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दिशा पाएँ
सुनने से ज्ञान प्राप्त होता है।
देखने से ज्ञान प्राप्त होता है।
पढ़ने से ज्ञान प्राप्त होता है।
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अब यह ज्ञान मष्तिष्क में जमा हो कर भय, बोझ बनता जाता है और कई कई साल तंग करता है।
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जिसको सुनाते हैं वह सुनता नहीँ।
बह कहता औऱ सोचता है मैं क्यों बेबजह सिर दर्द करूँ।
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कल एक बस में बैठा सुना रहा था। लिखना मन को शांत करना है।
प्रोफेसर साहिब के एक दम कान खड़े हो गए और ध्यान से सुनने लगे।
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उस ब्यक्ति ने बताया
2012 में मैं स्टेशन पर बैठा था।
मेरे साथ एक दम्पति बैठी थी।
पत्नी ने पति से पूछा : जी क्या आप बचपन से ही इतने शांत स्वभाब के है?
"नहीँ" पति बोला।
पत्नी ने कहा:
फिर आपको गुस्सा/क्रोध क्यों नहीं आता है?
😢
"बहुत आता है। परन्तु मैं बोल कर नहीँ लिख कर गुस्सा निकाल लेता हूँ और लिखे हुये कागज़ को फाड़ देता हूँ, या जला देता हूँ।"
इस तरह गुस्सा भी शांत और दुसरों के मन को ठेस भी नहीँ।
तभी से प्रोफेसर साहिब किताबें लिखते हैं।
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आप भी जो।मन आए लिखो। मन की घुटन आपकी ऊर्जा बन जाएगी।
अधिक पढ़ा जाएगा।
जो काम का है रख लो, जो नहीँ है उसे फाड़ दो, जला दो या फ्लश कर दो। मन शांत नींद गहरी।
चेताबनी:
किसी का नाम न लिख कोड लिखें ताकि बबाल से बच सकें।
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