माता पिता परिवार को अपील
अपने बचों पर बिश्वास करें।
1
अपने बच्चों का हौसला बढ़ाये।
2
उनकी नुक्ताचीनी या पढ़ने के लिए ही न कहते रहें।
3
बचों का हौसला कोई पैसे से ही नहीँ बढ़ता। पिता इतना कह दे
बेटा मुझे तुझ पर पूरा भरोसा है तो बच्चे का पढ़ने लिखने के लिए हौसला 10 गुणा बढ़ जाता है।
4
मेरा 20 साल से ऊपर का तजुर्बा कहता है(जो बच्चे बताते हैं)
माता पिता सभी पड़ोसियों, रिश्तेदारों, बच्चे के जानकारों और मित्रोँ पर बोल।बोल कर भरोसा करेंगे
परन्तु बच्चे को घूरेंगे डांटे गे सभी के सामने।
इससे बच्चे में हीन भावना बढ़ती है।
5
बच्चे की प्रशंशा या शाबासी तो पिता और माता के सुपने में नहीँ।
यदि बच्चा गलती करे तो उसे बता दें कि दूसरे के सांमने डांटना हमारी मजबूरी है क्योंकि सम्बन्ध भी जरूरी है। परंतु हमेँ पता है कसूर तुम्हारा नहीँ। तुम "सॉरी" कह देना।
इससे बच्चे का मन कम दुखता है।
कई माँ बाप तो बात बात पर ईज़्ज़त बेइज्जती बनाते रहते हैं और अपने बच्चे से रिश्ते बिगाड़ते हैं।
6 एक बात याद रखें, दुख सुख , बुढ़ापे में बच्चे ने ही काम आना है, किसी पड़ोसी, रिश्तेदार या मित्र ने नहीँ।
अपने बच्चों को प्यार से पेश आयो और उनका हौसला बढ़ायो। उनका मार्गदर्शन करो और दिशा निर्देश दो।
बचों की पड़ाई पर लगाया 1 रुपया जिन्दगी में हजारों बन कर आएगा।
पढाई के लिए ख़ुश हो कर बच्चे की सहायता करो। नुक़तचिनियाँ न निकालो।
बच्चे को दुख देती हैं।
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