फोकस घटाती है यह सोच
Self mental discipline
एक बच्चे ने बताया, सर आप ने बहुत से मेरे अन्दर की कमियों को खोजने।में सहायता की है। अब पढ़ना अच्छा और आसान लगता है।
मैं हमेशा अपने पिता की बिरोधता करता था, माताजी से उलझता रहता था।
क्योंकि मैं MA में पढ़ रहा हूँ।मेरा interest और concern केवल और केवल पढ़ाई होना चाहिए।
जब की मेरा ध्यान पढ़ने में कम और दूसरों को बताने और बहस मे अधिक।
1
पिता:
पिता जीवन दाता है। बिल्कुल ठीक मैंने 20 साल जब मैं छोटा होता तब से अहसास किया कि सभी रिश्तेदार, पड़ोसी, जानकार हँस हँस कर बाते करते हैं परन्तु फीस तो पिताजी ने दी।
खाना माता जी ने पकाया, कपड़े माता जी ने धोए और आज मैं इनकी बदौलत MA कर रहा हूँ और इनकी ही निंदा करता हूँ।
सब बन्द। ।।
पिता जी के माता जी के सुबह प्रणाम करता हूँ।
दिन पहले से शुरू करता हूँ।
2
बिल्कुल सही: प्राथना के 2 भाग हैं।
पहला:
है प्रभु या इष्ट देव जो मेरे बश में नहीँ, उसे मानने की शक्ति दो।
दूसरा:
हे प्रभु या इष्ट देब जो मेरे बश में है उसे करने में मेरी सहायता करो।
करना मैंने है।
इससे तो मेरा जीवन ही बदल गया है।
सोशल मीडिया बन्द। 4 बजे 5 मिन्ट ईमेल देखता हूँ। दोस्तों के फ़ोन बन्द।।बैंक पेपर के बाद दोस्त भी जहीं हैं।
परन्तु नौकरी तो सारी उम्र की है। दोस्त तो बदलते रहते हैं।
TV बन्द, क्या करना ख़बरें सुन कर या फिल्में देख कर।
इससे मेरा समय 10 गुणा बढ़ गया है। आत्म सुधार /आदतें ही इन्सान को आगे ले जाती हैं।
किताबें तो सभी के लिये एक ही हैं। जिसने जितनी तैयारी कर ली, उसकी ज़िन्दगी चमक जाएगी।
बाकी बहाने ढूंढते रहेंगें।
2 महीने
61 days
1464 घण्टे
87840 minutes
5270400 seconds (52 लाख 70 हज़ार 400 पल)
2000 पेज।
जो ज्यादा बार revise करेगा बहि सफलता का सिकंदर बनेगा।
Mind मैप या माइंड ट्री बना कर पढें। (Google पर ढूंढे.और बनाना सीखें)बार बार revise करना आसान हो जाता है। एक दिन में 5 से 10 बार revise कर लोगे।
Online पेपर की प्रैक्टिस करेँ। नहीं तो प्रश्न छूट जायेंगे।
आप देखेंगे कि आप को 80% syllabus तो आता है।
चुपचाप गहन स्टडी करें। 20% के लिए किताबें ढूंढे, दुसरों से सलाह लें ।
सलाहकार सकारत्मक हो
नकरत्मक्ता जिन्दगी और कैरियर खराब कर देती है।
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