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शनिवार, 20 फ़रवरी 2021

घर बैठे English बोलना/लिखना सींखेँ

 गुरु की सीख- अपने जीवन की जिमेबारी लो।

सफलता भागती हुई मिलेगी💐

शिष्य ने
 गुरु जी की 
घास फूस से बनी 
कुटिया में ज्यूँ 
ही प्रवेश किया

गुरु जी ने 
भांप लिया 
कि इसके मन में
उथल पुथल चल
रही है।

गुरु जी ने पूछा :
वत्स, बतायो क्या चल रहा है।

4
बस पूछने की देर थी
जैसे जल का  बांध  टूट गया होता है
बैसे ही वत्स ने बोलना शुरू किया।

4.1 
मैं अपने लक्ष्य से चूक गया।
4.2
 मेरे टीचर ठीक पढ़ाते नहीँ।
4.3
 घर पर काम बहुत है।
 माता पिता समझते नहीँ कि 
मैं पढ़ता हूँ। 
4.4 
सभी मुझे ही आवाजें लगाते हैं।
4.5
  😊पढ़ने के लिये समय नहीँ मिलता।
4.6 
कुछ किस्मत भी खराब चल रही है।

5
गुरु जी सुने जा रहे थे। 

वत्स से बोले: 

मैं समझ गया आप 3 दिन बाद आना।
आपकी सारी समस्यायों का समाधान दूँगा।
6

3 दिन बाद बह लड़का गुरु जी के पास आया और आशा भरी निगाहों से गुरुजी की तरफ देखा।

गुरु जी ने दूसरे शिष्यों को जाने के लिये इशारा किया।
सभी ने प्रणाम किया और प्रस्थान कर गए।

केवल वत्स और गुरुजी रह गए।
7
आपके पास किताबें हैँ?
●     जी हाँ|
स्कूल/कालिज कौन ले कर जाता है?
 ●     मैं गुरुजी।
(वत्स सोच रहा था कैसा बेतुका प्रशन है?)
बहां किताबों को खोलता कौन है?
●       मैं गुरु जी।
किताब को पढ़ने के बाद बन्द कौन करता है?
●       मैं गुरु जी।
(वत्स बहुत हैरान था कि कैसे कैसे प्रशन गुरुजी पूछ रहे थे)

कभी किसी किताब ने यह कहा कि बस अब मुझे बन्द करदो?
● नहीँ कभी नहीं गुरु जी।

तो सुनो :
■ <जब तक आप अपने जीवन में सफलता व बिफलता की जिमेबारी स्वयं पर नहीँ लेते, तब तक सफलता संभव नहीँ है। 3 दिन पहले आप ने सभी को अपनी असफलता का दोषी बना दिया, परन्तु अपनी जिमेबारी के बारे में नहीँ बताया।
बदलाव तो आपको अपनी सोच में करना है, परिश्रम कर समर्था बधाना आप की अपनी जिमेबारी है।
किताबें हैं, पढ़ना आप शुरू करते हो, आप ही पढ़ना बन्द करते हो तो दुसरों का क्या दोष।

■ समय नहीँ है?
 क्या जो सफल होते हैं उनको 26 घन्टे रोज़ मिलते हैं?

■ एक घण्टा रात पढ़ो, नींद का त्याग करो।
     एक घण्टा सुबह पहले उठो, और पढ़ो।
     सफलता चाहिये तो संघर्ष तो करना ही पड़ेगा।
😢
वत्स सब समझ चुका था। 

उसे समझ आ गयी थी कि सफलता की कुंजी मेरे अपने पास है। 

गुरु जी को नमस्कार किया और प्रस्थान कर गया।
😢😢
यह हम सभी की दशा है।

 हम अपनी असफ़लतायों के लिये बहाने ढूंढते हैं, दुसरों को दोषी मानते हैं,

 जबकि बदलाव तो अपनी सोच और जीवन शैली में करना है।




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