बोलने के लिये सुनने बाला भी होना चाहिये। परन्तु जब बोलेंगे तो यदि सामने बाले को अँग्रेज़ी न आती हो तो बह आपको अँग्रेज़ी बोलने से हतोअहित यानी नुक्ता चीनी करेगा और आप में अँग्रेज़ी बोलने का उत्साह कम और हीन भावना अधिक आएगी।
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इस लिये कोई भी पुस्तक या मैगज़ीन ले कर शीशे के सामने बैठ बोलते जाएं। बोलने की स्पीड बढ़ेगी।
आत्म विश्वास बढ़ेगा।
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अँग्रेज़ी बोलने का प्रयोग दुसरों को नीचा दिखाने के लिये नहीँ बल्कि अपने जीवन में जब जरूरत पड़े तो करेँ।
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अपनी आवाज को फ़ोन या कंप्यूटर में रिकॉर्ड करके , बार बार सुनें।
अँग्रेज़ी बोलने की झिझक दूर होगी।
4
सकारत्मक रहिये। यानी यदि हर रोज़ एक अँग्रेज़ी शब्द का प्रयोग अपने रोजमर्रा की जिंदगी में करते हैं तो अपने को अपने आप मन में शाबाशी।
दूसरे इस लिये नहीँ देते कियूंकि उन्हें खुद नहीँ आती।
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नकारात्मक/सकारत्मक टीचर जाने
एक बच्चे ने 400 शब्द का अँग्रेज़ी निबन्द लिखा और 380 शब्द ठीक थे।
नकारात्मक टीचर ने लाल पेन से 20 गलतियां निकाली और बच्चा हीन भावना से त्रस्त रहा।
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दुसरी तरफ सकारात्मक चैकर ने 95/100 नंबर दिये। क्यूँ?
कियूंकि 400 शब्द से यदि 20 गलत हैँ तो 95% ठीक हुये।
इससे बच्चे का मनोबल इतना बढ़ा कि बह MA English कर गया।
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इसलिये जो पढ़ो उसे दुसरों की बजाए स्वयं रिकॉर्ड कर चेक कर लो। बार बार सुनो।
यह बैसे ही जैसे गोल्डमेडलिस्ट अपने गोल्ड मैडल को देख कर उत्साहित होता है।
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