समाज सेवा - ख़ुशी का साधन
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1 ) एक बड़े नेता के लेख ने मेरे आत्म चक्षु खोल दिए। उन्हों लिखा : जब मैंने यह समाज सेवा के लिए संस्था की स्थापना की तो मेरे पास कुल अपनी बचत ५२००० रूपए थी।
2 ) मैंने अपने साथियों से केवल १० रूपए का योगदान देने के लिए अनुरोध किया ताकि संस्था को चलाया जा सके। एक साथी ने १० रूपए दे दिए।
3 ) मैंने अपने ५२००० रूपए की बचत और साथी के १० रूपए मिला कर साथियों को बताया कि मेरे पास ५२०१० रूपए संस्था चलाने के लिए है।
4 )जिस साथी ने १० रूपए दिए उसने सोचा कि १० रूपए के योगदान से ५२०१० रूपए इक्कठे हो गए। उसे यह तो पता ही नहीं था कि ५२००० रूपए मेरी अपनी बचत है।
5 ) उस रात मैं सोच सोच कर सो न पाया।
मैं सोच रहा था कि यदि मैं हिसाब बनाता रहा तो समाजसेवा कब करूँगा ?
6 ) दूसरे दिन जब मैं ऑफिस आया तो आते ही अपने साथियों से एक सत्य शेयर किया : मैं अपनी निजी कोई प्रॉपर्टी नहीं बनायूंगा। मेरे परिवार कोई है ही नहीं। मेरी सारी प्रॉपर्टी अब संस्था की प्रॉपर्टी है। इस पर मेरा कोई अधिकार नहीं।
7 ) आज तक मेरे पास ये है : यह कह कर मैंने उनेह एक लिखा हुआ कागज दिया जिस पर मेरी पास उस दिन तक जो भी था - बचत बैंक मे , घर और गाँब में माता पिता की दी हुयी जमीन और पुराना घर। और कहा इससे जयादा मैं कभी और कोई सम्पति निजी तौर पर नहीं बनायूंगा और समाज के गरीब बर्ग की तन , मन और धन से सेवा करूँगा।
8) यदि आप उन लोगों के बारे में अधिक सोचते हो जो आपकी कमियां ही ढूंढते है या आपसे ईर्षा करते हैं - अपने या और - तो आप उम्र भर दुखी रहने के लिए तैयार रहें।
9
) हर रोज़ 2 घंटे अकेले रह कर अपने लक्ष्य और दिशा पर सोचें। दूसरे शब्दों में अपना आत्म अबलोकन करें। यह जीवन के लिए बहुत ही लाभदायक है। महत्ब्पूर्ण ऊर्जा को संचित करता है। अपनी ऊर्जा बेकार की सोच और गॉसिप में नष्ट न करें।
10 ) मैंने एक कुतीआ पाल रखी है। जब मैं बाहर से थका हारा आता हूँ सभी मेरे से "कहाँ था , क्यों था , कैसे " आदि बेबजह के प्रश्न पूछते हैं। केवल एक यह कुतीआ ही है जो चुपचाप आ कर अपनी पूंछ हिलाती और इसके चेहरे से पता चलता है कि मेरे आने से इसे ख़ुशी हुई है। यह कोई प्रश्न नहीं पूछती है। बहुत ही सुख का एहसास होता है।
11 ) मैं क्या करता हूँ : केवल इसे जब घर पर होता हूँ दो समय का खाना देता हूँ। थोड़ा प्यार करता हूँ। इसे देखते ही सारी थकान उतर जाती है। शायद कोई पिछले जन्म का सम्बंद है। जब मैं इसे हाथ से पीठ पर प्यार करता हूँ बह एहसास शब्दों में ब्यान नहीं किया जा सकता। यह एक सच्चे प्यार का एहसास है। इसमें कोई स्वार्थ नहीं कोई शर्त नहीं। अद्भुत !
ऐसे समाजसेवी नेताओं को मेरा सलाम।