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गुरुवार, 29 मई 2014

 पिता जी  माताजी

        सादर प्रणाम

                   पिताजी माताजी आपने आज तक यह सोचा होगा कि हमाराबेटा  पढ़ लिख कर हमें आँखें दिखाता  है ऊँचीआवाज में  बोलता है।  ऐसा नहीं है।  असलियत यह है की मैं  हालात के कारण सारी  उम्र माँ बाप भाई बहनो के प्यार से बंचित रहा हूँ।

                   जब छोटा था तो  लुधिआना में काम करता और पढ़ता था बहने छोटी थी आप फ़ौज़ में थे।  अलग अलग रहे।  एक दो दिन या एक दो महीने छुटी  पर साथ रहते थे।  एक दो महीने में एक दूसरे के बारे में क्या पता लगता है अच्छा है या बुरा।  आपकी रिटायरमेंट हो गई  आप, माँ और बहने अमृतसर चले गए मैं  फिर लुधिलुधिआना में अकेला रह गया।  गाओं में पढ़ाई   उस बक्त की जब बस एक हफ्ते में २ या ३ बार  आती थी।  अब समय बदल गया है।  बिजली भी किसी किसी के घर होती थी।  हमारे घर  आप की दया से बिजली थी इस लिए में और हम सारे पढ़ गए।  हमारी पढ़ाई लिखाई में हमारी माताजी, अम्माजी, आप का, बुआजी खास तौर पर बढ़ी  बुआजी और तायाजी का बहुत बढ़ा योगदान है।  मुझे आज भी याद है कि ताया  जी कहते थे मैं  और तुम्हरे पिता जी काम करंगे पैसे कमाएंगे तुम और तुम्हरे भाई जितना चाहे पढना।  माताजी ही मेरी पहली गुरु हैं पांचवी  तक मेरे सारे सबाल निकाल देती थी।  साम्बा में पेटी  के गतों के ऊपर सबाल निकलते थे यदि नहीं पढ़ता तो आपसे ब  माताजी से पिटाई होती थी तब साथ बाले गन्धर्व अंकल ब औंटी बचाते  थे। में तो बच्चा  था समझ नहीं आती थी की आपकी ब अंकल आँटी की बहस कियूं हो रही है और में रात को उन के घर ही औनती  के साथ सो जाता था। बरही ताई जी और एमजी की बहस याद आते हसीं आ जाती है।  जटो ताईजी ब तायाजी के भी हम बहुत बहुत शुकर्गुजार हैं की उन्हों ने  तक हमें पूरा प्यार दिया है। भगवान ने चाह तो में सभी को रामजी के रमेश्वरं ले कर जायूँगा।  नयी ताई जी ने जो प्यार ब अपना पन िदया है उसका में बर्णन नहीं कर  सकता। धन्यवाद ताईजी ब बाकी सभी क़ो।

            पिताजी बच्चे बच्चे ही होते हैं मान बाप नहीं बन सकते।  में बहुत खुश नसीब हूँ की मेरे को भगवान ने संस्कारी माँ बाप दिए  दादी दी बाएं बोईये दिए मामे मामिआं दी मासीआं मासड़ दिए तायाजी तायाजी दिये।  में इन सभ का आभारी हम।  अच्छे जीवन के लिए अच्छे परिवार की जरुरत होती है।  कई बार जब में जेलों में लेक्चर देने जाता हूँ तब बाग़बान वाहेगुरु का बहुत बहुत शुक्रिया करता हूँ की उसने मुझे अच्छे मान बाप भाई बहिन दियय अच्छे रिश्तेदार दिए नहीं तो में जो आज लेक्चर दे रहा हूँ बह इस जेल में होत. आप सभी का बहुत बहुत धनबाद।

            पिता जी आपका सबसे जियादा क्यूंकि पिता बाहर से काम  करके पैसे  लाता है तभी मा बच्चों को खाना खिला सकती है।  हाँ मान को सभी धरम की किताबे 100 में से 75 नंबर देती हैं क्यूंकि बच्चे को अच्छा जीवन देने  उसका बहुत बढ़ा योगदान होता है। पिताजी का सर पर साया ही बढ़ा है।  सुख का साधन है पिता ।  बहस मैं जो मर्जी करूँ पिताजी पर मैंने आपसे बहस करने का गुस्सा नहीं किया क्यूंकि आप बहुत अछ्छे हैं।  आप ने अपने छे बच्चों की शादियां करवा दी पढा  लिखा दिया 56 सालों से हर दुःख सुख में मेरी सहायता करते आ रहे हो।  और तो कोई मेरे साथ नहीं हैं।  इस लिए  मैं आपका बहुत धनबाद।

           मेरी सभी बहने सुखी और बहुत अच्छी है।  लक्ष्मण जैसा भाई है संस्कारी भाभी है हमारे पांच बच्चे हैं।
पिता जी इतना फला फूला ख़ुशहाल परिवार है आपको तो हमेशा खुश रहना चाहिए।  मेरा काम अब चल पड़ेगा क्यूंकि मेरी सेहत काफी ठीक हो गयी है।  इअ स लिए कोई चिं ता की बात नहीं आको जो चाहिए हो किसी भी दूकान पर से ले लिया करें बह मुझे बिल दे  दिया करे और में पेमेंट  करूँगा।  नहीं तो  दिन आ कर सभी दुकानदारों को कह दूंगा।  पिताजी अब आप अकेले नहीं हैं आपके दो बेटे भी कमाते हैं आपको जितने पैसे मिले उसमे से 75 प्रतिशत अपने मन मर्जी से खर्च दिया करें बाकी हम पर छोड़ दें हम दोनों भाई संभाल लेंगे परन्तु गलियन न दिया करें इससे मन दुखी होता है।
                                                                      आपको ब माताजी को सादर प्रणाम, भाई और भाभी को आशीर्वाद बच्चों को प्यार।
                                                                       आपका बेटा


 

Education Minister


CONGRATULATIONS   
                 TO
  SMRITY IRANIJI
AS  HRD MINISTER  of INDIA
IN THE MINISTRY OF MODI SAHIB.

          A lot of heat is being raised by the critics on account of education of Education Minister as she is +2 or more.
 
       I don’t know well. Just gathered from debates on TV and news in newspapers.

     The education minister should have a sensitive heart to gauge the magnitude of policies and practices to raise the level of education among the poorest of poor and lowest strata of the society.
 
 
      A royal with star studded degrees may not have this kind of sensitive. Here a thought pops up in my mind, a highly educated with no exposure to the public at large cannot deliver better without good heart.

    Smiriti Iraniji, in the serial “Ramayana” which ran for 3-4 years on Television had a lot of interaction with people from all walks of life – old, young, children and adults.

     By interacting with those she is better than a P.G. who has attended the classes in college and feels shy to meet a person outside the college.

       No body cares how much you know unless he knows how much you care.

     She is committed, well-willed, dreams high and I am sure will deliver well.

     However, if she is +2, in the next 5 years i.e. term of the Govt. , she will be able to complete P.G.

   
   There is another way. Somewhere I read, open universities allow 25 yrs old to take direct admission in B.A and  clear it and admission in M.A if the age is 35 years.
    A leader is the one who has "out-of-box " thinking not water tight compartmental thinking. On these grounds, in my view Smiritiji  is a better choice.
 

   I support her as Education Minister.

Prof P.K.Keshap

-Founding Member Education Consultants of India

- National and International Awardee.

-“Visionaries” the principals Top Contributor.

- Expert Author and Blog writer.

 

Prime Minister of India


CONGRATULATIONS

        TO
MODI SAHIB
        AS
     15TH
 
PRIME MINISTER

        OF
GREAT INDIA.
 
Oath ceremony done on 26th May, 2014. 16th Lok Sabha

Save Water for your children


 

 

 

SAVE WATER

OR HUMANITY

WILL NOT BE

SAVED.