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Monday, April 25, 2016

Vacations

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pic courtesy: www.seadreamyarchtcruise.com


Vacations : Every body loves to go on vacations. Vacations refresh and energise. Kids and school going children for whole of the year keep on waiting for summer or winter holidays so that they may go on vacations. Plans, planning, discussions, rejection of plans, replanning and then executing the plan are all parts of vacation.

What a great pleasure!

We go on vacation to have some peace and soothing experiences out of busy life, hectic life.

But here are some people, who love to spend their vacations with their relatives generally maternal uncles family or grandparents. Even they keep on calling and inviting throughout the year.

Living and spending vacations with them gives some bitter experiences also. Instead of full pleasure, pleasure is curtailed on account of difference of opinions or perception vs. reality about the time to be spent there.

Here is an advice from a wise family: we go on a pilgrimage and spend 3-4 days there exclusively enjoying there the serenity, the company of the devotees, good feelings, good people all around. Lot of peace descends.

Sometimes we go and spend 1/2 the vacations with our relatives and grandparents. Even then the half of vacations are spent at a pilgrimage in nature's lap. This really improves health. We feel we have made best use of wealth.

I really liked this. 

Wednesday, April 13, 2016

RICHEST PERSON



Read today:

HE IS THE RICHEST 

WHOSE 

PLEASURES 

ARE CHEAPEST.

Monday, April 11, 2016

Good parenting



This is an email from one of co-professors from Management Teacher's Consortium. Under TSR Teacher's Social Responsibility) I feel, I must share with others what is good that I have read. Hence, this good writing and advice to parents:




Dear friends,

Good morning.

How to treat your children?  Wonderful.

Look at the communication of a school.

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With regards,

 
Dr. K. Sampath Kumar,  B.A. (Economics), BGL, M.Com., M.Phil., Cert. A.I.I.B.,
                                        
MBA (Finance), MBA (HR & Marketing),  ACS, FCMA, Ph. D., 
Professor

 
Success consists of getting up
just one more time than you fall
-- Oliver Goldsmith



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Thursday, April 7, 2016

DIABETES - SELF CURE.




I attended a seminar on "How to Cure Diabetes without medicine?"

Expert doctors spoke and gave lot of style management techniques to keep away the body diabetes free.

What I liked most was: Walking 10000 steps a day keeps you diabetes free. You will never develop diabetes in your body was their opinion. No need to take insulin.        Doctor who said was an M.D doctor.

A case study was cited: Mr. M was a busy Chief Executive of a top MNC i.e. business house. He got up early in the morning at 4 am and took the files to his bathroom. Sitting on the seat he finished many files. But could not evacuate well and always felt dizzy. Constipation was his major problem. He told to the doctors he consulted.

But doctors gave him another reason. You are diabetic. For this you need to manage your life style. Walk 10000 steps daily. He kept on thinking and thinking. Then one day, he took the first walked about 1000 steps. Slowly, slowly, he increased the walk to 2000, 3000, and at last in about 3 months 10000 steps.

He felt a lot of change in his daily routine. His fitness was better. His personal productivity had increased. His mood swinging was managed. Irritative mood was replaced with a smile. Relationships were improving. This he reported to his doctor. Doctor, a wise one, advised not to take any medicine but continue the life style he had achieved.

He advised: take meal 2 hours before going to bed. Take lot of water daily. Take lemonade. Wake up early as usual and drink 2-3 glasses. This will improve your constipation problem too.

Thank you, he told to his doctor.

Thursday, March 17, 2016

Marriage- the pious bond.

Marriages are settled in heaven, but celebrated on Earth,
Union of two souls is written from birth.

आज मैं दुनिया के खूबसूरत रिश्ते के बारे में लिखने जा रहा हूँ/ जीवन बनाने बाले का खूबसूरत तोहफा है।  शादी इस खूबसूरत तोहफे का एक बहुत महत्बपूर्ण भाग है।  शादी कोई दो शरीरों या दिलों का मेल नहीं बल्कि दो आत्माओं दो परिवारों का ता उम्र की ख़ुशी , जिम्मेबारी, व समाज बृद्धि का सुखद साधन है / परन्तु आज इलेक्ट्रॉनिक युग में इस महत्ब पूर्ण रिश्ते को ग्रहण सा लगता जा रहा है / शादी दो हाड मांस के इंसानों का सम्बंध है न की फेसबुक या ट्विटर।  फेसबुक या ट्विटर बातें नहीं कर सकते जब इंसान बीमार पड़ता है फेसबुक या ट्विटर ध्यान नहीं रख पता / यह एक प्यार करने बल जिम्मेबारी समझने बल इंसान ही कर सकता है।

आज युवा पीढ़ी के अधिकांश लोग इलेक्ट्रॉनिक मिडिया से परभाभीत हो कर रियल लाइफ के रिश्तों को अनदेखा करते है / 40 -50 वर्ष तक शरीर में ऊर्जा का परवाह रहता है , तब तक सब कछ अच्छा लगता है परन्तु उसके बाद बदलाब आते हैं /शरीर उतना उर्जित नहीं रहता है , केवल उत्तर्दयितुय (जिम्मेबारिआ ) ही रह जाती है /

एक शोशल साइंटिस्ट ने अपने लेख में बहुत ही अच्छा विचार दिया।  उसने लिखा : केवल सोच को बदलने की जरूरत है / पार्टनर बदलने की नहीं / कैसे एक मैडम की क्वालिफिकेशन M.sc. B.Ed , Certificate in French है / बह स्कूल में प्रिंसिपल है / उसकी उम्र अब 50 के करीब है / जब मेरे पास आई तो उसकी उम्र 42 साल थी / दो बचे है / दोनों अंग्रेजी स्कूल में पड़े और अब लड़की B.Tech और लड़का B.B.A कर रहा है /

इस प्रिंसिपल की 42 साल में समस्या क्या थी / यह तलाक लेने पर तुली थी / इस मेंटर ने बताया की तलाक से बच्चों का भविष्य खराब हो जाता है उनके अंदर परिवार रूपी संस्था के प्रति आस्था समापत हो जाती है और बच्चे समाजविरोदी कर्म पर उतारू हो जाते है / इस लिए तलाक या माता पीता का एक दूसरे के प्रति सम्मान न होना भी बच्चे के जीवन को प्यार की बजाये नफरत से भर देता है / आप समस्या बताओ ?

इस प्रिंसिपल ने बताया : मेरे पति एक PHYSIOTHERAPY के डिप्लोमा होल्डरहै और गवर्नमेंट की नौकरी करते है / मेरी और उनकी शिक्षा में व् सोच में बड़ा फर्क है / मुझे उनके रिश्ते दार , मेरे रिश्तेदार , मेरी सहेलिआं ताने देती हैं , मुझ से बर्दाश्त नही होता /      

अब मेंटर बोला : क्या उन रिश्तेदारों सह्लिओं ने कभी आप के घर के खर्च के लिए पैसे दिए हैं , जब आप या आप के बच्चे वीमार हुए तो हॉस्पिटल का  बिल दिया है ?

कभी नहीं ? तो फिर बातें कैसी। आपकी एक समस्या है की आपका पति आपसे कम पड़ा लिखा है /
इसका तो बड़ा आसान हल है / आप अपने पति को मेरे पास लेकर आना /

कुछ दिनों के बाद प्रिंसिपल अपने पति को अपने साथ लेकर मेंटर के पास आई / मेंटर ने पति से पूच्छा कि क्या चाहते हो / उस्ने कहा "इज़्ज़त " घर में मेरी कोई इज़्ज़त नहीं करता / पत्नी बच्चे कोई भी नहीं /

अपनी पढ़ाई आगे करना चाहोगे / इस उम्र में , पति बोला /

पढ़ने की कोई उम्र नहीं होती / पड़ने से जीवन सम्बर जाता है। इज़्ज़त मिलती है / आत्मबल बड़ जाटा है /
आज आप की उम्र 42 साल है तीन साल में B.P.T कर जाओगे /
पति मान गया / पत्नी ने साथ दिया / 47 साल की उम्र में प्रिंसिपल और उसका पति मेंटर से मिलने आये।  पति ने बताया सर अब मैं M.P.T हूँ मतलब Master of Physiotherapy . मेंटर  बहुत खुश हुआ  ये सोच कर कि एक परिवार विखरने से बच गया।

मेंटर ने कहा , शादी को सफल बनाने के लिए :
1 . अपने पार्टनर की कमियां नहीं गुणों की लिस्ट  बनाओ
2. हमेशा अपने पार्टनर को दुनिया का सबसे महत्ब पूर्ण समझो।
3. जब भी कभी कोई misunderstanding हो दोनों अकेले बंद कमरे में बैठ कर बात चीत से हल करो
4. रियल लाइफ के फेसबुक व ट्विटर से  बचो
5 पति पत्नी की अपनी पर्सनल  बातें किसी से शेयर न करो / दूसरे इसका मजाक उड़ाते हैं /
6 पार्टनर पर भरोसा करो / उतार चढ़ाब जीवन का हिस्सा है / लाभ में खुश नहीं हानि में दुखी नहीं
7 संस्कारी माँ बाप ही संस्कारी बच्चों को अच्छा जीवन दे सकते है
8. छोटी छोटी बातों को तूल न दे
9. अच्छे पलों को ज्यादा ध्यान दे हमेशा 10 /20 बाद का सोचें
10 परिवार को प्यार का घोसला बनायें / जंग या कुश्ती का अखाड़ा नहीं
11 तीसरे किसी को भी अपनी विवाहित जीवन में दखलंदाजी न करने दें चाहे माँ हो भाई हो बाप हो / सुनो सब की पर दिमाग से सोच कर बुरा इग्नोर कर दो / शब्द है शब्द चिपकते नहीं / परन्तु जिंदगी बर्बाद होने पर कोई भी संभारने नहीं आता /
12 सारी दुनिया में केवल परिवार ही ऐसी जगह है जहाँ इंसान सुरक्षित महसूस करता है जहाँ सुख मिलता है बाकी कहीं नहीं / गलत सलाह देने बाले से दूर रहना चाहिए / यह बर्बाद कर देते हैं
13 सभी को छोड़ कर अपने पाने र्टनर पर भरोसा करो / उसका मान सम्मान करो / मान सम्मान शब्दो/से होता है / व्यव्हार से बाद में /   एक सुझाओ :
छोटीआं नु करो प्यार ,         बड़ों करो सत्कार
मीठे बोल प्यार बढ़ाते है , रिश्ते बनाते है
कोड़े बोल रिश्ते तुड़बाते हैं
रिश्ते जिंदगी है।  इनको संभाल के रखना एक कला है / इस कला को सीखो /
14 पार्टनर में कोई कमी हो तो उस कमी को पूरा करने के लिए उसकी भरपूर मदद करो और पार्टनर को अपने बराबर ले कर आयो / जैसे प्रिंसिपल ने अपने पति को पूरी लगन से पढ़ाया और अपने काबिल बनाया / नहीं तो क्या होता बकील अपनी फीस ले लेता और तलाक हो जाता / सभी रिश्ते नाते टूट जाते बच्चों का जीवन बर्बाद हो जाता / परन्तु समझदार प्रिंसिपल ने अपने पति का साथ दिया और आज सुख से जी रही है / अब कोई रिश्तेदार आता है तो पति अपनी पत्नी की प्रशंशा करता है : मैं जो भी हु अपनी पत्नी की बदौलत हु बच्चे भी माँ को गर्ब भरी नज़रों से देखते है / अब रिश्तेदार कभी कोई बात नहीं करते।  रिश्तेदार तो अख़बारों की तरह है आज ऊपर चढ़ा देते है कल उतार फेंकते है / अपनी सूझ भूज से चलना चाहिए /

15. आज किसी भी उमर में पड़ा जा सकता है /  17 /18 साल की उमर में DIRECT 10 बी कर सकता है / 25 साल क़ी उमर है तो DIRECT  B.A कर सकता है / 35 साल की उमर है तो DIRECT M.A कर सकता है।
अपने पार्टनर को लिख कर देने से या फ़ोन में रिकॉर्ड करके अपनी मंशा बताने से दूरियां दूर हो सकती है / नया जीवन जिया जा सकता है

मेरे दो UPDATE दुनिया लाइक कर रही है
1. One life , one wife . Rest all is knife . Beware .
2. Listening leverages learning . Listen , listen . Listen for understanding not for replying and reacting without any understanding. Children reply, matured minds respond. Mirror the talk. Arguments generate heat in minds and destroy relationships while discussions throw light on issues and life becomes easier.




Words



Words can win

ARGUMENTS

BUT

wisdom

wins

life's WAR.


Wisdom comes from mirroring the words - spoken or written in books or scriptures. Words soothe. Words wound. Use words to build the bridges of relationship rather than burning the relationships.


Many times, it is not the words that destroy a relationship but the tone and presentation of the words that destroy life time relations. We need to use the words that heal the heart of others not hurt others. Words burn head and heart.  Vice versa is also true.

Sunday, March 13, 2016

REAL EDUCATION



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Educate * Empower * Elevate

Education received in schools, colleges and universities is not complete until and unless we have developed a sense of ethical and moral living. 


Sympathy and empathy are not taught but ought to be developed and focus of our learning should be developing Human Centric Solutions to the problems faced by humans throughout the world.


EDUCATION = INTELLIGENCE + CHARACTER. 

Mahatma Gandhi - the father of nation - says:

Wealth is lost, nothing is lost,
Health is lost, something is lost,
Character is lost, everything is lost.

The learnings made in the schools, colleges and universities are like the beads of the garland but the beads can be turned into garland with solid thread. Spirituality and its development is that thread. Spirituality develops the human mind to cultivate kindness, sympathy and empathy for the pains of the living - be it humans, animals or birds. Environment is loved by the spiritual person. 

So, develop spirituality to be more educated beyond schools, colleges and universities. 

Pretensions, doubts, excuses are some of the hurdles faced by an individual on spiritual path. Right master with self-effort on the spiritual path leads to right path and destination.

Those who are spiritually enlightened serve the society in wider ways,

For further reading click on: http://sivanandaonline.org/public_html/?cmd=displaysection&section_id=797

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Sunday, March 6, 2016

Skill Development



NATIONAL LEVEL SEMINAR cum WORKSHOP
                       ON
Qualitative Research Techniques in Social Sciences
          March 3rd and 4th, 2016
                         at
KRUSTI JAYANTI COLLEGE, BANGALORE (INDIA)

I felt the need of self-training in Qualitative Research Techniques in Social Sciences as I always felt lacking while guiding juniors or CEO and entrepreneurs in CSR (Corporate Social Responsibility). Many times, I felt gagged from within while delivering lecture on CSR. I confess I just crammed the subject from books and internet and vomit it virtually without understanding the concepts in totally and comprehensively.

The opportunity to learn about this skill came in the form of invitation for attending 2-day seminar at Krusti Jayanti College, Bangalore.

The national level eminent speakers included National Fellow, Indian Council of Social Science Research (ICSSR), Retired and working Professors of Social Sciences and heads of Department of Social Work, Bharathiar University.

The arrangement by the management, principal and staff was very good. The workshop was entirely handled by the students of MSW and other courses. It was really a pleasure to see the students handling each and every activity with great responsibility at such a young age. India and the world's assets are these students.

The topics  covered in the Seminar were:

1, Perspective Building and Philosophy of Qualitative Research.
2. Observation and in-depth interviews.
3. Focus Group Discussion (FGD)
4, Case Study
5. Ethnography and Participatory Action Research
6. Phenomenology, Grounded Theory and Content Analysis
7. Qualitative Data Analysis

One of the learned speakers exhorted the students to develop sympathy and empathy for the victims of natural calamities. She cited the example of Chennai natural calamity i.e. floods. She exhorted the students by saying: Did you see? There were volunteers, there were media persons and persons from all walks of life who were helping the victims during floods, but there was no social worker or educated MSW social worker. Where were the social workers or the professionals in social work. This is not sympathy or empathy but apathy. Beware, you don't be that. Passion is required to be a good social worker. Merely passing an exam cannot make you a true social worker. Be passionate about your work.


Power tea, lunch and evening tea was arranged by the college management. Punctuality was the essence. Generally, the seminars and conferences start at time, but the agenda is least followed later on. But in this case, it was not so. The agenda was strictly followed.

After valediction, at the end of 2 -day seminar, all the delegates were awarded with:

1, Certificate of participation,
2. Certificate of attendance.
3, Group photograph.

I thank all - the management, principal and staff, department of social sciences, students and co-delegates - for such a good seminar that has developed my skill in social sciences and given me enough insight into the social sciences. My special thanks to Fr. Josekutty PD, Principal, Dr. Gopal Kumar, Dean, Faculty of Humanities, Dr. Jones Richard A, Head, Department of Social Work & Convener.

I will never forget the definition of social science given by Fr. Josekutty PD who said: Social Science is a "science of hope.

In the end, I say THANK YOU AND THANK YOU VERY MUCH.

Pic courtesy: www.mat-soft.com