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शुक्रवार, 20 मई 2022

Value what YOU have

 😃🏹🙂


स्वयं सुधार कथाएं और लघु कथाएं मानवीय मूल्यों के लिए  महत्वपूर्ण वौद्बिक संपदा है।


मुझे याद है कि बचपन में कैसे हम वच्चे एक दूसरे छीन छीन कर


 "चाचा चौधरी"

 "लोट पोट" 

"अमर कथाएं" 


जैसी वच्चो की छोटी कहानियां पढ़ा करते थे।


यह कहानीयां स्कूल की किताब से कहीं अधिक रोचक होती थी क्योंकि इनका कोई पेपर नहीं होता था परन्तु सीख याद रह जाती थी।


ऐसी ही एक लघुकथा आज मैं लिखने जा रहा हूं। 

केवल सीख के लिए।


लघुकथा का शीर्षक

*घर की मुर्गी दाल बराबर*


Value and respect what you have- Things, relationships, parents , teachers etc.


Old is gold 💕.


1

साहित्य बताता है कि मुल्ला नसीरुद्दीन शाह एक बुद्धिमान व्यक्ति थे।


 जो हर याचक की समस्या का समाधान देते थे।


इसीलिए बह अपने इलाके और अपनों में काफी सहायक और मशहूर थे।


2

मुल्ला नसीरुद्दीन शाह के पास एक गधा था जो उस जमाने में मुल्ला नसीरुद्दीन शाह के लिए  वही काम करता जो आज हमारे लिए साइकिल, स्कूटर या कार

 करती है।


3

मुल्ला नसीरुद्दीन शाह जी ने यह गधा 20-25 साल पहले खरीदा था।


4

अब गधा धीरे चलता और खाना पीना भी छोड़ दिया करता। 


मुल्ला जी हर रोज़ इसकी छोटी मोटी रोक टोक अपनी पत्नी के समकक्ष कर दिया करते और पत्नी फटाक से इस गधे को बेच कर नया गधा लेने की सलाह देती। 


और गधे को कोसती:


* अब यह किसी काम का नहीं रहा।


* अब वूढ़ा हो गया है।


* खाता ज्यादा है काम कम करता है।


*इससे छुटकारा पाओ और नया गधा ले लो ताकि हमारी जान छूटे।


5


मोह वश मुल्ला नसीरुद्दीन शाह 20-25 बर्ष का रिश्ता याद करके यह टालते रहते।


6

एक दिन तो हद हो गई। 


मुल्ला जी ने अपनी रोजमर्रा जिंदगी में करने वाले बहुत महत्वपूर्ण कार्य करने थे परन्तु गधा था कि जाने को तैयार ही नहीं।


7


उस दिन मुल्ला जी ने मन मना लिया कि अब मैं इस गधे से छुटकारा पा लूंगा।


8


दूसरे दिन ही मुल्ला जी गधे को लेकर मंडी पहुंचे और झल्लाहट में गधे को 500 रू में बेच दिया।


9

अब मुल्ला जी बहुत अच्छा फील कर रहे थे।


10

घंटा दो घंटे मुल्ला जी मंडी में इधर उधर देखने लगे जैसे नया गधा ढूंढ रहे हों।


11

तभी मुल्ला जी ने देखा एक जगह बहुत भीड़ जमा थी।


 मूल्ला जी तुरन्त वहां पहुंच गये।


12

देखा:


एक चमकता हुआ गधा जिसकी


* अभी अभी मालिश की गई थी,।

*

वैठने की सीट क्या नई और अनोखी थी , 


*आंखों पर जरी से जड़ित "Eye 👀 Cover" थे और उसका मालिक वोल रहा था:


सुनिए कदर दान जनाव सुनिए


"देखिए,

 देखिए इस जवान को।


कितना तगड़ा है, 

कितना सुन्दर है। 

कितना कमायू है।


इसकी वोली लगाएं।

जो सबसे अधिक वोली लगाए गा, गधा उसका होगा।



मुल्ला जी ने मन ही मन ठान लिया कुछ भी हो जाए इसी गधे को खरीद़ूंगा।


भीड़ में से एक वोला

 1000 रू


मालिक और कुछ दूसरों ने तिरछी नजरों से देखा जैसे कह रहे हों


 "क्या मज़ाक कर रहे हो?"


दूसरा वोला:

2000 रू


तीसरा वोला:

5000 रू


मुल्ला जी ठहरे इमोशनल आदमी।


 विजनैस स्ट्रेटजी या विजनैस सैंस तो है नहीं।


तबाक से वोले


10000 रू


मालिक वोला:


10000 रु एक,

10000 रू दो

10000 रू तीन और गधा आपका।


पैसा लिया और लगाम मुल्ला जी के हाथ।


13

अब गधा लेकर मुल्ला जी वड़ी ठाठ से इसके ऊपर बैठकर अपने गांव को प्रस्थान हुये।


गांव में प्रवेश करते ही बच्चे चिल्लाने लगे: 


मुल्ला जी ने नया गधा लिया है।


गांव के

 वूढे , 

बुजुर्ग,

 जवान सभी मुल्ला जी को बधाई देने लगे।


14

जैसे ही मुल्ला जी घर पहुंचे तो द्वार पर पत्नी ने नए गधे के आगमन की सभी औपचारिकता पूरी की।


15

परंतु यह क्या 


*गधा सीधा अपनी खाने की खुरली पर चला गया*


पत्नी का माथा ठनका।


उसने गहनता से जांच की तो पाया 


*यह तो हमारा ही पुराने वाला गधा है*


500 में वेचा और 

10000 रू में खरीदा।।


 हम तो ठगे गए।


16


अब जानकार तो मुल्ला नसीरुद्दीन शाह जी को सबसे अधिक लोकप्रिय और बुद्धिमान व्यक्ति समझते थे।


 जब उन्हें यह पता चलता कि मुल्ला जी ठगे गए तो उनकी साख को बट्टा लग जाता ।


17

इसी कारण पति पत्नी ने ठगे जाने के तथ्य को उजागर ही नहीं किया।


18

हुआ यूं कि जिसने वह गधा 500 रु में खरीदा, उसने उसकी धुलाई की, अच्छी तरह नहलाया, धुलाया, मालिश की, न ई काठी लगाई, आई कबर लगाये और 10000 रू में वही गधा मुल्ला जी को वेच दिया।


यानी उसी का गधा , उसी को।


इसको कहते हैं 

*घर की मुर्गी दाल बराबर* ।


19

शिक्षा:

जब हमारे पास कोई वस्तु, रिशता या नौकरी होती है तो हम उनमें से गुण नहीं अबगुण ढ़ूढते है। जब वही खो जाता है तो 20-25 गुणा अधिक मोल पर खरीदते हैं या पछताते रहते हैं।

जैसे घर के बुजुर्गों का तिरस्कार।


जापानी बिडियो देखी जिसमें एक लड़का वता रहा है :

कभी किसी के भरोसे अपना काम /नौकरी न छोड़ें।


 बहुत परेशानी और मानसिक तनाव होता है।


जब मैं नौकरी कर रहा था तो बहुत से दोस्त और रिश्तेदार कहते कि यह नौकरी छोड़ कोई और कर लो, हम तुम्हारी हैल्प करेंगे।


जब मैंने नौकरी छोड़ दी, तो सभी दोस्त और रिश्तेदार मेरे को हीनता से देखने लगे, हैल्प तो क्या करनी।


तीन महीने विना नौकरी ने इतना दुखी किया जितना मैं नौकरी के 4 साल में नहीं हुआ था।


20

इसलिए जो है उसका

 मान करो

सम्मान करो


अपमान नहीं


सुप्रभातम

सुस्वागतम

दोस्तो


🐣🙏

Disclaimer

 इस लघुकथा में प्रयोग किए किसी भी नाम या घटना का संवध किसी मृतक या जिवित इन्सान से नहीं है। ऐसा संवध महज़ एक संयोग होगा।                

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