Self Discipline
सर मेरा बहुत समय तो सोशल मीडिया, दोस्तोँ को फ़ोन, socialisation (एक दूसरे से मिलने में, बिबाह शादी) में निकल जाता था।
अब बंद किया है।
किसी ने बताया, सोशल मीडिया तो सूर्या की किरणों की तरह है जिसे रोका नहीँ जा सकता है, परन्तु आप तो रुक सकते हैं।
आप अपना देखो, किस से आपको पूरी उम्र फायदा मिलना है।
नहीं तो मैं कंप्यूटर गेम बहुत खेलता था।
उसके बाद थक जाता था।
जो मेरे जीवन के लिए अच्छा है, उसकी तरफ ध्यान नहीँ। अब नहीँ खेलता।
TV को कोसने की बजाए, अपने आप को अनुशाषित किया।
किसी की छोटी सी बात पर भड़क पड़ता, और घण्टो समय बर्बाद। दोबारा घण्टो पढ़ने का मूड नहीं बनता था।
धूप आती है तो हम सूरज को थोड़े कोसते हैं।
बल्कि परदे खेंच देते हैं। धूप बन्द। इसी तरह मैंने किसी भी चीज या हालात को कोसना बन्द और हर समस्या का हल खुद ढूंढना शुरू कर दिया।
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दुसरीं गलती।
पढ़ा लिखा होने से दूसरों की बेबजह नुकताचीनी करता था।
सीखता कम, सीखाता अधिक।
कोई सीखा है या नहीँ, पर बिरोधता जरूर बढ़ती गय
अब जब महसूस होता है कि जहां बहस हो सकती है, मैं उठ कर चला जाता हूँ।
मन करे, न करे पढ़ने बाली जगह बैठा रहता हूँ। 10/15 मिन्ट बाद मन पढ़ने के लिए बन जाता है।
बहुत समय होता है। 30 मिन्ट पड़ता हूँ, फिर 5 मिन्ट रेस्ट। आंखों पर पानी डालने से तरोताज़ा महसूस करता हूँ।
माइंड मैप तकनीक बहुत अच्छी है।
10 मिन्ट सुबह 10.मिन्ट शाम को पेंसिल/पेन लेकर आँखें बंद करके बैठता हूँ।
जो बिचार आते हैं, उन्हे उसी समय लिख लेता हूँ। बहुत काम के होते हैं यह बिचार।
TV, फोन, सोशल मीडिया और गेम बन्द करने से मन बहुत शांत रहता है।
2 महिने के बाद यानी 13 दिसम्बर के बाद भी यह सब जहां रहेगा।