कार्ड की तरह ही है।
3 . इस पैन (PAN) कार्ड के बाद इनकम टैक्स की रिटर्न भरें।  रिटर्न भरने का मतलब यह नहीं कि आप ने इनकम टैक्स भी भरना।  इनकम टैक्स तभी भरा जाता है जब आप की इनकम मिनिमम आय से अधिक हो।  2015 -16 साल के लिए यह सीमा 2. 70 लाख है।  रिटर्न भरने से पहले इस सीमा की दोबारा कन्फर्म करलें।
4 . अब एक छोटा सा 25 गज से 100 गज का जमीन का टुकड़ा खरीदें।  इसकी रजिस्ट्री करवाएं।
5 . अब इस रजिस्ट्री को बैंक में दे कर , मकान बनाने के लिए लोन लें।  यह लोन किश्तों में 10 , 15 ,20 या 30 साल में बापिस  किया जा सकता है।  लोन की किश्त 1000 रूपए प्रति 1 लाख के करीब है।  बाकि आप खुद बैंक से पूछ सकते हैं।

इस तरह से जो किराया आप दे रहे हैं बही किश्त दे कर आप अपने मकान के मालिक बन सकते हैं।

अपने मकान में रहने के फायदे :
1 . मकान मालिक का दखल बंद।
2 . आपकी मानसिक स्थिति अधिक स्थिर और खुशनुमा होगी। घर के माहौल में ख़ुशी बढ़ेगी।
3 . जैसे जैसे बच्चे बड़े होंगे आप उनकी जरूरत के लिए मकान में कमरों की बढ़ोती  कर सकते हैं।
4 . बच्चे अपना मन अपनी पढ़ाई पर लगा सकेंगे।
5 . जब तक आप की किश्तें ख़त्म होंगी तब तक आपके मकान की मार्किट वैल्यू कम से कम तीन गुना बाद जाएगी।

आप अपना मकान बनाएंगे और उसमे रहेंगे तो सुख से ब्लॉगर को याद रखेंगे।  यही ब्लॉगर की ख़ुशी है।  
भला = लाभ     आपका भला ब्लॉगर का लाभ है।  करें ! करने से जिंदगी बदलती है।      सोच बदलें संसार बदलेगा।       बहरी संसार तो हमेशा से एक ही रहा है , रहेगा  केवल आंतरिक संसार बदलता है।  आदतें सुधरने से जीवन सुधर जाता है।  सदगुण इंसान को अर्श पर पहुंच देते हैं।








Pic courtesy: www.countryliving.com 

Tuesday, December 20, 2016

Ocean Waves

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लघु कथा , बृहद शिक्षा 


समुद्र के किनारे खड़ा एक व्यक्ति  समुद्र से आने वाली लहरों को देख रहा था।

लहरों का पानी समुद्र के किनारे से बाहर आ जाता और यह व्यक्ति उसे अपनी मुठि में भर कर फिर समुन्दर में फेंक देता।

यह नज़ारा समुन्दर के किनारे सैर करने बाले हर रोज़ देखते। 

कुछ बड़बड़ाते : शायद यह दिमागी तौर पर ठीक नहीं है?

दूसरे कहते :  यह पागल लगता है , घर के सदस्य इसे घर पर बरदाश्त नहीं करते  इस लिए समुन्दर के किनारे पर आ कर लहरों को बापिस फेंकता रहता है। 

इसी तरह के अंदाज़े बहुत से सैर करने बाले युवक और युवतियां लगाती।  वहुत से बच्चे उस व्यक्ति को देखते और अपने  माता पिता से तरह तरह के सवाल पूछते।  माता पिता भी जो मन आता बह उत्तर दे देते। 

इसी तरह से कई दिन बीत गए और सैर करने बाले भी मनगढ़न्त कहानियां अपने बच्चों को सुनाते रहे। 

एक दिन एक उत्सुक युवक ने हौसला करके उस व्यक्ति से  पूछा :

आप समुन्दर की लहरों को बापिस समुन्दर में क्यों फेकतें हैं ?   बड़ा अज़ीब सा लगता है।  क्या आप इस का उत्तर देंगे?

समुद्र के किनारे खड़ा व्यक्ति मुस्कराया और बोला : 

आप और दूसरे सैर करने बाले व्यक्ति जो सोचते हैं वैसा कुछ भी नहीं है।  बास्तव में  मैं एक मुठी भरता हूँ और समुन्दर में फ़ेंक देंता हूँ।  उस मुठी में  चार पाँच  घोंगे भी दोबारा समुन्दर में चले जाते हैं।  इस तरह मैं इन घोंगों की जान बचा लेता हूँ।  जो घोंगे समुन्दर की लहरों के साथ बहार आ जाते हैं और किनारे पर पड़े रहते हैं वह अपना जीवन खो देते हैं। 

इस पर युवक ने कहा : इससे कोई अधिक अंतर तो नही पड़ता। 

समुन्दर किनारे खड़े व्यक्ति ने उत्तर दिया :       सभी ऐसा  ही सोचते हैं और जो कर सकते हैं बह भी यही सोच कर नहीं करते  ,

लेकिन यह जो संसार है एक समुन्दर की तरह है और हम सभी का जीवन उन इंसानों की दें है जो जब से संसार बना है ने  छोटी छोटी कोशिशों की।

 अधिकतर इंसान बड़ी बड़ी उप्लाब्दियों के इंतज़ार में जीवन विता देते हैं  जबकि जीवन का सार तो छोटी छोटी  उपलव्दी में होता है। 

युवक इस उत्तर से बहुत प्रभाभित हुआ और उसे नमस्कार करके चला गया। 

फिर कभी उसने उसे  "पागल" की संज्ञा नहीं दी।  जब भी गुजरता तो उसे मुस्कराहट दे कर गुजरता। 








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Saturday, December 17, 2016

Optimist vs. Pessimist

आशाबादी बनें, लंबी उम्र जिएं। 

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आशाबादी बेहतर और लंबा जीवन जीते हैं  यह हॉर्वर्ड यूनिवर्सिटी अमेरिका की एक स्टडी ने सिद्ध किया है।  यह स्टडी कम रिसर्च 2004 से 2012 तक 70000 महिलायों के अध्ययन से प्राप्त हुई।  आशाबादी इन्सान सोचता है कि जो कुछ होगा बह अच्छा ही होगा।  इसके बिपरीत निराशाबादी सोच के इंसान  मानसिक कल्पनायों के कारण अपने जीवन को सकुंचित कर लेते हैं और उनकी आयु भी काम होती है।