पढाई एक नशा है।
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कोई किसी को ★पढ़ा नहीँ सकता★ जब तक पढ़ने बाले का पढ़ाई में ♀स्वयं रुचि न हो।
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रुचि के लिये पढ़ाई समझ आना जरूरी है।
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पढ़ाई न समझ आये तो एक बहुत ही आसान तरीका है - बार बार पढ़ते जायो।
जैसे जिस गाने में रुचि हो बार बार सुनने से कण्ठ(याद) हो जाता है, उसी तरह पढ़ाई है।
उधाहरण:
कभी स्वेटर को उधड़ने या उलझे धागे को साधा है? यदि हाँ तो याद करिए
👌
स्वेटर तब तक नहीँ उधड़ता जब तक इसका एक सिरा न ढूंढ़ पाएँ।
एक बार सिरा मिल गया, तो 5 मिन्ट में ही अनजान सारा स्वेटर उधड़ देता है।
👌
इसी तरह उलझी पतंग की डोर या उलझा धागा साधा जा सकता है।
💐
पढ़ाई भी ऐसे ही है।
एक बार समझ आने लग गई तो आपको पढ़ने में रुचि बढ़ जाएगी। आपके अपने रोकेंगे तब भी आप रुकोगे नहीँ।
😢
रुचि कैसे पैदा करेँ?
आप देखेंगे कि पढ़ने लिखने बाले उम्र बढ़ने के बाबजूद तरोताजा सोच रखते हैं।
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केवल पढ़ाई ही जिसका कोई अंत नहीँ।
पहले क्लास पढ़ने के लिये पढ़ते हैं।
फिर कंपीटिटिव एग्जाम के लिये यानी काम काज के लिये।
फिर खाली समय में मन, बुद्धि को कुशाग्र करने के लिये पढ़ते हैं।
किताबेँ,
अखबारें,
मैगज़ीन,
वीडियोस,
सोशल प्लेटफार्म
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ज्ञान
विज्ञान या
अज्ञान
का असीमित स्रोत है।
बुद्धि से सदुपयोग करेँ।
दुरुपयोग आपको बर्बाद कर सकता है।
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