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Friday, August 29, 2014

Stress Management

मेन्टल प्रेशर


अपने मेन्टल प्रेशर से दूर रहें


प्रेशर से पाइप फट जाती है

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परन्तु

याद


रहे

जो कच्चा

कोला

प्रेशर

और

हीट

सहता

है

वही

हीरा

बनता

है


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सांस

से

जीवन

शुरू

होता

है

सांस

समापत

जीवन


समापत


^

^

^

साँसों

को

संभालना

सीखने

से

जीवन

संभल

जाता

है

यानि

मैडिटेशन

करने

से

सांस

संभल

जाती है


 

YES I'M ALIVE.



This shall be first poem on book #2 (which I have already started). The idea for this poem and the first line is credited to Dr. James Barbaria

I'm on a wire without a net,
Risking my own neck.
Nothing here is a sure bet.
But I'm standing tall!
Any moment I could fall.

I'm alive! I'm alive!
I'm soaring.
I'm alive! I'm alive!
Who said life is boring?

I may be shaking in my shoes
But there's nothing I can't do.
I'm more than flesh and bone.
I'm spirit too!

I'm alive! I'm alive!
I'm soaring.
I'm alive! I'm alive!
Who said life is boring?

I may bend but I won't break.
Fists are clenched; chest is tight.
I'm gonna try
with all my might
Because....

I'm alive! I'm alive!
I'm soaring.
I'm alive! I'm alive!
Who said life is boring?
 
Nothing here
can hold me down.
My spirits high
UP off the ground.

I'm alive! I'm alive!
I'm soaring.
I'm alive! I'm alive!
Who said life is boring?



 By Sandy Wyllie

Thursday, August 28, 2014

POWER OF PLANNED EDUCATION



POWER OF PLANNED EDUCATION

 

Education Loan Cost Benefit Analysis.

 

 

 

A few years back, a petty shop keeper came to a mentor and expressed his inability to get his 3 daughters educated due to financial problem.

 

Shop Keeper: Sir, I am unable to pay the fee and college expenses of my eldest daughter who is studying in B.Sc. (Non-Medicatl)

 

Mentor:    Get your daughter well educated and she will support you financially.

 

Shop Keeper: But this is not possible sir because the cost of education is very high.

 

Mentor:     How much do you earn per month?

 

Shop Keeper:    Rs. 10000 to Rs. 15000 approximately and have to feed a family of 5 and pay the fee and expenses of 3 daughters. Two are in school and the 3rd is in the college.

 

Mentor:  Do you file income tax returns?

 

Shop Keeper:  No sir.

 

Mentor: Start filing income tax returns.

 

Shop Keeper: My income is below taxable limit sir.

 

Mentor:  Even then file your returns.   (Shop keeper looks suspicious.)

However he agreed to file the returns.

 

After 3 years, the shop keeper came to the mentor and broke the news that her daughter has passed B.Sc. (Non-Medical) in first division. He brought sweets too.

 

Shop Keeper: Sir, I wish  she should do P.G.

 

Mentor: Which P.G?

 

Shop Keeper:  Any P.G.

 

Mentor: No any P.G. Ask her to go for MBA.

 

Shop Keeper: But sir for MBA, I don’t have money.

 

Mentor: How much can you spare for MBA?

 

Shop Keeper : (Thinking for a while)  About 1 lac, sir.

 

Mentor:  Right.  Now tell, ask your daughter to clear MAT (Management Aptitude Test)

 

She passed the MAT with very high rank and many institutions offered her admissions.

 

But the fee was a problem. Mentor searched for a good college for her. Efforts of the mentor bought one good college in South was having a fee below Rs. 3.00 lacs including hostel fee. The MBS course was residential. The college readily offered the admission to the brilliant student. Provisional letter of admission was sent through email on receipt of 5% of the amount.

 

Showing the receipt and admission letter to the bank, educational loan of Rs. 4.00 lacs was offered to the student.

 

After 2 years, she was MBA and was selected by a bank through campus interview. She joined the bank and is now working in the bank.

 

CBA (Cost-Benefit-Analyis)

 

Alone Graduation   -  job opening and promotion limited.

After MBA – job through campus interview.

 

Father’s investment     : Just Rs. 20000/-

Education Loan :           Rs. 4,00,000/-  ( No guarantor  or security required Only Income Tax returns required)

Rate of interest    :         10% approximately.

Repayment period :       7 years

Repayment starts:          6 months if the loanee is employed otherwise from the date of passing the final exam.

 

Now.
The daughter earns Rs. 20000/- (estimate) and pays back Rs. 5000/- per month

Balance Rs. 15000/- is retained by the family. Full support to father. Father is now having a Departmental Support.

 

After 7 years entire educational loan is repaid and full salary for the next 25 years is the students earning that comes to about Rs. 80 to 90 lacs during working period directly plus indirect income i.e. earning from the investment and re-investment.

 

Got loan of Rs. 4.00 lacs and earned Rs. 80.00 to Rs. 90.00 plus the best social prestige of carrying degree of MBA. Can any other investment pay this much?

 

 
 

Monday, August 25, 2014

Smile

दोस्तों नमस्कार

मुस्कराना 99  है जीवन का , एक अनमोल खज़ाना
मुस्कारने से बनता है जीवन का हर सफर सुहाना
कामयाबी के लिए हमेशा याद रखना
चाहे 75 जो भी हो जाये , अपनी मुस्कराहट न गबाना।

न मुस्करा सको दूसरों के संघ , अकेले मैं जरूर मुस्कराना
मुस्कराना है सेहत के लिए अजूब खजाना

मुस्कराना 99 है जीवन का, एक अनमोल खज़ाना।




 

Sunday, August 24, 2014

बैल व्यव्हार

बैल व्यव्हार

बहुत दिनों से मेरे मुहल्ले के बच्चे मुझसे कुछ कहने के लिए कह रहे थे और मैं अपनी व्यस्तता के कारण उनको किसी न  किसी बहाने से टाल रहा था।  परन्तु कल उन्हों ने हठ किया और अपने मन की बात कह दी।

बच्चे :                               अंकल हमारे मम्मी  पापा,  चाचा - चाची, ताया- ताई और सभी बड़े हम पर विश्वास नहीं करते।

मैं बोला :                           बच्चो , यह आप को कब और कैसे जानकारी हुई ?

बच्चे : जब भी हम लोग बाहर जाते हैं हमारे बड़े हमारे से सौ सवाल पूछते हैं।  कहाँ गए थे ? बता कर क्यों नहीं गए ? जाने से पहले बड़ों को बताना फ़र्ज़ नहीं है? तुम्हारा फोन भी बंद था ? आज जमाना कैसा है तुम्हे पता 
है ? ऐसे सब प्रशन हमें बहुत परेशान  करते हैं ? हम सम्पूर्ण मन से अपने दोस्तों से मिल भी नहीं सकते।  समय की पाबंदी। हम बहुत परेशान हैं।  आप बड़े हैं हमें इस समस्या का हल बताएं।

मैं मुस्कराया।

बच्चे और हैरान ब परेशान कि अंकल मुस्करा कियूं रहे हैं ?

अन्त में बच्चों ने पूछ ही लिया :     अंकल आप  हंस क्यों रहे हैं?

बचो मुझे अपने विद्यार्थी काल की एक घटना यानी कहानी याद आ गई है ?- मैंने उत्तर दिया।

कहानी का नाम सुनते ही बच्चे अपनी परेशानी भूल गए और मुझ पर कहानी सुनाने के लिए जोर डालने लगे।

हाँ तो आप की परेशानी क्या थी?                                  मैंने पुछा।

नहीं परेशानी बाद में , पहले कहानी                              बच्चे

बच्चों की इस उत्सुकता को देखते हुए मैंने कहा : अच्छा तो सुनो कहानी।

सभी बच्चे अनुशासित हो कर कुर्सियों पर बैठ गए।  कुछ छोटे बच्चे शरारतें कर रहे थे।  उनको बड़े बच्चों ने फटकार लगा चुप होकर बैठने को कहा।

तो बच्चो सुनो।  बात  उन दिनों की है जब आप के अंकल यूनिवर्सिटी में पड़ा करते थे।

छोटे बचे हसने लगे: हा हा हा एंकल भी पढ़ते थे।  मार पड़ती थी ?            हाँ पड़ती थी। 
सभी बच्चे बड़े जोर से हँसे।

कहानी  शुरू :  जब हम बच्चे थे तो   हमे भी अच्छा नहीं लगता था कि हमारे माँ बाप या बड़े बजुर्ग हमसे आने जाने के बारे में क्यों पूछते हैँ ?

हम बच्चों ने अपने प्रोफेसर से यह बात की और हमारे प्रोफेसर ने यह कहानी सुनाई ? सुनायुं ?

सुनायो  न अंकल !

तो सुनो।

एक गरीब किसान था।  बह और उसकी पत्नी दोनों खुद अपना हल जोत कर अपनी जमीन की बोयाई करते क्यूंकि बैल तो उनके पास थे  नहीं।

इतने गरीब थे ? बच्चों ने पूछा।

हाँ बहुत गरीब थे।

किसी द्याबान किसान ने उनको एक बछड़ा दान में दे दिया।  इस  किसान ने प्यार से इस बछड़े का नाम "दिनू" रख दिया।  बछड़ा बड़ा हो होता गया। 

कुछ दिनों के बाद किसी और गाँब के दानी किसान ने इस किसान को एक बछड़ा (गाय या भैंस का बच्चा ) दे दिया।

किसान और उसका परिवार बहुत खुश था कि अब उनके पास दो बछड़े हैं।  जब यह बछड़े बड़े होंगे तो उनको हल ख़ुद नहीं जोतना पड़ेगा बल्कि यह बैल उनके जीवन का पालन पोषण करेंगे और जीवन आसान हो जायेगा।

इस नए बछड़े को प्यार से "दिवेश " पुकारने लगे।

बच्चे बड़ी उत्सुकता से सुन रहे थे। 

बछड़े खेलते कूदते चारा खाते पानी पीते सभी को अच्छे  लगते। कई बार तो बछड़े कपड़े तक खा जाते।  जब बीमार होते तो किसान दूर के हस्पताल से पशुओं के डॉक्टर को बुलाता और  बच्छड़ों का  इलाज़ ब दवाई करवाता।  जब बछड़े बीमार होते या उनको चोट लगती तो घर के सभी छोटे बड़े बड़े चिन्तित रहते।  जब तक कि बछड़े ठीक नहीं हो जाते।  जब बछड़े पूर्ण रूप से चारा खाने लगते तभी किसान ब उसके परिवार बाले मन से खाना खाने लगते।

आहिस्ता आहिस्ता बछड़े बड़े हो गए समय बैल बन गए।

किसान बहुत खुश था कि उसके पास दो बैल हैं।  गाँब के लोग भी बातें करते कि किसान के दिन अब अच्छे आ रहे हैँ।  अब किसान खुश रहा करेगा।

किसान ने दो घंटों खरीदी और बैलों के गले में बांद दी।

घण्टियों की आबाज से ही किसान की पत्नी को पता चल जाता कि बैल जंगल से चार कर आ गए हैं।

एक दिन किसान ने सोचा कि अब समय आ गया है कि बैलों को हल से जोता  जाए।

अँकल बैल को कैसे जोता जाता है ? एक छोटे से बच्चे ने पुछा।

बेटे हल खेत को जोतने बाली यंतिरिका होती है
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किसान और उसकी पत्नी ने सभी तैयारों की और दोनों बैलों को खेत में ले जा कर एक नारियल फोड़ा
, प्रार्थना की और बैलों को हल से जोड़ा।  परन्तु ये क्या "दीनू " तो चुपचाप शांति से हल से जुड़ा खड़ा है परन्तु "दिवेश " हल से जुड़ ही नहीं रहा और हल को तोड़ कर भागने की कोशिश कर रहा है। 

किसान ने बहुत कोशिश की परन्तु सफलता न मिली।  वह निराश हो गया।  कई दिन यही सिलसिला चलता रहा परन्तु "दिवेश" जिम्मेबारी लेने को तैयार ही नहीं था।

एक दिन हार कर किसान ने "दिवेश " को खुला छोड़ दिया। "दिवेश" बहुत खुश था।  जंगल में घूमता ,अपनी मर्जी की घास खाता, नदी  से पानी पीता और अपनी मर्जी से खुले जंगल में सो जाता।  आजादी ही आजादी।  कोई रोक टॉक नहीं कोई जिम्मेबारी नहीं।

छः महीने बीत गए बड़े माझे से।  एक दिन 'दिवेश " अपने पुरे मन से जंगल मैं भाग रहा था ताजा कि इसके सीँग एक झाड़ी ममें फंस गए।  "दिवेश" ने बहुत कोशिश कि सीँग छूट जाए परन्तु सींग नहीं छूटे बल्कि एक सींग टूट गया।  बहुत दर्द हुआ।  बहुत खून बहा।  "दिवेश" बहुत तड़फा।  बहुत चिल्लाया।  परन्तु जंगल में वह अकेला था इस लिए कोई उसकी सहायता के लिए नहीं आया।  किसान को भी पता न लगा।  घाब से खून बहता रहा।  थोड़े दिनों के बाद घाब में कीड़े पैदा हो गए। 

आहिस्ता, आहिस्ता यह कीड़े सारे शरीर मैं फेल गए और "दिवेश " की असमय मौत हो गई।

अब "दीनू" की सुनो।  "दीनू " सुबह ताजा हरा चारा खाता।  किसान या उसकी पत्नी हर रोज़ उसकी मालिश करती।  "दीनू" और किसान फिर खेत मैं चले जाते।  किसान उसे बड़े प्यार से हल से जोतता और अपना खेत की बोयई करता।  दोपहर को किसान अपना खाना खता तो 'दीनू" को भी पेड़ की छाया के नीचे बांड देता।  हरा चारा डालता, पीने के लिए पानी डालता।  संध्या समय "दीनू " ब "किसान दोनों घर  आते।  किसान का बीटा दीनू की मालिश करता और चारा डालता।

फिर "दीनू " आराम से सो जाता।  जब "दीनू" बीमार होता किसान भाग कर साथ बाले गायों से डॉक्टर को लेकर आता  और दवाई दारू करता।  तब तक घर में ख़ुशी नहीं आती जब तक ":दीनू " ठीक नहीं हो जाता।  "दीनू" था तो बैल परन्तु सभी उससे घर के सदस्य की तरह ही प्यार करते।

बच्चो जो बचे अपनी जिमेदारी को समझते हैं अपने माता पिता की आज्ञा का पालन करते हैं वह जीवन मे सुख भोगते हैं और उनका जीवन भी लम्बा होता है।

आप "दीनू" बनोगे या "दिवेश"

अंकल "दीनू "

माता पिता किसान है हमारा बेलगाम आजाद गैर जिम्मेबार व्यवहार "दिवेश " जिम्मेबार व्यवहार अनुशाषित जीवन "दीनू " है।

अब बच्चों के माता पिता आते हैं और पूछते हैं की आप ने बच्चों को क्या कहा।  बच्चे भी मुस्कराते हैं मैं भी।  यह कहानी तो मुझे और बच्चों को पता है।  परन्तु उनके व्यव्हार का बदलाब माता पिता को महसूस हो रहा है।







 

Monday, August 18, 2014

To win the race, slow down


To win the race, slow down

            An article published in The Tribune dated 14th August, 2014  

            by Dr. Aditya Ratan, a Panchkula (Haryana-India) based consultant                  

            CARDIOLOGIST.

 

In today’s fast-paced world, it is a aptly said that stress is nothing but a socially acceptable form of mental illness. Stress often results from mismatch between expectations and abilities. Those who are stressed are likely to be unhealthy, less motivated and less productive. However, most of the stress can be easily managed.

 

Here are a few simple steps that will help.

 

  • Don’t burden your brain with too many things to memorise. Keep a simple organizer diary handy or use your smartpone organizer apps to note down the to-do list for the day. Plan your day ahead. Keep separate time slots for work, meals, family and social calls. Keep your mind clutter-free by noting down even the smallest things like greeting someone on a birthday, anniversary or payment of bills etc.
 
  • Visualise your work place as your playground and try to maintain a passion for work.
 
  • Try to sneak in time for a power nap in the afternoon, which may be as little as 20 minutes. Don’t let others encroach upon your schedule.
 
  • Avoid excessive use of social networking sites during your working hours.
 
  • Appreciate, acknowledge and show your gratitude for every small work done by any co-worker. Don’t fret over unfinished tasks as it crates a negative atmosphere ad does not help any cause.
 
  • Don’t throw your bags or push your kids away when you reach home. Your actual job starts as soon as you enter the house. The best de-stressor is spending quality time with the persons you love and care for the most.
 
  • De-stressing is important but try to avoid electronic media for the purpose.  A few silent deep breaths or sitting in meditation can help you de-stress faster than you can imagine. It is rightly said that the best time to relax is when you don’t have time for it.
 
  • Prioritize your work. Plan and do the important and necessary things first. There is no harm in organizing and delegating things that don’t require you in person.
 
  • The first time to take up and finish the task in band is now. Meticulous planning is of no help unless acted upon. Don’t procrastinate
 
  • Go for vacations often. Spend your weekends relaxing. Try not to bring your work home. Plan your week ahead.
 
  • Inculcate a hobby and spend your leisure time in doing what you enjoy the most.
 
  • Go with the rhythm of the nature. Dedicate your early morning for yoga, meditation or a long walk. Remain in the present moment. Listen to the chirping of the birds and enjoy the blessings of nature.
 
  • Pamper yourself. Go for spas: head and body messages/workout in the gym. Shopping and rewarding yourself can be a big stress buster for some.
 
  • Don’t get upset by the happenings around you. Remember the spiritual mantra: this too shall pass.

 

 

Monday, August 4, 2014

ONLY FRIEND.



It's only a friend
that will go to no end.
With a heart so sincere
tell you things about yourself
you don't want to hear.

I know it's not often easy
what I have to say.
I may not even go about it
the right way.

But it's only a friend
that will go to no end
just to tell you.
I got to tell you.

And though you may shout
because it fills you with rancor
you know with no doubt
that I am your achor.

I know it's not often easy
what I have to say.
I may not even go about it
the right way.

But it's only a friend
that will go to no end
just to tell you.
I got to tell you.

You think I'm tearing you apart?
You're so filled with anger.
This is only a start.
There's room here to change.

I know it's not often easy
what I have to say.
I may not even go about it
the right way.

But it's only a friend
that will go to no end
just to tell you.
I got to tell you.
 
 



       - by Sandy Wyllie

Sunday, August 3, 2014

UNTRIED


DREAMER

Once there was a man I knew
who didn't know what he was getting into.
He lived on his imagination
and gave into every temptation.
It didn't matter who he hurt.
I guess you could say he was just a flirt.

You suffer no consequences,
yet high and mighty are your defenses.
You really haven't thought things through.
I'm thinking what is wrong with you!
Are you has harsh as the wind outside?
You close your eyes and stand untried.

He delved into all the pleasures,
but really took no proper measures.
Speeding fast as a grand prix,
on his own and flying free.
That's life when your a perpetual single,
all you know how to do is mix and mingle.

You suffer no consequences,
yet high and mighty are your defenses.
You really haven't thought things through.
I'm thinking what is wrong with you!
Are you has harsh as the wind outside?
You close your eyes and stand untried.

One woman after another,
and one no better than the other.
Not a one he cultivated.
They only made him feel suffocated.
What did I ever think he'd want with me?
On his own and flyng free.

You suffer no consequences,
yet high and mighty are your defenses.
You really haven't thought things through.
I'm thinking what is wrong with you!
Are you has harsh as the wind outside?
You close your eyes and stand untried.

 

                                  - Sandra Wyllie from USA