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Thursday, December 15, 2016

Life

जीवन एक सफर है।  
इस सफर के शायद दो भाग हैं। 
इन दो भागों  के बीच एक पड़ाव है शायद।  

यह मेरे अनुभव हैं।  

पहला भाग बचपन से शादी और बच्चों को पढ़ाना लिखाना और शादी करना। 
दूसरा उसके बाद का दादा दादी का रोल निभाना। 

हाँ जीवन केवल दुखों का ही घर नहीं है। 
या केवल सुखों से भरा ही नहीं है। 

जीवन दुखो और सुखों का मेल जोल ही है।  
यह नहीं कि हमेशा ही जीवन दुखी रहेगा 
और दूसरी तरफ यह भी सही नहीं है कि जीवन सुखों का बाग़ है। 

जैसे हर गुलाब के फूल के साथ कांटे होते हैं बैसे ही  जीवन में सुख के साथ दुःख होते हैं। 

जिसे हम आज दुःख या बुरी घड़ी समझते है , बीत जाने के बाद बह एक याद बन कर रह जाता है। 

जीवन जितना सरल और सादा हो उतना ही अधिक सुखदाई रहता है। 

बुरी आदतें और पंचभूत (काम, क्रोध ,मोह, लोभ, अहंकार ) इंसान का पतन कर देती हैं।  इनसे हमेशा साबधान रहना चाहिए।  सतर्क रहना चाहिए।  

यह मेरा हिंदी में पहला ब्लॉग है।  पड़ने के लिए धन्यबाद।  मैं अंग्रेजी जानता हूँ अंग्रेजी लिखता हूँ।  हिंदी के लिए गूगल टूल का प्रयोग करता हूँ।  गलतियों के लिए क्षमा करें। 

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