Guidance
शिक्षा मार्गदर्शन
बहुत से इंसानों अौर माता पिता के लिए वच्चो की पढ़ाई लिखाई एक बहुत बढ़ा बोझ लगती है।
जबकि एक पढ़ाई लिखाई ही दुनिया में #1 सभी सुविधाएं देने वाली है ।
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क्योंकि पढाई लिखाई गहन और गहरी सोच देती है,
संस्कार, संस्कृति को बढ़ावा देती है।
समुद्र बहुत विशाल होता है कुआं बहुत संकीर्ण होता है।
परन्तु पीने के लिए कुएं के जल का उपयोग होता है न कि समुद्री जल का।
इसी तरह पढ़ाई-लिखई
धनवल,
शारिरिक वल,
शक्ति वल
पर भारी पड़ जाती है।
कैसे ?
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दो दोस्त वचपन मे इकठे स्कूल जाते थे।
हम इनका कालपनिक नाम स्वतन्त्र अौर सोज्नय रख लेते हैं।
स्वतंत्र के पिता विजनैस करते थे और सौजंन्य के पिता एक आफिस में काम किया करते थे।
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जैसी संगति वैसी रंगत।
स्वतंत्र हमेशा पैसे की वातें करता।
और सोजंय को नीचा दिखाता रहता।
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दिन बीतते गए।
स्वतंत्र ने 12 तक पढ़ाई की और अपने पिताजी के साथ व्यवसाय करने लगा।
सोजन्य ने M. Sc की और ओफिसर लग गया।
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15 साल वाद सोजन्य ने अपना घर वैकं से कर्ज लेकर वनाया।
उसने अपने सभी वचपन के दोस्तों को आमंत्रित किया ।
स्वतंत्र को भी।
स्वतंत्र आया तो सही परंतु घर कितना योजनावद् तरीके से और सूदंर वना है देख कर अचम्बा रह गया
और मन ही मन जल भुन गया कि मेरे से पैंसिल पैन उधार ले कर पढ़ने वाला इतने अच्छे जीवन और मकान का मालिक कैसे वन गया।
मन ही मन सोचा कि मेरे पास इतना पैसा है,
मैं इससे वेहतर घर वनाऊंगा।
यही सोचकर उसने सोजंय से उस मिस्त्री का पता ले लिया
और सोजंय के घर से आने के वाद पहला काम जो किया वह था
"मिस्त्री को ढूंढना"
मिस्त्री ढूंढने के वाद,
मकान वनाना शुरू।
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स्वतंत्र जब सुबह अपने विजनैस पर जाता तो,
मिस्त्री से पूछताछ करके जाता कि आज कितना और क्या काम होगा?
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संध्या को फिर आता और पूरी पूछताछ करता कि कितना काम हुआ है और काम कब समाप्त होगा।
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पैसा है परन्तु ज्ञान और धीरज नहीं है।
पैसे से सामान यानी
सिमेंट,
ईंटे,
रेत खरीद सकते हो
परन्तु मिस्त्री की क्रियेटिव कला तो नहीं।
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कुछ वनाना और कुछ सही, उपयोगी और अच्छा वनाने में बहुत अंतर है।
स्वतंत्र की रोज रोज की किच-किच
और दख़ल अंदाजी से तंग आकर मिस्त्री
और उसकी टीम भाग खड़ हुई,
जो वकाया था बह भी छोड़ गई।,,
सहनशीलता गुणवत्ता को जन्म देती है
जो आमतौर पर गहन प्रशिक्षण और पढ़ाई-लिखई से प्राप्त होती है।
Education is a better guard of Liberty than standing army.
अब स्वतंत्र अपने घर को आधा अधुरा देख कर दुखी जीवन जी रहा है।
दोस्तों और रिश्तेदारों केतंज अलग से सहन करता है।
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यह है केवल पैसा कमाना लक्ष्य
या
शिक्षा के वीच फैसला लेना।
शिक्षा जीवन को गुणवत्ता देती है।
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शिक्षा प्राप्त करने की उम्र की कोई सीमा नहीं है।
79 साल के पटना के विनोद जी IGNOU से Ph D कर रहे हैं।
मेरा शत शत नमन।
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