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सोमवार, 25 जनवरी 2021

मोटिवेशन

 

B 1319

Motivation

 अभिप्रेरणा

Motivation is of two types

अभिप्रेरणा के दो प्रकार।


1

 Temporary Motivation-

  अल्पकालिक, अस्थाई अभिप्रेरणा (3 अ)

*See a movie and  get inspired temporarily.

चलचित्र देखेँ और अल्पकालिक प्रेरणा प्राप्त करें।


**Read a motivational book and get temporarily inspired.

मनोबल पर कोई पुस्तक पढें और अल्प काल के लिये प्रेरणा पाईये।


***Hear a positive story on TV or from a person and get temporarily motivated.

TV पर कोई सकारत्मक उपलब्धि की कहानी सुनकर अस्थाई प्रेरणा प्राप्ति करेँ।

**** More may be added.

और भी जोड़े जा सकते हैं।


Motivation Permanent

अभिप्रेरणा -दीर्घकालिक/स्थाई

Set a High Goal/aim/target and work hard and smart  to achieve that goal/aim/mission.

जीवन के लिये 

बढ़े गोल/लक्ष्य/टारगेट बनाये 

और इस गोल/लक्ष्य/टारगेट/मिशन 

को प्राप्त करने के लिये जी जान से जुटकर प्राप्त करें।


स्थाई अभिप्रेरणा में आदर्श बाक्यों का बड़ा महत्ब है।

कुछ आदर्श वाक्य के उधाहरण

* पढ़ने के लिये आएँ, 

सेवा के लिये जाएं-               स्कूलों के बाहर लिखा होता है।


**   उचित शक्ति समर्थता देती है।

***  चरित्र चमन(जीवन) को चरितार्थ करता है।

**** कदम कदम बढ़ाए जा

         खुशी के गीत गाए जा।

***** संकल्प से शक्ति


अपने जीवन मे किसी भी आदर्श वाक्य को अपनी प्रेरणा और अभिप्रेरणा बनाये और लक्ष्य प्राप्ति करेँ।







बुधवार, 18 नवंबर 2020

घर बैठे बैंक पेपर की तैयारी करेँ

Self Discipline
स्वयं सुधार कथा

अध्यापक से गुरु बनना कठिन है।

2
परन्तु गुरु जी के शब्द कम ज्ञान अधिक होता है।

3
जिज्ञासु ने पूछा :

 गुरू जी सफलता के लिए कौन सा सही तरीका है।

गुरु जी मुस्कराए: 

2-3 मिन्ट चुप रहे। 

4
अब तक जिज्ञासु मन ही मन सोच रहा था "गुरु जी को इस प्रश्न का उत्तर नहीँ पता। " और खुश हो रहा था कि मैंने गुरू जी ऐसा प्रश्न पूछा जिसका उत्तर गुरु जी को नहीँ पता।

5
कम बुद्धि जिज्ञासु बढ़े खुश होते हैं जब उनके पूछे प्रश्नों का उत्तर दूसरे ज्ञानबान नहीँ देते।
6
प्रश्न पूछना आसान है परन्तु उनके उत्तर स्वयं ढूंढना अति कठिन।


7
 जो प्रश्नों के उत्तर स्वयं ढूंढते हैं बह जीवन बिजेता बन जाते हैं।

दूसरे स्वयं प्रश्न बन रह जाते हैं।

8

अब 3 के आगे पढें। गुरू जी 2-3 मिन्ट के बाद बोले:

वत्स तैयारी और सफलता बैसे है जैसे तीर और कमान।

तीर को सही दिशा में रख कर लक्ष्य साधना पड़ता है।
कमान पर तीर की दिशा को लक्ष्य पर सीधा रखना पड़ता है 
तब कमान पर लगे तीर को इतनी शक्ति से खींचना पड़ता है जिससे न तो तीर लक्ष्य से पीछे रहे और न ही आगे रहे बल्कि सही लक्ष्य को भेद दे।

इसमें कमान की शक्ति, स्ट्रिंग(कमान का धागा) की गुणवत्ता,  तीर कमान चलाने की क्षमता, लक्ष्य भेदने की तैयारी व परिशिक्षण सभी चाहिये।

9
अब इसको पेपर या कंपीटिटिव एग्जाम पर लगाते हैं।

* अच्छी पेपर की पुस्तके=  कमान 
* अच्छी तैयारी =  तीर चलाने और लक्ष्य भेदने की कला
* पेपर में प्रश्नों के उत्तर देना= कमान पर तीर लगा कर, लक्ष्य साधना और तीर चलाना ताकि तीर लक्ष्य भेद पाए।
इसमे आँखे, बुद्धि , सही साहस, धैर्य, समय प्रबंधन, स्वयं अनुशासन आदि की आवश्यकता है।

इसलिये वत्स सफलता के लिए तैयारी के साथ साथ यह गुण भी जरुरी है।

जिज्ञासु सुन कर गुरु जी के नत्मस्तक हो गया।

आप ने भी सीख लिया होगा। आशा है।