लेबल

शनिवार, 26 दिसंबर 2020

घर बैठे बैंक पेपर की तैयारी करें

 Health- the key component for SUCCESS in any field of life- be it a competitive exam or sport/game.


World Health Organization(WHO) aspires to have 'health for ALL' living on planet Earth and acts as watch dog and chief regulator for framing "health policies" to be implemented by all the Governments for ensuring physical and mental health of each and every individual.

My health is my responsibility. 
None else can make me healthy.

Simple principles for gaining good health.

Body has two dimensions:
Concrete: Physocal touchable body.
Abstract:. Mind /Thoughts.

Nourish your body and soul to EXCEL.


1 
Make your food medicine or medicine will become food.

2
 Health comes from kitchen. 
Eat home cooked light food .

3
Food feeds body and mind.
 Be always aware : what you eat and drink.

4
Drink about 15 to 20 glasses of water. It will smoothen digestion.

5
Eating is  important but  digestion is more important. 

Mind well what you eat.

6
Exercise daily.  
Walking/cycling/running are good for health. They make you more strong and prudent.



7
Sound Sleep charges body.
 Sleep soundly for 6 to 7 hours.

8
Track your thoughts.Thoughts are things.

 Focussed thoughts will become realty. 

Hence, be wise to think right thought when manifested becomes the realty as wished or desired by you.
9

Good thinking ,
 good health-

 mental and physical.-

good exercise makes muscles (body)  and mind strong .

 It also boosts stamina and capacity to work harder, smarter and for  long hours.

10

Apply these health principales your daily habits and reap the benefits to EXCEL in achieving your goal/aim/mission.

शारीरिक और मानसिक फिटनैस जीवन में  किसी भी लक्ष्य प्राप्ति के लिये आवश्यक है।

लक्ष्य चाहे कोई
 एग्जाम हो, 
कॉम्पटीशन हो 
या 
खेल  प्रतियोगिता।

                WHO का मिशन
संसार के सभी प्राणियों की हेल्थ की जिमेबारी WHO की है।

 इस आर्गेनाइजेशन का  हेड आफिस Geneva, Switzerland में है।


वर्ल्ड हेल्थ आर्गेनाइजेशन(WHO) का मिशन है:


संसार के सभी प्राणियों को 
ऐसी सुविधाएं उपलब्ध करवाना 

जिससे उसकी हेल्थ 
-शारिरिक व मानसिक - 
       फिट रहे।

यह आर्गेनाइजेशन दुनिया के सभी प्राणिनियों के लिए सेहत हेतु नीतियां बनाता है और संसार के  हर देश का HDI(Human Development Index) भी तैयार करता है।


**मेरी सेहत, मेरी जिमेबारी**

स्वास्थ्य के सरल सिद्धान्त।

1 अपने भोजन को अपनी दवाई बनायें
बर्ना
दवाईयां आपका भोजन बन जाएंगी।

सेहत घाती आदतों से दूर रहें
जैसे नशे, धूम्रपान, शराब आदि

2
सेहत घर के किचन में तैयार होती है।
हल्का घर का पका भोजन खाएँ।

3
भोजन और भजन शरीर, मन औऱ आत्मा को उच्च रखता है।


हमेशा सचेत रहें कि आप क्या खा रहे हैं, क्यों खा रहे हैं और इसका शरीर के पश्चात मन और बुद्धि पर लघु काल और दीर्घ कालीन प्रभाब क्या हो सकते हैं।

जैसे शास्त्र के कथनानुसार अधिक मांसाहार दीर्घकाल में बुद्धि और स्मृति  का ह्रास कर देता है, गंभीर रोगों को जन्म देता है।

 इसका सेवन सचेत रह कर करना चाहिए।

4
भोजन खाने से अधिक भोजन पचाना महत्ब पूर्ण है। तभी भोजन ऊर्जा में परिवर्तत होता है। 

5
भारतीय परिपेक्ष में कोसा (luke warm) पानी भोजन करने से 45 से 60 मिन्ट बाद पियें। ताकि भोजन पच कर ऊर्जा में परिवर्त हो चुका हो। 

दिन में 15 से 20 गिलास पानी पीने से पाचन शक्ति सुचारू रहती है। 

पानी ठंडा न पीएं।
 केवल मजबूरी में ही पीएं।

6
हर रोज व्यायाम करना सेहत और स्टैमिना बढाता है।
सैर करेँ
साइकिलिंग करेँ
योगा करेँ
दौड़ लगाएं।

सभी  आंतरिक शक्ति बढ़ाते हैं।
 रोग दूर भगाते है।
आपको हृष्ट पुष्ट बनाते हैं।

Swami Vivekanandji कहते हैं:

Weakness is death
Strength is life.

क्षणीता मृग शैया समान है
स्व शक्ति जीवन है।

7
गहरी स्वपन रहित नींद शरीर को सुचारू करती है।
कम से कम 6 से 8 घन्टे अच्छी गहरी नींद लें।

उधाहरण:
 यदि कंप्यूटर या स्मार्ट फ़ोन का ब्यवहार असाध्य महसूस करें तो ज्ञानबान इन्हें बंद करके पावर ऑफ कर देते हैं और आप सो जाते हैं।।

सुबह यह ठीक ठाक चलना शुरू कर देते हैं।

इसी तरह गहरी नींद शरीर को रिचार्ज कर देती है।

8
बिचार बस्तुएँ हैं।
 बस्तुएँ बेतरतीब हों तो ढूंढने में मन परेशान हो जाता है। 

ढूंढ़ने में समय अधिक लगता है।
 इस लिए हम बस्तुयों को ढंग से तरतीब में रखते हैं।

Thoughts

बिचार कैसे आ रहे है 
क्यों आ रहे हैं।

लाभकारी बिचार है
या
हानिकारक है।

मानवीय हैँ 
या 
अमानवीय।

इसकी ट्रैकिंग स्वयं इंसान कर सकता है, कोई नही।

लिख कर देखें। 
आप स्वयं हैरान रह जाएंगे यह देख कर कि मैं ऐसा/ऐसी हूँ।
सच का सामना करना कठिन हो जाएगा।

उस लिखे को जला दें या फ्लश कर दें। ताकि किसी के हाथ न लग जाये।
9
शुद्ध, सूचज्जी सोच शरीर औऱ मन को शशक्त करती है।

इससे काम करने की शक्ति, प्राणशक्ति और कई घन्टे बिना ब्रेक काम करने की शक्ति बढ़ती है।

10
अपने जीवन लक्ष्य में सफलता के लिए इन सरल सिद्धांतो को रोजाना जीवन की रूटीन बना लें।

 लाभ होगा।









Disclaimer

इस ब्लॉग में दी गई कोई भी सूचना या सूचनाएं केवल पढ़ने बाले के ज्ञान बृद्धि के लिए।

 इन सभी सूचनायों के सत्यता और  तथ्यों को प्रयोग करने से पहले स्वयं वेरीफाई जरूर कर लें।




















शुक्रवार, 25 दिसंबर 2020

घर बैठे बैंक पेपर की तैयारी करेँ

 Knowledge of Study Record

1
Psychological experiments indicate
that a student who keeps written record of his learning progress, learns more rapidly than the one who is in dark about her/his progress in study and preparation of a competitive exam.

2
It can be that a student who does not know where he is standing cannot reach his/her destination.

3
So keep written record of the progress made in study or preparation of an exam and be better than the one who does not keep the written progress record.





4
स्टडी  का लिखित रिकॉर्ड 

रखना आपको दुसरों से बेहतर बनाता है।

5
मनोबैज्ञानिक प्रयोगों द्वारा यह सिद्ध हो चुका है कि जो बिद्यार्थी अपने पढ़ने या एग्जाम तैयारी की प्रोग्रेस का लिखित रिकॉर्ड रखता है 

वह दुसरे विद्यार्थियों या खिलाड़ियों से अधिक बेहतर प्रदर्शन करता है।

6
जिसे पता ही नहीं है कि बह 

कहाँ पर खड़ा है, 
किस दिशा में जा रहा है

 बह अपनी मंज़िल या लक्ष्य क्या पाएगा?

7
इसलिए अपने लक्ष्य प्राप्ति के लिये  जो भी पढें या करेँ उसे एक कॉपी पर नोट करेँ और बार बार पढ़कर अपने में लक्ष्य प्राप्ति के लिए सुधार करेँ।

 

बुधवार, 23 दिसंबर 2020

घर बैठे बैंक पेपर की पढ़ाई करेँ

Quick Time 

Leveraging Secret

समय बचाने और बड़ाने का रहस्य


जब भी पढें तो हाथ में पेंसिल ले कर पढें।


पढ़ते जायें, इम्पोर्टेन्ट पॉइन्ट पेंसिल से अंडरलाइन करते जाएं।


इस तरह से अंडरलाइन किये हुए पॉइंट आप को बता देंगे कि यह चैप्टर या पेज पढ़ा हुआ है। और आप एक ही चैप्टर को बार बार नहीँ पढेंगे।


बहि समय दुसरे चैप्टर या पेज पढ़ने में बिताएंगे।


इस तरह समय बचता भी है और बढ़ता भी है।



 

घर बैठे बैंक पेपर की तैयारी करें

 Motivation-

Attitude Determines Altitude

प्रेरणा स्त्रोत

सोच ,
लक्ष्य 
और 
 सफलता 


1
लक्ष्य प्रारप्ति में सफलता
और सोच 
का  रोल बहुत ही महत्व पूर्ण है।

सकारत्मक सही दिशा की सोच सफलता देती है।

 नकारत्मक सोच दुःखों और मानसिक बीमारियों की जड़ है।

सकारत्मक सुखों का संसार।


2
यथार्थ जैसा है सभी के लिए  बैसा ही है। कुछ इसी यथार्थ का सद्पयोग करके सफल और सुखी बन जाते हैं। और दूसरे संघर्ष शील जीवन जीते रहते हैं।

अपने आप का विश्लेष्ण कर सोच बदली जा सकती है।

3

 रबैया बदलने से सफलता उसी यथार्थ से मिल जाती है।

4
कैसे?

एक धर्म स्थल के निर्माण में 3 मजदूर लगे हैं।

तीनों को एक ही पगार/मजदूरी मिलती है।

5
एक यूनिवर्सिटी के सोशल रिसर्चर ने 

5.1
पहले मजदूर से पूछा: 
काम कैसा लगता है?

मजदूर ने उत्तर दिया:

 मेडम जी मजबूरी है।
 काम नही करूँगा तो बचों को खाना कहाँ से ख़िलायउँगा?

रिसर्चर ने अपनी नोट बुक में लिख लिया।

5.2 
दूसरे मजदूर से पूछा:
काम कैसा लगता है?

मजदूर ने उत्तर दिया।

बहुत अच्छा।

 कम से कम मेरे पास काम है।
बहुत से लोग तो बिना काम के हैं।

मैं पूरा दिन परिश्रम करता हूँ।
स्वभिमान बढ़ता है कि मैं भिखारी नहीँ हूँ।

इस उत्तर को भी रिसर्चर ने नोट बुक में लिख लिया।

जो आप बोलते हैं, ब्रह्ण्ड बहि देता है।
 अंतर्मन सुनता होता है। 

इसलिए सकारत्मक उर्जाशील ही बोलें।

दुख,  कमियां ,मजबूरियां गिनयोगे तो यथार्थ में यही मिलेंगे।

5.3
अब रिसर्चर तीसरे मजदूर के पास पहुंची।

यह मिस्री (mason) था। 


बह हर इंट को अपने गमछे से साफ करता, 
आँखें बंद कर कुछ बुदबुदाता और ईट
को मंदिर निर्माण में लगा देता।

रिसर्चर यह सब देख रही थी और फिर बहि प्रश्न पूछा जो पहले दो मजदूरों को पूछ चुकी थी।

आपको काम कैसा लगता है?

मैडम जी यह काम नहीं मेरी पूजा है, मेरी श्रद्धा है।

मेरा सौभाग्य   है कि मूझे धर्म स्थल बनाने के लिए धर्म स्थल बनाने बाले ने चुना।

रिसर्चर सुन कर धंग रह गई।
 यह उत्तर भी उसने अपनी नोट बुक में लिख लिया ।

सारे उत्तर रिसर्चर ने यूनिवर्सिटी को दे दिए और यूनिवर्सिटी ने अपने* डेटा बैंक* में डेट डाल कर रिकॉर्ड कर लिए।

6
अब 11** बर्ष बाद यूनिवर्सिटी ने अपने रिसर्चर को यही डाटा दे कर उन तीनों मजदूरों से मिलने भेजा ताकि बह जान सके कि सोच का जीवन में क्या अंतर(effect इफ़ेक्ट) पड़ता() है।

7
रिसर्चर पहले मजदूर के घर पहुंची।

 मजदूर बीमार था।
 काठ पर लेटा था।
 खांस रहा था।।

पत्नी ने बताया 
" महीने में 20 दिन ही काम पर जा पाते हैं।

उम्र बढ़ने के कारण काम भी कम मिलता है क्योंकि जवान लोगों को काम मिलता है। 

जो कमाते हैं वह बीमारी पर लग जाता है।

खाने के हमेशा लाले पढ़े रहते हैं।"

रिसर्चर ने सब कुछ नोट कर लिया।

8
अब रिसर्चर दूसरे मजदूर के घर पहुँची।
 बह अपने घर नहीँ था 

घर बालों ने बताया आफिस में है।
रिसर्चर आफिस पहुंची।

रिसेप्शनिस्ट ने कहा: 
इंतजार करेँ।

रिसर्चर सांमने लगे सोफे पर बैठ गईं।

कुछ समय के बाद रिसेप्शनिस्ट ने रिसर्चर को अंदर जाने के लिए इशारा किया।

अन्दर का नजारा देख रिसर्चर खुश भी हुई 
और हैरान भी।

9
बहुत ही भव्य आफिस।

बड़ा टेबल। 
शाही कुर्सी।
और उस पर टाई कोट लगाए 
एक जेंटलमैन बैठा 
कुछ वर्कर को गाइड 
कर रहा था।

10
उस जेंटलमैन ने सभी बर्कर को गाइड करके भेज दिया और रिसर्चर को फ्रंट सीट पर आ कर बैठने को कहा।

रिसर्चर को परिचय देने को कहा।
परिचय जानने के बाद रिसर्चर का स्वागत किया।

11
रिसर्चर ने 11 बर्ष की जीवन यात्रा के बारे में पूछा।

"जब मैं 11 बर्ष पहले आप से मिली थी तब तो  आप के सिर पर ईंटे रखी थी। 
और आप पूजा स्थल पर भवन निर्माण  को ले जा रहे थे।

इतना बदलाब कैसे?"

यह दूसरा साबका मजदूर हँसा और बोला:
"
*बह और मैं *            जब काम करते हैं तो सफ़लता मिलती ही मिलती है।"

"बह कौन?"
 रिसर्चर ने पूछा।

"जिसने मुझे बनाया है और जिसमें मेरी पूरी आस्था है।
सुबह उसको याद कर परिश्रम- 

शारीरिक ब मानसिक -
 करना शुरू कर देता हूँ। 

*बह *हमेशा मेरे साथ रहता है।
और मैं सफलता की सीढ़ियां चड़ता जाता हूँ। 
सभी मुझे सफलता का श्रेय देते हैं। 

परन्तु मैं अपनी सफलता का श्रेय 
"उसको" 
मानता हूँ।

उसको न मानने से मेरे में नम्रता कम होती जाती है अहँकार और मन के बंधन बड़ते जाते हैं।

 "बह" की भावना  मुझे - sense of possession and frugal pride- से बचाती है।

* मैं,
 मेरा,,
 तेरा 
की बजाए
 हम, हमारा" 

की भावना को बढ़ावा मिलता है।

हां तो 11 बर्ष की जीवन यात्रा।

A 
जब आप मिली थी मैं मजदूरी करता था। 
10बी पढ़ा था। 

मजदूरी से कुछ पैसे इकठ्ठे किये और ईवनिंग कालिज जॉइन कर लिया। 

सारा दिन काम और शाम को कालिज में पढ़ना।
पहले मजदूर होने की शर्म आती थी।

परन्तु सभी बातें करते हैं।

 फीस कोई नहीँ देता।
इसलिए मैंने अपने काम यानी मजदूरी से प्यार करना शुरू किया।

पैसे मिलते थे। 
मैं BA कर गया।
फिर MA कर लिया।

गरीबी पढाई में रूकावट थी।

झूठी शान- 
मेरी ईज़्ज़त, 
मेरी बेइज्जत, 
लोग क्या कहेंगे की भावनायों पर काबू बड़ी कठिनाई से किया। 

और सफलता आसान हो गई । 

मैं अपने पर और अपने काम पर फोकस करता हूँ।

 दूसरे क्या सोचते हैं, 
कैसे सोचते हैं 
मैं सोचता ही नहीँ हूँ।

मैंने देखा पहले मैं लोगों को बताता हूँ फिर लोग बेबजह उसमें नुकताचीनी करते हैं और मैं हताश और दुखी हो जाता हूँ

अब मैं बोलता नहीँ, 
बताता नहीँ, 
केवल करता हूँ। 

और सफल हो रहा हूँ। 
केवल करने और चुप रहने से बहुत तरक्की होती है।


B

क्योंकि मुझे मजदूरी करते भवन निर्माण का अनुभव था एक ^रियल एस्टेट^  कंपनी में नौकरीमिल गई। 

पढाई और नौकरी दोनों साथ साथ।

C

कुछ बर्षों बाद मैंने अपना काम शुरू कर लिया और ^रियल एस्टेट मैनेजमेंट^  में कॉरेस्पोंडेंस कोर्स(पत्राचार) के द्वारा डिप्लोमा किया।

अब अपना काम अपना आफिस है।

तब तक चाय आ चुकी थी। 

रिसर्चर ने चाय पी और धन्यबाद किया।

यह सब रिसर्चर ने अपनी नोट बुक पर लिख लिया।

खुश थी रिसर्चर कि एक मजदूरी करने बाले ने अपनी सोच के *बल* पर कितना बड़ा एम्पायर खड़ा कर लिया है।

 11 साल पहले ही सोच सकारत्मक थी।।
यह उसी का नतीजा है।

11
अब रिसर्चर ने इस दूसरे मजदूर से पूछ कर तीसरे बर्कर के घर का रुख किया।

उसके घर पहुंची तो देखा बहुत सुंदर घर है। 

बेटी बाहर निकली और बड़े सलीके से रिसर्चर को घर के मेहमान- घर मे बिठाया। 

बड़े अदब से ट्रे में रख कर शुद्ध जल परोसा।

बेटी ने बड़े अदब से अपनी मम्मी को बुलाया।
जब मम्मी आई, 
उसने बताया: 

साहिब तो अपनी इंस्टीट्यूट में बच्चों को पढ़ाने गए हैं।

बेटी तब तक चाय लेकर आ चुकी थी। 
उसकी मम्मी औऱ रिसर्चर ने चाय की चुस्कियां ली।

रिसर्चर ने धन्यवाद किया और इंस्टिट्यूट में तीसरे वर्कर से मिलने चल पड़ी।

12
जब इंस्टिट्यूट पर पहुंची तो गेट पर अपनी पहचान दी।
 पहचान रजिस्टर में आने का समय नोट किया।

देख कर धंग रह गई
 यह एक बहुत बड़ी इमारत थी ।

खुले खुले
 खेल के मैदान । 
यह कालिज नुमा थी।

रिसर्चर ने सोचा कि 11 बर्ष पहले बाला बर्कर जहाँ नौकरी कर रहा होगा।

13
पूछते, पूछते यह एक भव्य आफिस के बाहर थी। जिसके बाहर एक पियोन बैठा था।

रिसर्चर ने अपना विजिटिंग कार्ड पियोन को दिया। पियोन ने यह कार्ड अपने साहिब को दिया।

साहिब ने तुरंत रिसर्चर को आफिस में बुला लिया।
आफिस देख रिसर्चर अचंबित थी।

14
कुर्सी पर बैठे आदमी ने रिसर्चर से पूछा: 
क्या पियेंगी।

रिसर्चर बोली:
 नींबू पानी।

तभी कुर्सी पर बैठे ऑफिसर ने पियोन को दो गिलास नींबू पानी लाने को कहा।

पियोन ले आया।

दोनो नींबू पानी सिप कर रहे थे और जीवन यात्रा पर अपने अनुभव शेयर कर रहे थे।

15

"जरा 11 बर्ष की जीवन यात्रा पर रोशनी डालें"
रिसर्चर ने कहा।

"जरूर जी"

जब आप पहले मिली थी। 
तब मैंने इंजीनियरिंग (B.E/B.Tech) की डिग्री की हुई थी।

पर *सरकारी नौकरी* मिल नहीँ रही थी। मैंने सोचा सरकारी नौकरी का इं त जार करने की बजाए क्यों न अपना काम करूँ।

आज आफिस है और मैं आत्मनिर्भर हूँ। 
नौकरी लेने के सुपने की बजाए नौकरी देता हूँ।

कमाई करता हूँ।
 नेशन पर बोझ नहीँ। 
कमाई करके टैक्स देता हूँ।

 हमारे एक प्रोफेसर कहा करते थे: 
।
परिवार औऱ देश पर बोझ न बनना।

स्वरोजगार करो। 
दुसरों को रोजगार दो।

काम काम होता है।
।काम को प्यार करोगे जीवन हमेशा सुखी रहेगा।

 आज छोटा करोगे। 
अनुभव होगा। 

उस अनुभव से आगे बड़ जायोगे। 
नहीँ तो डिग्रियां गिनते ही दुःखी रहोगे।

डिग्रियां केवल जहाँ जरूरत है बहां बतायो और दिखायो।

 डिग्रियां का बखान करके बेबजह अहंकार को या दूसरों को रौब दिखाने के लिए प्रयोग न करो।

इनसे प्राप्त ज्ञान अपने काम मे लगायो, 
दूसरे केवल बातें करने बाले, लिफाफे बाजों से बहुत आगे निकल जायोगे

काम कोई छोटा
 या बड़ा नहीँ होता। 

हमेशा छत पर जाने बाली सीढ़ियों के बारे में सोचो।

पहली , दुसरीं ..........
सीड़ी से चढ़ कर ही छत पर पहुंचा जा सकता है।
 एक दम छलांग लगा कर नहीँ।

केवल यही बड़ी  सोच
 आज मुझे जहाँ पर "चेयरमैन " की कुर्सी पर बैठाए है।

मैंने पार्ट टाइम M Tech किया PGDBM किया आज चेयरमैन हूँ  ।

अपने आप पर फ़ोकस करो।

Listen to everyone but never deviate to do what you are doing.

Nobody knows everything;
But everybody knows something.

Listen well to gain from that something.
Never compare with others. Neither copy.

Be original.

रिसर्चर देख रही थी कि 11 साल पहला मेसन जो आज  *चेयर मैन * है जब यह बता रहा था
।
 तो उसकी आँखों में 
खुशी,
 संतुष्टि और बिजेता
 होने की चमक झलक रही थी।

16

इन 11 सालों में की स्टडी का विश्लेषण रिसर्चर ने यूँ किया।
16.1

 जो परिश्रम और जीवन को नकारत्मक नजीरिये से देखते हैं वह असफलता और दुःखी जीवन को आमंत्रित करते हैं। (उदाहरण पहला मजदूर)

16.2
जो परिश्रम और जीवन को सकारत्मक व उज्जवल नजीरिये से देखते हैं बह मन चाहा जीवन जीते हैं।
(उदाहरण दूसरा मजदूर)

16.3
जो परिश्रम लग्न और मगन कर नम्रता से करते हैं, जीवन में उन्नति ही उन्नति करते हैं। 
(उदाहरण तीसरे मजदूर की सोच, लग्न और दिखाबे रहित मेहनत)
*
Work in silence
Let the results speak aloud.
@
Your World will know and appreciate it.

#
Surround yourself with positive, vibrant winning thinkers and achieve victories.

$
Never boast of victories. But do celebrate victories.

%
Verbal etiquettes bring laurels in life.

सोच संसार बनाती है,
 इसे बड़ा बनाएंगे
तो बड़ा पाएंगे।

बड़ा बनाने के लिए उच्च जीवन का साहित्य पढें।

Attitude determines altitude.

तुम्हारी सोच तुम्हारे जीवन की ऊँचाई बताती है।

Setbacks when emcourage to re-attempt and succeed, legends are born.

कोशिश करने पर ठोकरें और झटके तो सम्भब हैं, अवश्यम्भावी है। जो इन कठिनाईयों और झटकों को ठेंगा दिखा गया बह जीवन में सफलता और सुख पा गया।

Strong minded, strong willed never QUIT.


जो सोचो गे, बहि पयोगे।

अपने आप से बड़ी बाते करेँ।
 अपने गुणों पर फोकस करे।

सोने से पहले आईने में देखें।
 सोचें आज क्या सीखा।

थैंक यू गॉड,
थैंक यू गॉड
थैंक यू गॉड

दिन भर क्या अच्छा किया क्या गलत किया सोचें।
कह कर आगे गलत न करें की शपथ लें।
जिसने आपके साथ गलत किया है उसे माफ कर दें। आपकी स्वयं की जीवन ऊर्जा बड़ जाएगी।

नींद अच्छी आएगी। सुबह तरोताजा होंगे।

धन्यबाद।

Never Never Give Up

प्रयत्न बिलम्ब कर दें परन्तु क़भी न छोड़ें।























 







रविवार, 20 दिसंबर 2020

घर बैठे बैंक पेपर की तैयारी करें

 Sharpen and hammer 

Your

Untrained &

Unorganized stranded thoughts &

Memory skills

To focus more thoughtfully 

On your goal/aim/target.


दो पत्थरों की कहानी, 

पत्थरों की जुबानी

1

चिलचिलाती धूप थी।

2

पूजा स्थल के बाहर 

श्रद्धालुयों का तांता लगा हुआ था।

3

बहुत से श्रद्धालु पंक्ति में खड़े थे और उनके पैरों के तले पत्थर थे।

4

जवान पत्थर ने बजुर्ग पत्थर से पूछा: 

महानुभाव एक तो चिलचिलाती धूप और दूसरे यह भारी भरकम श्रद्धालु हम पर पैर रखे खड़े हैँ।

5

है तो अंदर भी पत्थर जिसके यह दर्शन के अभिलाषी हैं।

हम में और उस पत्थर में क्या अंतर है? 

कृपया बताएँ।

6

बजुर्ग पत्थर ने लंबी गहरी सांस ली और बताने लगा:

सुनो बेटे :

आज से करीब 20 साल की बात है मैं और बह अंदर रखा पत्थर दोस्त थे।


हंसते थे, 

गाते थे, 

मस्ती करते थे।


दिन हंसी खुशी  गुजर रहे थे।

 कभी सोचा भी न था कि कभी बुढ़ापा भी आयेगा और यह दिन देखने पड़ेंगे कि मैं यहाँ चिलचिलाती  धूप में और बह अंदर शहनशाही भव्य पूजा स्थल में।

7

हताश युबा पत्थर ने पुछा: 

परन्तु हुया क्या? 

कृपया बताएंगे।

8

एक दिन एक शिल्पकार आया औऱ उसने मुझे उठाया और अपनी प्रयोगशाला में ले गया और हथौड़े और छैनी से छीलने लगा।

9

शिल्पकार जैसे ही छैनी से छीलता मैं चिल्लाने लगता।।मेरी आँखों में आँसू आ गए। मैं बार बार चिल्लाता:

 यह सहना  मेरे बस से बाहर है।

मेरी चीखों को सुन कर शिल्पकार क्रोदित हो गया और उसे मुझ पर तरस आ गया।

10

बह शिल्पकार मुझे अपनी प्रयोगशाला से उठा कर जहाँ छोड़ गया और दूसरे पत्थर जिसके दर्शन के लिए यह सब खड़े हैं को उठा ले गया।

11

जब शिल्पकार ने हथौड़ा और छैनी चलाई तो यह सहन करता गया और अंत में बह मूर्ति बन गया ।

और मूर्तिकार ने बह मूर्ती इस पूजा स्थल पर रख दी।

12

आज करीब 20 साल से मैं बाहर चिलचिलाती धूप में हूँ और बह मेरा दोस्त अंदर श्रद्धालुओं की श्रद्धा का पात्र है।

क्योंकि उसने हथौड़े और छेन्नी की मार को सहन किया।

बच्चो  

1 बिद्यार्थी पत्थर समान है।

2 मुर्तिकार या शिल्पकार आपका ट्रेनर/टीचर है। 

कठिन परिश्रम है।

3 पढ़ना या कोई हुनर सीखने के लिए कठिन परिश्रम की आवश्यकता है।

4 प्रयोगशाला=स्कूल/कालिज/ट्रैनिंग सेन्टर/उस्ताद

 यानी हथौड़े और छैनी की मार है।

4

जो हथौड़ी औऱ छैनी की मार खुशी खुशी सहन कर लेता है, बह मूर्ति बनकर पूजा के काबिल बन जाता है।

नहीँ तो चिलचिलाती धूप में चिल्लाता रहता है।

चॉइस आपकी अपनी है।

 कौन सा अपनाना है।


Be mentally, emotionally and in tellectually strong to ACHIEVE what appears Impossible.


Impossible= I am possible

(if you disect me. Dare.)







शनिवार, 19 दिसंबर 2020

घर बैठे बैंक पेपर की तैयारी करें

 Sure success 

is certain today, 

tomorrow or in future

TO

those

who keep walking slowly

but steadily

AND

never stop persevering.


सफलता उनके पांब चूमती है

जो अहिस्ता अहिस्ता परन्तु 

लगातार अपनी मन्ज़िल की तरफ कदम बढ़ाते रहते हैं।

और बिना मंज़िल पाए अपनी कोशिशें नहीँ छोड़ते।


धीरे धीरे रे मना, धीरे सब कुछ होय

माली सींचे सौ घड़ा, रुत आये फल होय।


घर बैठे बैंक पेपर की तैयारी करें

 Secret of Success 

and happiness

"       Accept

Yourself in

Absolutely."


And never compare.

Accept your greatness with utmost humility.

And you will enjoy better sleep

 and happiness in life.


सफलता और खुशी का सीक्रेट

जैसे भी हो अपने आप को पसंद करो, 

प्यार करो।


बहुत सी ऊर्जा तो नबी मन और दिमाग की लड़ाई में

ब्यर्थ चली जाती है।


दिमाग लॉजिक देता है करो

बहिं मन कहता है न करो


के

Subjective wishes को

Objective reality के साथ conflict से स्वयं की ऊर्जा या उत्पादकता कम हो जाती है।


इस लिए सफलता के लिए इस 

मन औऱ बुद्धि के द्विन्द पर विजय जरूरी है।


दुसरों के साथ तुलना करके अपने में

 हीन भावना को न पनपने दें।


अकेले पैदा हुए हो, 

अकेले चलो, 

अकेले चले जाने में खुशी महसूस करो।

 हर पल हर दिन खुशी भरा रहेगा यदि यह सोच रखो गे।

आत्म शक्ति बढ़ेगी।

मैं से' हम 'सोच को बढ़ावा ही 

अथाह शक्ति को पनपने देती है।




 

कुछ अपने को शीशे में देख कर दुःखी।

कुछ दुसरों के जीवन स्तर से तुलना करके दुखी।

Everybody does not know everything

But 

Everybody knows something 

The visible world is the total sum of something DONE by everybody.

मैं नहीँ "हम" की भावना इंसान को आगे बढ़ाती है।

हम से हमारा बनता है। जैसे हमारा भारत।

हमारा ब्रह्ण्ड।

बासुदेव कुटुम्बकम।

 अर्थात सारा जहान एक परिवार है।









गुरुवार, 17 दिसंबर 2020

घर बैठे बैंक पेपर की तैयारी।करें

 Think First

Think Fast


थिंक फर्स्ट 

थिंक फ़ास्ट


थिंक बिफोर यू स्लीप

जो चाहिए उसके बारे में

सोने से पहले जरूर सोचें।


घर बैठे बैंक पेपर की तैयारी करें

 Personality Development


(Inner Personality- known to you only but like the fragrance of flowers impacts your image and relationships with family, friends, society nation and world)



Power of AIM in life.

1

Aim, Goal, Mission, Target 
or 
whatever name the desired objective is known; 

BUT it has great importance and power in life.

2
Most important self deciding question is
 

2.1   Who am I?
Use this guiding help chart:

2.1.1  I am_______________
2.1.2  I am _______________
and so on


Think 
       and
Write minimum 10 strenths

Write as many as your strengths as you like but not less than 10.


2.1.2

"What is my aim in life?

 or 

Objective to be achieved in life?"

3
☺️ Think about a Train without proper destination board and  engine.☺️

Will you buy a ticket and board this train?

" No not at all", 
your mind will say.

4

So, have a "vision board" , 
better nail it on wall or wooden plank 
         and write your
 aim,
 mission,
 goal, 
target

 on it.

5
Now your mind will START
 finding 

ways and means to achieve

THIS Written GOAL.

6
START with
 whatever you know, 
whatever you have 
and
 where you are.

7

DO NOT CHANGE 
the Goal often 

or many times

 BUT do change the strategy,
 ways and means 
to achieve the desired GOAL.

8
There can be many

 sub goals

 to reach 
or 
achieve the BIG Goal.

9
Check your behaviour and actions and ask yourself

 "Is this nearing me to my Goal?"

10

Strengthen your strengths of achieving by reading about the goal and writing with what is achieved . 

Date is important so that you may know whether you are in right direction or moving in misdirection.

11
Achieving goal becomes 
easier and sure 
by following these steps.

पर्सनालिटी डेवलपमेंट

(अंतर पर्सनालिटी जो एक फूल की खुशबू की तरह है और आपका दुसरों के मन में इमेज और रिश्ते सुधारता है)

जीवन में लिखित लक्ष्य का महत्ब।

1
ऐम,
 गोल, 
मिशन, 
टारगेट या 
अपने  चाहे लक्ष्य 

को किसी भी नाम से जाने परन्तु" लिखित लक्ष्य "को पाने में बहुत ही महत्ब है।

2
अपने आप से पूछे जाने बाले प्रश्न?

2.1

मैं कौन हूँ?

2.2

मेरे जीवन का लक्ष्य क्या है?
         या 

मेरे जीवन का उद्देश्य क्या है?

नमूना:
2.2.1        मैं_______________हूँ
2.2.2        मैं _______________हूँ

इसी तरह लिखते जाएं।
 कम से कम अपने 10 गुण लिखें।

अधिक

* जितने चाहो*

 लिख सकते हो। 20, 30, 50 आदि


3

☺️ 
जरा सोचिए क्या आप उस *ट्रैन या बस* का टिकट लेंगे जिस पर कहाँ जा रही का डेस्टिनेशन बोर्ड न लगा हो?

 नहीँ न। 

परन्तु जीवन बिना लिखित लक्ष्य के जी रहे हैं।

 यदि लक्ष्य अभी पता नहीं तो पढ़ते जायो सीखते जायो। 

लक्ष्य मिल जाएगा। 

इंसान एक जैसे होते हैं, केवल सोच बढ़ी छोटी होती है।

बोलिये न केवल सुनिए, दूसरे की सोच पता लग जायेगी।
👍
सोचिए और कम से कम 2 साल में क्या करना और कहां पहुंचना है को लिख कर रखें और उसे दिन में कई बार पढें।

 ताकि लॉ ऑफ अट्रैक्शन से ब्रह्मण्ड आपके लक्ष्य पूरे करे।☺️

4
इसलिए "विज़न बोर्ड "बनाएं 
और अपनी दीवार पर लगाएं। 

डेट जरूर लिखें।
बिना डेट कहानी है। 
जो हज़ारों सालों से सुनाई जा रही हैं।

5
अब आपका दिमाग जो शरीर का इंजन है बार बार इस लक्ष्य को पाने क़े तरीके ढूंढे गा। 

इसे भी लिखते जायो डेट डाल कर। 

दिशा निर्देश और दिशा मिलती रहेगी।

6
सबसे पहले अपनी नोट बुक पर

 जहां हो,
 जो हो, 
जैसे हो 

लिखो और आगे बढ़ने के प्रयत्न करो। अपनी मजबूरियों को न देखें। सोचो और लिखो कि आज से 5-7 साल कहाँ।होंगे।

इसके सुपने। 

जो मजबूरियां गिनबायें उनसे दूर रहें। 
देखो समझो सब,
 पर बोलो न, 
बतायो न, 
केवल करो।

एक चुप सौ सुख।

करने से जिंदगी बदलती है।



 अपने और अपनी मेहनत पर बिश्वास करो।
 दुसरों पर नहीँ।
 जैसे किस्मत, सरकार आदि।

पढ़ो
पेपर दो,
 पास करो, 

आज नहीँ तो कल नौकरी मिलेगी ही।

 हार्ड वर्क सभी करते हैं,
 स्मार्ट बर्क करेँ।
 यह पैसिव लर्निंग से होता है

हर रोज़ एक घण्टा पढ़ने से, पेपर हो न हों, एक साल में 365 घन्टे का ज्ञान एकत्रित हो जाता है।


कुछ 10 घन्टे में 1 चैप्टर पूरा करते हैं।
दूसरे कुछ 10 घण्टे में 10 चैप्टर पढ़ और समझ लेते हैं ।

 यह पैसिव रीडर होते हैं। 
मर्जी आपकी।

7
बार बार लक्ष्य न बदल कर,
लक्ष्य को प्राप्त करने का तरीका बदलिए। 

लर्निंग स्ट्रेटेजी या करने का तरीका मेरा कहना है।

अपनी कमीयों को दूर कर, 
स्वयं अनुशाशन से कठिन से कठिन लक्ष्य प्राप्त किया जा सकता है।

8
बड़े लक्ष्य को पाने के लिए कई छोटे गोल प्राप्त करने पड़ते हैं।

जैसे किसी पहाड़ पर चढ़ने के लिए संघर्ष पहले कदम से शुरू होता है

 जो छोटे छोटे क़दम लेने से नहीँ डरता बह ऊंचे पहाड़ पर पताका फहरा ही देता है।

9
अपने ब्यवहार और दिन में किये कर्मो को चैक करके अपने आप से पूछें कि

 " क्या यह मुझे लक्ष्य के नजदीक ले जा रहे है या भटका रहे हैं? "

जिन्दगी दिनों और पलों का तो पुलंदा है।

10
अपने लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए "गुणों" को बढ़ायो औऱ कमियों को सुधार कर घटायो।

11
उपरलिखित को फॉलो करने से "लक्ष्य प्राप्ति" सुगम हो जाती।

इसका प्रिंट लेकर बार बार भी पढ़ सकते हो या अपनी नोट बुक नोट भी कर सकते हो।













मंगलवार, 15 दिसंबर 2020

घर बैठे बैंक पेपर की तैयारी करें

 


Simple Principles of Life

☺️                  💐            ☺️

* Never   Think I Am Nothing

*Never Think I Am Everything




BUT

**Always Think I Am Something

And 

**I Can Achieve Anything......


जीवन जीने के 

बहुत ही आसान

सिद्धान्त


1  कभी न सोचें मैं सब कुछ हूँ।

2 कभी न सोचें मैं कुछ नहीँ हूँ

बल्कि 

हमेशा सोचें

3 मैं कुछ तो हूँ

और


4

मेहनत, ज्ञान और लगन से जीवन में जो चाहूं पा सकता हूँ।


Hence: 

Sharpen your mental saw by reading and preparing, observing and analysing.


इसलिए अपने बुद्धि रूपी आरे को किताबेँ पढ़ कर, आँखों कानों से सुने को ऑब्जेरब (ध्यान से देख कर)  करके और बुद्धि से विश्लेषण करके जो चाहूँ पा सकता हूँ।