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रविवार, 14 फ़रवरी 2021

घर बैठे English बोलना/लिखना सींखेँ

 Self faith - 

☺️Yes, I can attitude - ☺️

is a great motivator

for success

in any project 

or 

any field of work.


While

Self doubt i. e. an attitude of 

* No, I can't do this* 

is a great crippler of progress in life.


आत्म बिश्वास कि

 * यह काम तो मैं कर सकता हूँ*

किसी भी काम या पढ़ाई/ पेपर के लिये बहुत बड़ी अभिप्रेरणा है।

जबकि

 अपनी आत्म शक्ति पर अंधविश्वास/भर्मित हो अविश्वास करना  किसी भी काम या पढ़ाई/पेपर में सफलता का सबसे बड़ा अविरोध(रोड़ा ) है।



केवल मन ही मन कहने से :

 मैं  यह कर सकता हूँ" 50% कर्म को सफल कर देता है। 


बाकी मेहनत।


कहते हैं: 


Well begun is half done.

 किसी भी काम/पढ़ाई को हां यानी मन से हां कहने से आधा काम हो जाता बाकी आधा करना पड़ता है।


"हाँ "का जादू देखिए।

1

आज से 20-22 साल पहले  एक यूनिवर्सिटी में एक  प्रोफेसर के साथ एक आफिस बॉय था।

2

 प्रोफेसर साहिब उस प्रोफेसर से मिलने गए।

3

 यूनिवर्सिटी प्रोफेसर के सामने प्रोफेसर साहिब बैठे हैं।

4

 यूनिवर्सिटी प्रोफेसर ने आफिस घण्टी (office bell) बजाई और आफिस बॉय आया और यूनिवर्सिटी प्रोफेसर ने कहा:

   * यह फ़ाइल देना।

     जवाब: 

यह फ़ाइल कई दिन से मिल नहीँ रही है।

** ठीक है, जायो।।

फिर युनिवेर्सिटी प्रोफेसर ने आफिस की घन्टी( bell) बजाई ।

आफिस बॉय आया।

यूनिवर्सिटी प्रोफेसर ने पर्ची दी और कहा: 

यह किताब मेरी लाइब्रेरी से ले आओ। 

**जवाब मिला: 

मैंने ढूंढी थी नहीँ मिली थी।

*** चलो दो कप चाय पिला दो। हमारे दोस्त प्रोफेसर साहिब आये हैं।

* जवाब:

 दुकान पर रश(भीड़) बहुत है।


यूनिवर्सिटी प्रोफेसर झला कर बोला: 


कोई काम न भी करना हो तो कम से" न करने की कला तो सीख लो" Be diplomatic।in saying "No" युनिवर्सिटी प्रोफेसर के कहने का मतलब था।


प्रोफेसर साहिब ने सोचा: 

यूनिवर्सिटी प्रोफेसर नाराज हो गया औऱ कुर्सी से उठते हुये बोले: 

अच्छा मैं चलता हूँ।


परन्तु यूनिवर्सिटी प्रोफेसर ने कहा: 

नहीँ बैठो साहिब। 


चाय तो मैं पिलाता हूँ।



औऱ फोन किया।



चाय बाले का लड़का 2 कप चाय दे गया। 

👍

अब 20/22 साल बाद प्रोफेसर साहिब कांफ्रेंस अटेंड करने दूसरे शहर गए और पता चला यह  यूनिवर्सिटी बाले प्रोफेसर भी इसी शहर मे है।

इस दोस्त से मिलने गए।


देख कर हैरान हो गए।

 चाय उसी चाय बाले के लड़के ने दी और बड़े अदब से "नमस्कार" की।

***

इस लड़के की 

सारी स्टोरी जानने की उत्सुकता हुई। पूछा तो


यूनिवर्सिटी प्रोफेसर ने बताया:


 साहिब बह आफिस बॉय बहुत ही बदतमीज था। 


जिस डिपार्टमेंट में जाता बहिं से शिकायतें।

 अंत में ससपेंड हो गया।


यह लड़का अनपढ़ था । 

परन्तु 

*संस्कारी,

 मेहनती  और 

तमीज बाला है"


मैंने फीस देकर इसे पढ़ाया लिखाया और 10बीं करवाई।


उसके बाद अपने पास ही नौकरी पर रख लिया। 

जहां ट्रांसफर होती है, एक आधे महीने में इसकी भी ट्रांसफर बहिं करवा लेता हूँ।




22000 रुपये तनखाह है, शादी हो गई है 2 बच्चे हैं। बाकी बाहेगुरु करने बाला है।


मैं तो साधन हूँ।


चाय पी और प्रोफेसर बापिस चले आये।

☺️☺️ 

यह  है अच्छी बोलबानी, संस्कारो और काम को "हाँ" कहने( रबैया attitude)का फल।


सोच रहे थे: 

1

 पढ़ाई बड़ी या

    संस्कार

2

 डिग्री बड़ी या

    लग्न

3 

नौकरी बड़ी या

   ब्यवहार।

तो अंत में निष्कर्ष पर पहुंचे: 

 *पढ़ाई,

 **संस्कार, 

***लग्न, 

****नौकरी, 

*****तमीज यानी 

भद्र बोलबानी, 

********मर्यादायों का पालन और ब्यवहार सभी जीवन को अच्छा बनाते हैं। सभी को सीखने और अपनाने चाहिये। बुरी आदतों का मोल जीवन को बहुत देना पड़ता है।

😢😢

यह है जीवन में मन और मुख से "हाँ" बोलने का जादू।






 








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