एसी कोई मंजिल नहीं
है
जिसे तक पहुचने कोई
रास्ता न हो।
2
सोचो, लिख कर सोचें
रास्ता जरुर
मिलेगा।
3
जब मिल जाए तो चलो।
लोगों की परवाह न करो।
4
करो, न करो, लोग अपनी
आदतन कुछ न कुछ तो वोलेगे ही।
5
कैसे?
मैं और मेरा दोस्त कार में जा रहे थे।
पीछे से एक कार आई और छूं करके निकल गई।
हमारी कार के दरवाजे वंद, शीशे वंद।
दोस्त वो ला : ओलंपिक में गोल्ड मेडल की तैयारी कर रहे हो क्या?
अव आगे एक कार बहुत ही धीरे धीरे च ला रहा था।
अव दोस्त फिर वोला: वाप का पार्क समझा है रोड को ?
सीख:
लोग विना सोचे समझे वोलते ही रहते हैं,
कमैट करते रहते है ह।््ते््््ते््ते््््त््ते््््ते््ते्््््ते््््ते््ते््््त््ते््््ते््ते््
आप अपने लक्ष्य पर फोकस करे।
मंजिल जरूर मिलेगी।
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