The BIGGEST prison
in the world.
Mental prison.
मेन्टल प्रिजन है।
फ़िक्शन- जो पढ़ते, सुनते या देखते हैं उससे सोच पर असर पड़ता है।
यह सच हो भी सकता है और नही भी हो सकता परन्तु हमारी नींद और मन की शांति भंग कर देता है।
इसलिये हमेशा "in terest and concern" पर फोकस रखें।
कभी देखा है:
दो आदमी बात कर रहे हों हम बेबजह बिना तालुक खड़े हो कर सुनते है और उसी आधी अधूरी सुनी सुनाई बातों से मन की शांति खराब करते हैं।
अखबार में लिखे बहुत से क्राइम पढ़ पढ़ कर मन दुःखी करते हैं।
TV देखो ।
हमारे काम की कोई बात हो न हो परन्तु लगा कर सुनते हैं। सारी दुनिया के लड़ाई, झगड़े सुनते हैं। मन अशान्त।
सीरियल देखते हैं और जो सीरियल में साजिशें होती है, बहि घर के सदस्यों में देखने लगते हैं, ब्यवहार बदल जाता है।
एक दोस्त ने बताया: मैने TV देखना बंद किया, अखबार पढ़नी बन्द की, मेरे घर मे शांति ही शांति हो गई।
कियूंकि सारा फोकस घरबालों, घर और घर की समस्यों को हल करने लगना शुरू हो गया। और सभी खुश।
कई सालोँ से धार्मिक गुरुयों, बाबेयों से खुशियिओं के लिये भटक रहे थे।
आप भी करो।
दुनिया का सबसे बड़ा काराबास(जेल)
यह बिचार" लोग क्या सोचेंगे"
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यदि किसी कोशिश में कामयाब न हो तो इतना मनोबल फेल होने पर कम नहीँ होता जितना इस सोच से कि दुनिया क्या कहेगी?
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आपके बारे में सोचने के लिये किसके पास समय है?
भूल जायो और दोबारा कोशिश करो।
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एक दोस्त ने एक अपने रिश्तेदार का कैरियर कैसे बनाया? जानें।
रिश्तेदार का बेटा इनके घर फौज में भर्ती होने के लिये आया।
बह दौड़ में असफल रहा और फ़ौज़ से रिजेक्ट हो गया।
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यह लड़का बहुत अफसोस से लेटा था।
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जब दोस्त आफिस से आया तो इशारा करके पूछा कि रिजल्ट कैसा रहा?
रिश्तेदार के बेटे ने सिर हिला कर "न" कर दी।
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दोस्त ने लड़के को छत पर बुलाया और कहा: अपनी आंटी को न बताना। घर पर भी मां बाप, भाई बहन, पड़ोसियों को न बताना परन्तु खुद दोबारा कोशिश करते रहना।
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लड़का बोला: घर बाले पूछे तो क्या कहूँ?
" कह देना कि रिजल्ट अखबार में आएगा"
तीन चार दिन के बाद किसे याद रहना है।
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लड़के का मनोबल बड़ गया और उसने MBA किया और आज कल मार्केटिंग का काम कर रहा है।
जरूरी है सब कुछ सभी को बताएं?
यदि यह लड़का अपनी रिजेक्शन के बारे में बताता तो घर के और इर्द गिर्द के लोगों ने तंज/ताने दे दे कर मनोबल तोड़ देना था और हो सकता है हीन भावना से जीवन में आगे बड़ ही नहीं पाता।
इसलिये दुसरों को बताए बिना कोशिश करते रहो। सफलता मिल जाएगी।
सफलता
इमोशनल इनटेलीजेंस 75% है और आई क्यु 25%
अपने लक्ष्य से मन से जुड़ो।
कैसे?
फ़ुटबॉल का मैच चल रहा है।
टीम का खिलाड़ी प्लेयर से भिड़ जाता है।
प्लेयर गिर जाता है। दूसरा खिलाड़ी मैच के रिजल्ट की परवाह किये बिना उस खिलाड़ी को उठाता है। और फिर खेलने लगता है ।
यह है इमोशनल इनटेलीजेंस।
गिरना और फिर उठ कर खेलना बिना परवाह किये कि मैच का हश्र क्या होगा।
मन लगा कर खेलते जायो। सफलता खिलाड़ी को ही मिलेगी।खेलना जरूरी है। मैदान छोड़ने बाले कभी जीतते नहीँ।